Agra News, जैतपुर , (श्यामवीर यादव), यमुना नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से जैतपुर क्षेत्र के कई गांवों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं, जिससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। किसानों की फसलें और सब्जियां पूरी तरह से पानी में डूबकर बर्बाद हो चुकी हैं, जबकि कई घरों में पानी घुस जाने से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने को मजबूर होना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासनिक मदद न मिलने से उनमें भारी रोष है।
जैतपुर की बाढ़ प्रभावित स्थिति

जैतपुर के पुरा बीरबल, कटरा, नौगांव, हार, खिलावली और कचौरा जैसे गाँव इस बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, पिछले एक सप्ताह से यमुना का जलस्तर बढ़ रहा है, जिससे खेतों में लगी गोभी, लौकी और अन्य सब्जियां पूरी तरह से नष्ट हो चुकी हैं। इन गाँवों के लोग मुख्य रूप से खेती पर निर्भर हैं और फसलें बर्बाद होने से उनकी आजीविका पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
ग्रामीणों की दयनीय स्थिति

गाँव कटरा और पुरा बीरबल में लोगों को जरूरी सामान लाने-ले जाने में भी भारी परेशानी हो रही है। वहीं, खिलावली कटरा, पुरादसु, पुरा बीरबल, नौगवाँ हार और कचौरा में हालात और भी खराब हैं। यहाँ करीब दो दर्जन मकानों में पानी घुस चुका है, जिसके कारण प्रभावित परिवारों ने ऊँचे स्थानों पर प्लास्टिक के टैंट लगाकर किसी तरह गुजारा कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि मंगलवार को प्रशासन ने मदद का आश्वासन दिया था, लेकिन बुधवार तक कोई सहायता नहीं पहुँची।
विधायिका के प्रतिनिधिमंडल ने किया दौरा

बुधवार को विधायिका रानी पक्षालिका सिंह के निर्देश पर पूर्व प्रधान लालू सिंह तोमर, जिला पंचायत सदस्य भाव सिंह नरवरिया, ध्रुवराज सिंह भदौरिया, नाथू सिंह भदौरिया और राणा दीक्षित ने इन गाँवों का दौरा किया। उन्होंने पीड़ितों से मिलकर हर संभव मदद का भरोसा दिया और प्रशासन से तत्काल खाद्य सामग्री और राहत पैकेज उपलब्ध कराने की अपील की। उन्होंने लेखपालों को भी निर्देश दिया कि वे जल्द से जल्द सर्वे करके प्रभावित परिवारों को मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया शुरू करें।
कचौरा गांव में गहरा आक्रोश

कचौरा गाँव में ग्रामीणों ने विशेष रूप से अपना गुस्सा जाहिर किया। गाँव के लोगों ने बताया कि अब तक प्रशासन का कोई भी अधिकारी उनसे मिलने नहीं आया है। ग्रामीणों, जिनमें प्रधान वीरेंद्र, ओम प्रकाश, राम रतन और कई अन्य लोग शामिल हैं, ने बताया कि राजपूत कॉलोनी और कुशवाहा कॉलोनी के घर पूरी तरह से पानी में डूबे हुए हैं। उन्होंने आशंका जताई कि अगर जलस्तर ऐसे ही बढ़ता रहा तो गाँव का संपर्क मुख्य मार्ग से पूरी तरह कट जाएगा। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें केवल झूठे आश्वासन मिले हैं और बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग असुरक्षित हालात में रहने को मजबूर हैं।
प्रशासन से तुरंत मदद की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से तुरंत ठोस कदम उठाने और राहत सामग्री तथा मुआवजे की व्यवस्था करने की मांग की है, ताकि उनकी परेशानियों को कम किया जा सके और उन्हें इस संकट से बाहर निकाला जा सके।
