डीग, राजस्थान। ऐतिहासिक डीग शहर के प्रसिद्ध जल महलों में शुक्रवार (11 अक्टूबर) को महोत्सव के उपलक्ष्य में एक अद्भुत और मनमोहक नज़ारा शुरू हुआ। शाम 5 बजे, महल परिसर में मौजूद 2000 से भी अधिक रंगीन फव्वारे एक साथ चलने लगे, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इन फव्वारों की सबसे बड़ी और विस्मयकारी खासियत यह है कि ये आज भी बिना किसी बिजली या मोटर के चलते हैं। यह इंजीनियरिंग और स्थापत्य कला का एक ऐसा बेजोड़ नमूना है, जिसे देखने के लिए दूर-दराज से पर्यटक डीग पहुँचते हैं।
महाराजाओं की इंजीनियरिंग का कमाल
डीग के जल महल की यह अद्भुत व्यवस्था महाराजाओं के दूरदर्शी निर्माण को दर्शाती है। इन फव्वारों को चलाने के लिए:
- जल संचय: महल के ऊपर एक विशाल कुंड निर्मित है, जिसमें पानी इकट्ठा किया जाता है।
- गुरुत्वाकर्षण का उपयोग: इस कुंड में संग्रहित पानी को गुरुत्वाकर्षण और दबाव प्रणाली का उपयोग करके महल के हर कोने में लगे 2000 से अधिक फव्वारों तक पहुँचाया जाता है।
इस प्राचीन तकनीक के कारण, महल के चारों तरफ बने तालाबों और नहरों से जुड़े होने के कारण, यहाँ के तापमान में जबरदस्त ठंडक भी बनी रहती है। जल महलों में साल में तीन बार विशेष रूप से ये फव्वारे चलाए जाते हैं।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी हुआ आयोजन
फव्वारों के मनमोहक नज़ारे के बाद, रात 8 बजे जल महलों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया। इन कार्यक्रमों में मयूर नृत्य, फूलों की होली और अन्य लोक कलाओं का प्रदर्शन किया गया।
सिंगर वंदना मिश्रा ने भजन और फिल्मी गाने गाकर दर्शकों का मनोरंजन किया, जिसका लोगों ने जमकर लुत्फ उठाया। हालांकि, स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, इस बार प्रचार-प्रसार की कमी के चलते पर्यटकों की संख्या उम्मीद से कम रही।
संस्कृति को जीवित रखने की अपील
इस महोत्सव में हिस्सा लेने पहुँचे कलाकारों ने एनडीटीवी से बात करते हुए कहा कि वे अपनी संस्कृति और विरासत को जीवित रखने के लिए हर कार्यक्रम में डीग जल महल पहुँचते हैं और लोगों को प्रेरित करते हैं।
सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए डीग के एडिशनल एसपी ने बताया कि महोत्सव के लिए महल के भीतर करीब 65 पुलिस के जवान तैनात किए गए थे।
