एटा: जैथरा और आसपास क्षेत्र में संचालित निजी विद्यालयों में उत्तर प्रदेश शासनादेश के दिशा निर्देशों का अनुपालन नहीं किया जा रहा है। निजी प्रकाशकों के उच्च मूल्य की किताबें को प्राथमिकता दी जा रही है। प्राथमिक और जूनियर कक्षाओं पाठ्य सामग्री खरीदने के लिए अभिभावकों को हजारों रुपए चुकाने पड़ रहे हैं।
आज 1 अप्रैल से 2026 – 27 के शैक्षणिक सत्र की शुरुआत हो चुकी है। प्रकाशकों ने अपने एजेंटों के माध्यम से इन विद्यालयों में पाठ्य सामग्री भेजने शुरू कर दिया है। कई विद्यालयों में छात्र-छात्राओं के लिए पूरा बुक सेट खरीदना अनिवार्य कर दिया है। मध्य और निम्न वर्ग के परिवारों के लिए ऐसे पाठ्यक्रमों को खरीदना मुश्किल पड़ रहा है। कई स्कूलों की पुस्तकों की कीमत एनसीईआरटी की पुस्तकों से तीन से चार गुना अधिक बताई जा रही है।
इस व्यवसाय से जुड़े जानकारों का कहना है प्रकाशकों और विद्यालय प्रबंधन के मध्य कमीशन का मोटा खेल चलता है। एक माह में लाखों रुपए का मुनाफा प्रबंधन कमाता है । अपने नौनिहालों का भविष्य संभालने की चाह में, अभिभावक को इन निजी शिक्षण संस्थानों की महंगी किताबें खरीदने को मजबूर होना पड़ता है।
शासनादेश के मुताबिक उत्तर प्रदेश के सभी विद्यालय को निर्देशित किया गया है, छात्र-छात्राओं के पठन-पाठन के लिए एनसीईआरटी की पुस्तकें लगाने की सिफारिश करता है। जिससे अभिभावकों को अतिरिक्त भार न उठाना पड़े।
इस संबंध में केंद्र सरकार, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान, प्रशिक्षण परिषद और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के स्पष्ट निर्देश है, कि कक्षा 1 से 12 तक एनसीईआरटी की पुस्तकों को ही मुख्य पाठ्य सामग्री के रूप में अपनाया जाए। इसके विपरीत यदि कोई विद्यालय निजी प्रकाशकों की महंगी पुस्तकों को अनिवार्य करता है, या हर वर्ष अनावश्यक रूप से सिलेबस बदलकर अभिभावकों पर अतिरिक्त भार डालता है, तो यह नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।
कक्षा 1 से 5 तक की एनसीईआरटी की पुस्तकों की कीमत 350 से 600 है, तो वहीं निजी प्रकाशन की पुस्तकें 2000 से 4000 में अभिभावकों को मिल रही हैं। कक्षा 5 से 8 तक की एनसीईआरटी की जिस किताब की कीमत 40-50 रुपए है वहीं निजी प्रकाशक 150 से 250 रुपए मूल्य में बेच रहे हैं।
हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की पुस्तकें इसी अनुपात की मूल्य वृद्धि के साथ बाजार में उपलब्ध हैं।
विद्यालय प्रबंधकों की मनमानी: पुस्तकों के बेतहाशा मूल्य वृद्धि से अभिभावक परेशान
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