नई दिल्ली: अमेरिका में ट्रंप प्रशासन ने वीजा नियमों में एक और बड़ा और सख्त बदलाव किया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बुधवार को घोषणा की कि अब उन विदेशी नागरिकों पर वीजा प्रतिबंध लगाए जाएंगे जो अमेरिकी नागरिकों की सोशल मीडिया पोस्ट को सेंसर करने या नियंत्रित करने की कोशिश करेंगे। यह नियम विशेष रूप से उन विदेशी अधिकारियों पर लागू होगा जो अमेरिकी टेक कंपनियों पर सामग्री हटाने या संशोधित करने का दबाव डालते हैं।
अमेरिकी नागरिकों को सोशल मीडिया पर धमकी देना बर्दाश्त नहीं
यह नया फरमान अमेरिकी नागरिकों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और ऑनलाइन सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने अपने बयान में स्पष्ट किया, “यह पूरी तरह अस्वीकार्य है कि कोई विदेशी अधिकारी अमेरिका में मौजूद किसी नागरिक की सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर उन्हें गिरफ्तार करने या अन्य सजा देने की धमकी दे।”
उन्होंने आगे कहा कि जो विदेशी अधिकारी अमेरिकी टेक कंपनियों (जैसे फेसबुक, यूट्यूब, ट्विटर आदि) पर किसी खास कंटेंट को हटाने या उसमें बदलाव करने का दबाव डालते हैं, उनके खिलाफ वीजा प्रतिबंध लागू किए जाएंगे। इसका सीधा अर्थ है कि ऐसे अधिकारियों को अब अमेरिका में प्रवेश के लिए वीजा नहीं मिल पाएगा, या उनका मौजूदा वीजा रद्द किया जा सकता है।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा का प्रयास
ट्रंप प्रशासन का यह कदम ऐसे समय आया है जब दुनिया भर में सोशल मीडिया कंटेंट को लेकर सरकारों और टेक कंपनियों के बीच टकराव बढ़ रहा है। कई देशों में सरकारों पर आरोप लगते रहे हैं कि वे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल असंतोष को दबाने या विशेष राजनीतिक एजेंडा को बढ़ावा देने के लिए करती हैं। अमेरिका का यह नया वीजा नियम अमेरिकी नागरिकों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए एक कड़ा संदेश है, और यह विदेशी सरकारों को अमेरिकी नागरिकों के ऑनलाइन व्यवहार में हस्तक्षेप करने से रोकने का प्रयास है।
यह घोषणा ऐसे अधिकारियों के लिए एक चेतावनी के रूप में काम करेगी जो अमेरिकी नागरिकों के सोशल मीडिया खातों या उनकी पोस्ट पर नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश करते हैं। इस कदम से अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और टेक कंपनियों की वैश्विक परिचालन नीतियों पर भी असर पड़ने की संभावना है।
