चौकी पर बुलाकर आरोपी पक्ष के सामने कहा—राजीनामा कर लो, बेटी की बदनामी होगी
आगरा। जनपद के थाना सिकंदरा क्षेत्र अंतर्गत रूनकता चौकी क्षेत्र में 16 वर्षीय किशोरी के लापता होने के मामले में विवेचक दरोगा की कार्यप्रणाली कटघरे में खड़ी नजर आ रही है। लापता नाबालिग बेटी की पीड़ित मां द्वारा डीसीपी को दिए गए प्रार्थनापत्र में आरोप लगाया गया है कि घटना के कई दिन बाद भी न तो ठोस कार्रवाई हुई और न ही मामले को गंभीरता से लिया गया। उल्टा पुलिस द्वारा चौकी पर बुलाकर समझौते का दबाव बनाने के आरोप लगाए गए हैं। सोमवार को डीसीपी कार्यालय पहुंची पीड़िता घटना बताते-बताते फफक-फफक कर रो पड़ी।
प्रार्थनापत्र के अनुसार, 26 मार्च 2026 को किशोरी अचानक घर से लापता हो गई। परिजनों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी, लेकिन एफआईआर दर्ज होने के बाद भी जांच सुस्त रही और 12 दिन बीतने के बावजूद कोई ठोस सुराग नहीं मिल सका। परिवार का कहना है कि शुरुआती लापरवाही के कारण मामले की दिशा कमजोर पड़ गई।पीड़ित पक्ष ने अपने प्रार्थनापत्र में यह भी स्पष्ट किया है कि उन्होंने एक संदिग्ध युवक और उससे जुड़े सोशल मीडिया साक्ष्य पुलिस को उपलब्ध कराए, जिससे यह आशंका मजबूत होती है कि किशोरी को बहला-फुसलाकर ले जाया गया हो। इसके बावजूद पुलिस द्वारा आरोपी पर अपेक्षित दबाव या सख्त कार्रवाई नहीं की गई।सबसे गंभीर आरोप यह है कि पुलिस कार्रवाई करने के बजाय पीड़ित परिवार को चौकी पर बुलाकर बार-बार समझौता करने का दबाव बना रही है। आरोप है कि चौकी पर आरोपी पक्ष के सामने कहा गया—“राजीनामा कर लो, नहीं तो बेटी की बदनामी होगी।” परिवार का कहना है कि उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है और मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है। इतना ही नहीं, आरोपी पक्ष की ओर से भी अप्रत्यक्ष दबाव और धमकियां मिलने की बात कही गई है, लेकिन पुलिस इस दिशा में भी कोई ठोस कदम नहीं उठा रही।परिजनों ने यह भी आशंका जताई है कि किशोरी के साथ कोई अनहोनी हो सकती है, बावजूद इसके पुलिस का रवैया संवेदनहीन बना हुआ है। पूरे मामले में पुलिस की निष्क्रियता और संदिग्ध भूमिका ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।पीड़ित परिवार ने डीसीपी से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तथा नाबालिग किशोरी को जल्द से जल्द सकुशल बरामद किया जाए। अब देखना यह होगा कि उच्च अधिकारी इस गंभीर शिकायत पर क्या कार्रवाई करते हैं और क्या पीड़ित परिवार को न्याय मिल पाता है या नहीं।
थाने पर दी गई तहरीर चौकी पर बदलवाने का आरोप :पीड़िता ने आरोप लगाया है कि बेटी के अचानक लापता होने पर उन्होंने खोजबीन की। इसी दौरान पास की कॉलोनी में रहने वाला एक पूर्व से ही संदिग्ध युवक भी गायब मिला। इसकी जानकारी देते हुए पीड़िता ने 26 मार्च को थाना सिकंदरा में नामजद तहरीर दी थी। आरोप है कि थाने से तहरीर व्हाट्सएप के माध्यम से चौकी पर भेज दी गई।पीड़िता का कहना है कि शाम को उन्हें चौकी पर बुलाया गया, जहां एक कागज पर चार-पांच लाइन लिखवाकर हस्ताक्षर करा लिए गए। आरोप है कि पुलिस ने अपनी मर्जी से तहरीर बदलते हुए आरोपी युवक को राहत देते हुए अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर दी। पीड़िता अब न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है।
