एटा: उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर हलचल मच गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से जुड़े पोस्टर विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। गुरुवार को एटा में सपा जिला अध्यक्ष परवेज जुबैरी और कार्यकर्ताओं ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्याम नारायण सिंह से मुलाकात कर इस मामले में अपनी नाराजगी जताई और निष्पक्ष जांच की मांग की। सपा का आरोप है कि यह विवाद सत्तारूढ़ भाजपा की शह पर रचा गया है, ताकि अखिलेश की छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके।
क्या है पोस्टर विवाद?
हाल ही में अलीगंज विधानसभा के जैथरा क्षेत्र में अखिलेश यादव के जन्मदिन पर कार्यकर्ताओं द्वारा होर्डिंग्स लगाए गए थे। सपा का दावा है कि ये पोस्टर भाजपा के इशारे पर अराजक तत्वों ने फाड़ दिए। अपने लोकप्रिय नेता के इस तरह पोस्टरों का फाड़ा जाना समाजवादी पार्टी कार्यकर्ताओं को रास नहीं आया। मामले को संवेदनशील मानते हुए उन्होंने जिले के शीर्ष अधिकारियों से मिलकर कार्यवाही करने की मांग की है।
सपाई पहुंचे एसएसपी दफ्तर
एटा में सपा नेताओं का एक दल स्थानीय नेतृत्व के साथ एसएसपी कार्यालय पहुंचा। उन्होंने एसएसपी को एक ज्ञापन सौंपकर इस पूरे मामले की गहन जांच की मांग की। सपा नेताओं का कहना था कि यह विवाद उनकी पार्टी और अखिलेश यादव को बदनाम करने की साजिश का हिस्सा है। उन्होंने पुलिस से इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करने को कहा।
निष्पक्ष जांच और त्वरित कार्रवाई की मांग
एसएसपी एटा ने सपा प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि इस मामले की जांच पूरी निष्पक्षता के साथ होगी। उन्होंने कहा कि पुलिस सभी तथ्यों की पड़ताल कर उचित कदम उठाएगी। हालांकि, अभी तक इस मामले में कोई एफआईआर दर्ज होने की खबर नहीं है।
सियासी माहौल में तनाव
यह विवाद यूपी की सियासत में पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा रहा है। अखिलेश यादव लगातार योगी सरकार पर हमलावर हैं, और यह पोस्टर विवाद उनके लिए एक और मुद्दा बन गया है। सपा कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि अगर इस मामले में जल्द कार्रवाई न हुई, तो वे सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेंगे।
क्या होगा अगला कदम?
यह विवाद अब केवल पोस्टरों तक सीमित नहीं रहा, सपा-भाजपा के बीच सियासी जंग का नया मोर्चा बन गया है। आने वाले दिनों में इस मामले के और तूल पकड़ने की संभावना है। सपा इसे जनता के बीच ले जाकर भाजपा को घेरने की रणनीति बना रही है।
इस पूरे घटनाक्रम पर सभी की निगाहें टिकी हैं, क्योंकि यह 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले दोनों दलों के बीच ताकत का नया इम्तिहान बन सकता है।
