आगरा: आगरा में जिला शुल्क नियामक समिति की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। आज कलेक्ट्रेट सभागार में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में, प्रोग्रेसिव एसोसिएशन ऑफ पेरेंट्स अवेयरनेस (PAPA) के राष्ट्रीय संयोजक दीपक सिंह सरीन ने जिलाधिकारी आगरा के समक्ष नई बनी शुल्क नियामक समिति के सदस्यों पर गंभीर आपत्तियाँ जताईं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कमेटी में ऐसे लोग शामिल हैं जो स्कूलों के हितों से जुड़े हुए हैं, जिससे अभिभावकों और छात्रों के साथ न्याय की उम्मीद नहीं की जा सकती।
कमेटी सदस्यों पर आपत्ति और पारदर्शिता की मांग
दीपक सिंह सरीन ने जिलाधिकारी को बताया कि कमेटी में पहले से ही शिक्षा विभाग के सवालों के कटघरे में खड़े हुए स्कूल और स्कूलों से जुड़े चार्टर्ड अकाउंटेंट को रखना बच्चों के हितों के साथ अन्याय होगा। उनका तर्क था कि स्कूलों के साथ सीधे जुड़ाव रखने वाले व्यक्ति कभी भी अभिभावक और छात्र-छात्राओं के साथ न्याय नहीं कर सकेंगे। इसके अतिरिक्त, एक ऐसे पेरेंट्स एसोसिएशन प्रतिनिधि को भी शामिल किया गया है, जिसने कभी भी छात्र हित में समस्याओं के समाधान के लिए जोरदार प्रयास नहीं किया।
सरीन ने अपने वक्तव्य के दौरान जिलाधिकारी से सीधा सवाल किया कि क्या जिला शुल्क नियामक समिति वास्तव में बनाई गई है या फिर यह केवल एक डमी कमेटी है, जिसका उद्देश्य जनता को उलझाना है, क्योंकि इसमें अधिकांश ऐसे लोग हैं जिन्होंने छात्र हित में कुछ नहीं किया। उन्होंने स्कूलों की फीस संरचना, रीएडमिशन फीस और अन्य संबंधित मुद्दों पर भी विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। बैठक में शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और स्कूल प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।
जिलाधिकारी के निर्देश और महत्वपूर्ण फैसले
जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी ने फीस विनियमन के लिए बनी समिति पर जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) को पुनः निरीक्षण के निर्देश दिए, जो इस विषय पर विस्तृत समीक्षा करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी स्कूलों को अपनी फीस का विवरण और ब्रेकअप अपनी वेबसाइट पर कम से कम 60 दिन पहले अपलोड करना अनिवार्य होगा।
इसके साथ ही, जिलाधिकारी ने यह भी निर्देश दिए कि जिला शुल्क नियामक समिति की बैठकें जनवरी, फरवरी और मार्च माह में अनिवार्य रूप से आयोजित की जाएंगी, जिसकी जिम्मेदारी जिला विद्यालय निरीक्षक की होगी, ताकि अभिभावकों और छात्रों को समय से पूर्व व्यवस्था सुनिश्चित हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि आरटीई (शिक्षा का अधिकार) के तहत बच्चों का दाखिला शत-प्रतिशत कराने का प्रयास किया जाए और इसमें किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए, जिलाधिकारी ने 5 साल से पहले स्कूल ड्रेस में परिवर्तन पर रोक लगा दी है, जिससे अभिभावकों के आर्थिक बोझ को कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही, यातायात जाम से बच्चों की सुरक्षा और सुगम आवागमन सुनिश्चित करने के लिए ट्रैफिक प्रबंधन पर भी गहन चर्चा हुई, ताकि छुट्टियों के पश्चात बच्चे सुरक्षित और शीघ्रता से अपने घर पहुँच सकें।
PAPA के संयोजक दीपक सिंह सरीन ने इन पहलों की सराहना करते हुए कहा कि ये कदम शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और सुधार की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे। हालांकि, उन्होंने फिर दोहराया कि इन सकारात्मक बदलावों के लिए सबसे पहले जिलाधिकारी को जिला शुल्क नियामक समिति की कमेटी में बने हुए सदस्यों में बदलाव करना होगा।
