मेले में जुआ खिलाने वालों को मिल रहा है पुलिस से संरक्षण
प्रशासनिक उपेक्षा के चलते इस वर्ष अव्यवस्थाओं के बीच संचालित हो रहा है मेला
लखनऊ| अंबेडकर नगर जिले के श्रवण धाम में प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला पारंपरिक मेला इस बार अपनी सामान्य चमक नहीं बिखेर पा रहा है। मेले के दूसरे दिन भी श्रद्धालुओं की आवाजाही तो रही, परंतु मनोरंजन झूलों के बंद रहने के कारण पूरे परिसर में वह रौनक नहीं दिखी जिसकी प्रतीक्षा लोग हर वर्ष करते हैं | इसके अतिरिक्त प्रशासनिक उपेक्षा के चलते पूरे मेले में अव्यवस्थाएं देखने को मिल रही हैं |
मेले का प्रमुख आकर्षण माने जाने वाले झूले और मनोरंजन उपकरण प्रशासनिक अनुमति के अभाव में बंद पड़े हैं, वहीं दूसरी तरफ पुलिस के संरक्षण से जुआ व्यवसाययों का बोलबाला नजर आ रहा है |

सूत्रों के अनुसार झूला व्यवसायियों और संबंधित विभाग एवं मेला प्रबंधन के बीच वसूली दर तय नहीं हो पाई है, जिसके चलते अनुमति अब तक जारी नहीं की गई है। इस विवाद के कारण झूला संचालकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है और मनोरंजन क्षेत्र पूरी तरह वीरान है।
इधर श्रवण धाम मंदिर के मुख्य पुजारी बच्ची दास ने भी प्रशासनिक उदासीनता पर नाराज़गी जताई। उन्होंने कहा कि श्रवण धाम कोई साधारण स्थल नहीं, बल्कि आस्था, सेवा और संस्कृति का केंद्र है। मेले की अव्यवस्थाएँ श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुँचाती हैं और प्रशासन को इस दिशा में संवेदनशील होने की आवश्यकता है।
श्रवण धाम का धार्मिक महत्व
श्रवण धाम को क्षेत्र का प्रमुख तीर्थ स्थल माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह स्थल श्रवण कुमार की तपस्थली रहा है। माता-पिता की सेवा और भक्ति का संदेश देने वाली इस कथा के कारण यहाँ पूजा-अर्चना से पारिवारिक सुख-शांति, संतान प्राप्ति और मनोकामना पूर्ति की मान्यता जुड़ी है। इसी धार्मिक विश्वास के चलते प्रतिवर्ष हजारों श्रद्धालु यहाँ दर्शन करने और मेले में शामिल होने आते हैं।

हालाँकि धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-पाठ और प्रसाद वितरण पूर्व की भाँति जारी है, लेकिन झूलों के बंद रहने से मेले की चहल-पहल और व्यापार दोनों पर भारी प्रभाव पड़ा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि विवाद जल्द सुलझ जाता है तो आने वाले दिनों में मेला अपनी पुरानी रौनक वापस पा सकता है।
