एटा। जैथरा क्षेत्र में एटा-अलीगंज मार्ग पर नायरा पेट्रोल पंप के सामने की गई प्लाटिंग अब बड़े विवाद में फंसती नजर आ रही है। जिस भूमि पर हाल ही में दर्जनों प्लाटों की रजिस्ट्री और बिक्री की गई है, उसके स्वामित्व को लेकर कानूनी लड़ाई हाईकोर्ट में पहुंच चुकी है। जमीन की असल मालिकाना हक को लेकर मामला अभी विचाराधीन है, लेकिन इस बीच हुए बैनामों ने खरीदारों की चिंता बढ़ा दी है।
सूत्रों के अनुसार, जिस विवादित गाटा संख्या पर यह प्लाटिंग की गई है, उसमें समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक रामेश्वर सिंह यादव की भी हिस्सेदारी बताई जा रही है। यही वजह है कि मामला और पेचीदा हो गया है। बताया जा रहा है कि जमीन के स्वामित्व को लेकर दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है, और अब यह मामला हाईकोर्ट में सुनवाई के अंतिम चरण में पहुंच गया है।
स्थानीय सूत्रों ने बताया कि जैसे ही विवादित जमीन के हाईकोर्ट में लंबित होने की जानकारी सामने आई, वैसे ही बैनामा कराने वालों में हड़कंप मच गया। कई लोगों ने अपने दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है, जबकि कुछ लोगों ने प्रशासनिक स्तर पर जानकारी जुटानी शुरू कर दी है कि उनका निवेश सुरक्षित है या नहीं।
कानूनी जानकारों के मुताबिक, अगर कोर्ट का फैसला पूर्व स्वामित्व के पक्ष में आता है, तो नए खरीदारों के रजिस्ट्री रद्द होने का भी खतरा बन सकता है।
जैथरा में यह जमीन विवाद स्थानीय स्तर पर चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है। लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि जब जमीन का मामला न्यायालय में लंबित था, तो उस पर बिक्री और प्लाटिंग की अनुमति कैसे दी गई?
