एटा। सोमवार की दोपहर शहर के मोहल्ला नगला प्रेमी में जो हुआ, वह न केवल एक हत्याकांड था, बल्कि उस सामाजिक दबाव, आर्थिक तंगी और टूटते पारिवारिक संवाद की भयावह तस्वीर थी, जिसमें एक पिता खुद अपने ही परिवार का कातिल बन गया। चार लाख रुपये की व्यवस्था न कर पाने की मजबूरी, बेटी की शादी की चिंता और घरेलू कलह ने एक ऐसा तूफान खड़ा किया, जिसने एक साथ चार जिंदगियों को लील लिया।
कमल सिंह कोई पेशेवर अपराधी नहीं था। न ही उसके खिलाफ कोई आपराधिक इतिहास सामने आया है। वह एक साधारण परिवार का मुखिया था, जिसके सामने बेटियों की शादी की जिम्मेदारी थी। छोटी बेटी ज्योति की शादी चंडीगढ़ में तय हो चुकी थी। 10 फरवरी की तारीख भी निश्चित थी। लेकिन शादी के लिए जरूरी चार लाख रुपये उसके पास नहीं थे। यही रकम धीरे-धीरे उसके लिए मानसिक बोझ बनती चली गई।
दोपहर का वह पल, जब सब कुछ बदल गया –
सोमवार दोपहर जब कमल सिंह घर पहुंचा, तब घर में रोजमर्रा की तरह खाना बन चुका था। पत्नी रत्ना देवी ने रुपये को लेकर सवाल किया। यही सवाल विवाद की जड़ बन गया। पुलिस के अनुसार, बात बढ़ी, शब्द तीखे हुए और फिर गुस्सा हिंसा में बदल गया। गुस्से में उठाई गई सीमेंट की एक ईंट ने सबसे पहले पत्नी को निशाना बनाया।
पत्नी की चीख सुनकर बेटी ज्योति बीच-बचाव करने आई। पिता के मुंह से निकले शब्द और बेटी की प्रतिक्रिया ने कमल सिंह को हिंसक कर दिया। कुछ ही पलों में बेटी भी खून से लथपथ फर्श पर गिर चुकी थी। शोर सुनकर मां श्यामा देवी ऊपर पहुंचीं, लेकिन उनका आना भी उन्हें नहीं बचा सका। नीचे चारपाई पर लेटे बीमार पिता गंगा सिंह आखिरी शिकार बने।
एक के बाद एक चार कत्ल –
कुछ ही मिनटों में घर चार मौतों के गवाह बन गया। पुलिस जांच में सामने आया कि वारदात के बाद कमल सिंह ने खुद को सामान्य दिखाने की कोशिश की। जूतों पर लगे खून को बाथरूम में धोया, छत पर टहलता रहा और फिर मोटरसाइकिल लेकर घर से निकल गया जैसे कुछ हुआ ही न हो।
जब सन्नाटा बोलने लगा-
करीब सवा दो बजे मासूम देवांश स्कूल से लौटा। घर के भीतर पसरा सन्नाटा और खून से सने शव उसकी उम्र से कहीं बड़ा डर दे गए। उसकी चीख ने पूरे मोहल्ले को झकझोर दिया। देखते ही देखते घटना स्थल पर भीड़ जुट गई।
पुलिस पहुंची तो हर चेहरा अवाक था—क्योंकि किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि यह सब किसी बाहरी हमलावर ने नहीं, बल्कि घर के ही मुखिया ने किया होगा।
जांच और सच का सामना
डॉग स्क्वॉड, फोरेंसिक टीम और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों ने धीरे-धीरे परतें खोलीं। कमल सिंह की गतिविधियां संदिग्ध लगीं। हिरासत में लेने के बाद जब उससे सख्ती से पूछताछ की गई, तो वह टूट गया। उसने एक-एक कर पूरी कहानी बयां कर दी।
सवाल समाज से भी –
यह घटना बदलते सामाजिक परिवेश में आज भी सामाजिक कुरीतियों को दर्शाती खौफनाक कहानी है । यह समाज से भी सवाल करती है—क्या प्रेम विवाह का बोझ आज भी इतना भारी है कि वह रिश्तों का खून तक बहा दे? क्या आर्थिक तंगी और सामाजिक दबाव के बीच संवाद की गुंजाइश खत्म होती जा रही है?
एटा शहर की यह घटना एक चेतावनी है—कि अगर समय रहते तनाव, कर्ज और पारिवारिक संवाद पर ध्यान न दिया गया, तो एक पिता अपने ही खून का कत्ल कर सकता है।
