आगरा (खेरागढ़): खेरागढ़ कस्बे के कागारौल चौराहे पर लाखों रुपये की लागत से बना सामुदायिक महिला शौचालय अवैध अतिक्रमण की भेंट चढ़ गया है। शौचालय के बाहर ठेले लगाकर खीरा, केला और अन्य फल बेचे जा रहे हैं, जिससे यह पूरी तरह से घिरा हुआ है और महज एक शोपीस बनकर रह गया है। खुले में शौच की रोकथाम के लिए सरकार करोड़ों खर्च कर जागरूकता अभियान चला रही है, लेकिन खेरागढ़ में जिम्मेदार अधिकारी बेपरवाह नजर आ रहे हैं।
ठेले वालों ने रोका रास्ता, महिलाएं परेशान

नगर पंचायत खेरागढ़ ने महिलाओं की सुविधा के लिए कागारौल चौराहे पर एक उच्च स्तरीय महिला शौचालय का निर्माण कराया था। लेकिन, दबंग ठेले वालों ने शौचालय के रास्ते में ही अपनी ठेलें लगा दी हैं, जिससे वहां तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। इतना ही नहीं, महिला शौचालय के चारों ओर दुकानें लगाकर भी अवैध अतिक्रमण कर लिया गया है। इस कारण महिलाएं शौचालय का उपयोग नहीं कर पा रही हैं और उन्हें खुले में शौच करने को मजबूर होना पड़ रहा है।
कोतवाली से कुछ ही कदम दूर बदहाली

आश्चर्य की बात यह है कि यह सार्वजनिक शौचालय खेरागढ़ कोतवाली से महज कुछ ही कदमों की दूरी पर स्थित है। इसके बावजूद, इसकी हालत इतनी बदतर है कि दूर-दराज से आने वाली महिलाओं को यह भी पता नहीं चलता कि यहां कोई शौचालय है। जब महिलाएं ठेले वालों से अपने ठेले हटाने को कहती हैं, तो वे नहीं मानते। अतिक्रमण और असामाजिक तत्वों के जमावड़े के कारण भी महिलाएं शौचालय का उपयोग करने से कतराती हैं।
अतिक्रमण अभियान के बाद भी स्थिति जस की तस
कुछ समय पहले अवैध अतिक्रमण के खिलाफ एक अभियान भी चलाया गया था और नगर पंचायत द्वारा चौराहों पर स्टील के पाइप भी लगाए गए थे। लेकिन, ऐसा लगता है कि इस अभियान का भी कोई खास असर नहीं हुआ और स्थिति जस की तस बनी हुई है। यह सवाल उठता है कि जब सरकार खुले में शौच मुक्त भारत बनाने के लिए इतना जोर दे रही है, तो स्थानीय स्तर पर ऐसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक सुविधाओं पर अतिक्रमण क्यों नहीं हटाया जा रहा है?
