फ़िरोज़ाबाद: फ़िरोज़ाबाद में एक पारिवारिक विवाद से जुड़े मामले में, एक अदालत ने अधीनस्थ न्यायालय द्वारा पारित एक आदेश को निरस्त करते हुए ससुर को बड़ी राहत दी है। बहू ने अपने ससुर पर नींद की गोलियाँ खिलाकर दुराचार करने और अश्लील हरकतें करने का आरोप लगाया था। इस मामले में, अधीनस्थ न्यायालय ने ससुर और अन्य आरोपियों को तलब करने का आदेश दिया था, जिसके खिलाफ ससुर ने रिवीजन याचिका दायर की थी।
क्या है पूरा मामला?
मामले के अनुसार, एक महिला ने अपने ससुर, डॉक्टर राकेश गुप्ता के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए मुकदमा दायर किया था। महिला का आरोप था कि उसके ससुर ने उसे नींद की गोलियाँ खिलाकर उसके साथ दुराचार किया। महिला ने कहा कि जब वह सुबह जागी और अपने कपड़े अस्त-व्यस्त पाए, तब उसे महसूस हुआ कि उसके साथ दुराचार हुआ है।
इस शिकायत के आधार पर, अधीनस्थ न्यायालय ने ससुर डॉ. राकेश गुप्ता और अन्य को अश्लील हरकतें करने और धमकी देने के आरोपों में तलब करने का आदेश दिया था।
अदालत ने निरस्त किया आदेश
अधीनस्थ न्यायालय के इस आदेश के विरुद्ध, आरोपी ससुर ने सत्र न्यायालय में एक रिवीजन याचिका दायर की। याचिका पर सुनवाई करते हुए, एडीजे 19 (ADJ 19) ने अधीनस्थ न्यायालय के आदेश को निरस्त कर दिया। इस फैसले के बाद, गंगा धाम साउथ, फिरोजाबाद निवासी डॉ. राकेश गुप्ता को फिलहाल राहत मिल गई है।
अदालत ने मामले को अधीनस्थ न्यायालय को वापस भेज दिया है और उसे पुनः सुनवाई के आदेश दिए हैं। इस फैसले से साफ होता है कि मामले की सुनवाई अब नए सिरे से होगी और दोनों पक्षों को अपने तर्क पेश करने का एक और मौका मिलेगा। यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि पारिवारिक विवादों में कानूनी प्रक्रिया कितनी जटिल और लंबी हो सकती है।
