कार्रवाई का दिखावा, पुलिया तोड़ने पहुंची टीम ने की खानापूर्ति
तीन-तीन पुलिया बन गईं, सींचपाल–सींच पर्यवेक्षक सोते रहे; कार्रवाई महज औपचारिकता
आगरा। जनपद के ब्लॉक बिचपुरी क्षेत्र में सिंचाई विभाग के क्षेत्रीय कर्मचारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि न तो अवैध कब्जों पर प्रभावी कार्रवाई हो रही है और न ही उन्हें संरक्षण देने वाले कर्मचारियों की भूमिका की जांच की जा रही है। आखिर इसके पीछे क्या कारण हैं?
लोहकरेरा नाले पर सुनारी से जउपुरा तक अवैध निर्माण और कब्जों का जाल फैलता जा रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की आंखें बंद हैं। स्थिति यह है कि नाले के ऊपर तीन-तीन पुलिया खड़ी हो गईं और निगरानी की जिम्मेदारी संभालने वाले सींचपाल व सींच पर्यवेक्षक को सब कुछ दिखाई देने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।शिकायत के बाद सरकारी स्कूल से आगे सुनारी मार्ग पर नवविकसित कॉलोनी बसाने के लिए बनाई गई एक अवैध पुलिया पर विभागीय टीम पहुंची। टीम ने केवल दिखावे के लिए पुलिया का किनारा तोड़ दिया, जबकि उसका पूरा फाउंडेशन जस का तस छोड़ दिया गया। टीम खानापूर्ति कर वापस लौट गई। बताया जा रहा है कि कॉलोनाइजर फिर से पुलिया को दुरुस्त करने में जुट गया है।बिचपुरी क्षेत्र के गांव सुनारी में एक प्रतिष्ठित स्कूल संचालक द्वारा नाले पर तीन पुलिया बनाए जाने का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बिना विभागीय संरक्षण के इतना बड़ा निर्माण संभव नहीं। यदि सींचपाल और सींच पर्यवेक्षक को इसकी जानकारी नहीं थी तो यह सीधी लापरवाही है, और यदि जानकारी थी तो मिलीभगत से इनकार नहीं किया जा सकता।
स्कूल प्रबंधन की ओर से पुलिया निर्माण के लिए विभागीय अनुमति का दावा किया जा रहा है, लेकिन विभागीय अभिलेखों में ऐसी किसी स्पष्ट स्वीकृति की पुष्टि नहीं हो सकी है। ऐसे में सवाल उठता है कि एक ही संस्थान को तीन पुलिया बनाने की अनुमति किस नियम के तहत दी गई? और यदि अनुमति नहीं थी, तो अब तक ध्वस्तीकरण या दंडात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की गई?आरोप है कि पुलिया निर्माण की आड़ में नाले से सटी विभागीय जमीन पर आगे-पीछे तक कब्जा कर लिया गया है। मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायतें दर्ज होने के बावजूद ठोस कार्रवाई नजर नहीं आई।हाल ही में विभागीय टीम ने एक नवविकसित अवैध कॉलोनी के आवागमन के लिए डाली जा रही पुलियाओं को हटाने की औपचारिकता निभाई। मौके पर केवल एक पुलिया हटाकर कार्रवाई का ढोल पीट दिया गया, जबकि शेष दो पुलियाओं पर चुप्पी साध ली गई। इस आधी-अधूरी कार्रवाई ने विभाग की कार्यशैली पर और प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।पूरे घटनाक्रम में क्षेत्रीय सींचपाल और सींच पर्यवेक्षक की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। पूर्व में मघटई नाले पर भी विभागीय जमीन पर सड़क निर्माण का मामला सामने आया था, लेकिन कार्रवाई कागजों तक सीमित रह गई।स्थानीय लोगों ने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। अब देखना यह है कि विभाग नालों को अतिक्रमण मुक्त कराता है या फिर मामला यूं ही फाइलों में दबकर रह जाएगा।
विभाग की लेटलतीफी का फायदा उठा रहे अवैध कब्जाधारक,आरोप है कि विभाग के सींचपाल और सींच पर्यवेक्षक की मिलीभगत से लोहकरेरा नाले पर दर्जनों अवैध कब्जे कराए गए हैं। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि कथित रूप से “सेवा शुल्क” लेकर अवैध निर्माण कराए जाते हैं और बाद में औपचारिकता के तौर पर विभागीय मुकदमा दर्ज कर दिया जाता है। मुकदमा दर्ज होने के बाद भी मौके से अवैध पुलियाएं नहीं हटाई जातीं।सूत्रों के अनुसार, अवैध कब्जाधारकों का कहना है कि मुकदमे की प्रक्रिया लंबी होती है और तारीख पर तारीख पड़ती रहती है, जिससे उनका कब्जा बरकरार रहता है। ऐसे में विभागीय कार्रवाई केवल कागजी साबित हो रही है।
आगरा ,बिचपुरी क्षेत्र में सिंचाई विभाग की कथित शह पर नालों पर कब्जे!न कर्मचारियों की भूमिका की जांच, न ही अवैध कब्जे हटाए गए
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