एटा: जनपद के कस्बा जैथरा में इन दिनों एलपीजी गैस सिलेंडरों की किल्लत के बीच कालाबाजारी भी चरम पर पहुंच गई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे अमेरिका-ईरान तनाव का असर अब आम आदमी की रसोई तक साफ दिखाई देने लगा है। गैस की किल्लत के चलते उपभोक्ता किसी भी कीमत पर सिलेंडर खरीदने को मजबूर हैं, जिसका फायदा उठाकर कस्बे कुछ लोग अवैध रूप से मोटा मुनाफा कमा रहे हैं।
गैस एजेंसियों पर सिलेंडर के लिए उपभोक्ता को घंटों लाइन में लगने के बाद भी खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि जैथरा कस्बे में चार ऐसे ठिकाने हैं, जहां गैस सिलेंडर बिना किसी रोक-टोक के तत्काल उपलब्ध हो रहे हैं। सूत्रों के अनुसार जैथरा बस स्टैंड से सब्जी मंडी को जाने वाले मार्ग में माहौर वैश्य धर्मशाला के समीप एक दुकान,उसी से आगे कुएं के पास एक दुकान पर आसानी से रसोई गैस सिलेंडर ब्लैक में मिल रहे हैं। इसके अलावा मयूर गार्डन के नजदीक एक दुकान के साथ साथ उसी के सामने एक प्रसिद्ध डॉक्टर की गली में 2 घरों में रसोई गैस सिलेंडर आसानी से मिल रहे हैं। कस्बे में ये सभी स्थान कालाबाजारी के प्रमुख अड्डे बने हुए हैं।
इन प्रमुख अड्डों पर घरेलू गैस सिलेंडर 1300 से 1600 रुपये तक में बेचे जा रहे हैं। कमर्शियल सिलेंडरों की भी जमकर कालाबाजारी हो रही है। सवाल सीधा है, जब वितरक एजेंसियों के पास गैस नहीं है तो इन दलालों के पास सिलेंडरों का जखीरा कहां से आ रहा है? क्या बिना मिलीभगत के इतना बड़ा खेल संभव है?
यहां बताते चलें कस्बा जैथरा में अलीगंज,पिंजरी ,एटा,राजा का रामपुर व सहोरी की गैस एजेंसियों से गैस की आपूर्ति की जाती है। इन्हीं गैस एजेंसियों और वितरकों की आपूर्ति व्यवस्था ने आपदा में अवसर तलाश लिया है।
अगर यही हाल रहा तो आम आदमी की रसोई पूरी तरह ठप हो जाएगी और मुनाफाखोरों की चांदी होती रहेगी। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई करते हैं या फिर यह गैस का काला कारोबार यूं ही चलता रहेगा?
