आगरा: आगरा शहर में पैदल चलने वालों के लिए बनाए गए फुटपाथ अब धीरे-धीरे अवैध बाजार और कमाई का जरिया बनते जा रहे हैं। सुबह से लेकर रात तक इन फुटपाथों पर दुकानें सजती हैं, जिससे राहगीरों के लिए कोई जगह नहीं बचती। यही नहीं, हाईवे और फ्लाईओवर तक पर ऑटो, ई-रिक्शा और यहां तक कि सरकारी व डग्गेमार बसों ने भी अवैध कब्जा जमा रखा है।
पैदल चलना हुआ मुश्किल, फुटपाथों पर दुकानों का कब्जा

वाटर बॉक्स से रामबाग आने वाली सर्विस रोड के किनारे बने फुटपाथ पर दर्जनों अस्थाई दुकानें चल रही हैं। ये सभी दुकानें अवैध हैं, लेकिन किसी भी जिम्मेदार अधिकारी की नजर इन पर नहीं पड़ती या फिर सिक्कों की खनक के आगे आंखें मूंद ली जाती हैं। इस कारण राहगीरों को सड़क पर चलने को मजबूर होना पड़ता है, जो कि दुर्घटनाओं को न्यौता देता है।
रामबाग फ्लाईओवर: ऑटो चालकों का अड्डा

रामबाग फ्लाईओवर पर ऑटो चालकों का हर समय जमावड़ा रहता है। सवारियों को जल्दी भरने की होड़ में वे अक्सर बसों से उतरते यात्रियों के साथ खींचतान तक कर बैठते हैं। हाईवे पर ऑटो की कतार लगने से बसें बीच सड़क पर रुकती हैं, जिससे न केवल जाम लगता है बल्कि सड़क हादसों की आशंका भी बढ़ जाती है।
हाईवे पर सरकारी और डग्गेमार बसों का कब्जा

मथुरा-फिरोजाबाद हाईवे पर आए दिन डग्गेमार और सरकारी बसें मनमाने ढंग से खड़ी रहती हैं। यातायात पुलिस की मौजूदगी के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होती। इससे एम्बुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाएं भी जाम में फंस जाती हैं।

जानकारी के अनुसार, डग्गेमार बसों की उगाही के लिए एक ठेकाकर्मी भी मौजूद रहता है, जो दिनभर वसूली करता है। यह पूरा सिस्टम यातायात पुलिस की आंखों के सामने चलता है।
जाम और हादसों में बढ़ोतरी

अवैध दुकानों, बसों और ऑटो चालकों की मनमानी के चलते शहर में सड़क हादसों की संख्या बढ़ रही है। कुछ दिन पहले एक बुजुर्ग, जो सब्जी लेकर घर लौट रहे थे, ट्रक की चपेट में आ गए। उनके दोनों पैर बुरी तरह कुचल गए। स्थानीय लोगों ने तुरंत उन्हें अस्पताल पहुंचाया। ऐसे हादसे अब आम हो गए हैं, लेकिन प्रशासनिक कार्रवाई न के बराबर है।
कांवड़ यात्रा से पहले और बिगड़ सकते हैं हालात
कांवड़ यात्रा शुरू हो रही है। ऐसे में शहर में पहले से चल रहा ट्रैफिक जाम और अव्यवस्था और ज्यादा गंभीर रूप ले सकती है। हर चौराहे पर ऑटो व ई-रिक्शा चालकों का जमावड़ा रहता है, जिससे न केवल यातायात प्रभावित होता है बल्कि अस्थाई जाम की स्थिति भी बनी रहती है।
प्रशासन की मीटिंग बनी औपचारिकता
कई बार प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा मीटिंग कर समाधान की कोशिश की गई, लेकिन हालात जस के तस हैं। जिम्मेदार विभागों की ओर से कोई स्थायी और ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिससे आम जनता को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
आगरा में फुटपाथ से लेकर हाईवे तक जिस तरह से अवैध कब्जे और अव्यवस्था बढ़ती जा रही है, वह न सिर्फ शहर की सुंदरता को खराब कर रही है, बल्कि आम जनजीवन को खतरे में डाल रही है।
अब समय आ गया है कि प्रशासनिक अमला ज़मीनी स्तर पर कार्य करे और फुटपाथ व हाईवे से अवैध कब्जे हटाए जाएं, ताकि जनता को राहत मिल सके और हादसों पर अंकुश लगाया जा सके।
