निजी कंपनी के कर्मचारी बेलगाम, शिकायतों से जूझता सिस्टम
निजी कंपनी के सुपरवाइजर कुंदन कुमार पर कार्रवाई की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है विभाग
अंबेडकरनगर | जिले में स्मार्ट मीटर से जुड़ी समस्याएं अब आम उपभोक्ताओं के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन चुकी हैं। हालात यह हैं कि शिकायतों के समाधान में विद्युत विभाग पूरी तरह विफल नजर आ रहा है। अधीक्षण अभियंता और अधिशासी अभियंता जैसे जिम्मेदार अधिकारी भी उपभोक्ताओं की समस्याओं के निस्तारण में बेबस दिखाई दे रहे हैं।
छोटी शिकायत, बड़ा चक्कर
स्मार्ट मीटर से जुड़ी मामूली समस्याओं के लिए भी उपभोक्ताओं को जिला मुख्यालय तक दौड़ लगानी पड़ रही है। कई बार चक्कर लगाने के बाद भी समाधान नहीं मिल रहा, जिससे लोगों में गहरी नाराजगी है।
निजी कंपनी के सामने विभाग कमजोर
जिले में स्मार्ट मीटर लगाने वाली निजी कंपनी के कर्मचारियों का रवैया लगातार सवालों के घेरे में है। आरोप है कि उनके आगे विभागीय अधिकारी भी प्रभावी कार्रवाई नहीं कर पा रहे। नतीजतन, शिकायतकर्ता इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं।
ग्रामीण उपभोक्ताओं पर सबसे ज्यादा मार
ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले उपभोक्ताओं के लिए स्थिति और भी गंभीर है। 25 से 30 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय तक पहुंचना किसानों और मजदूरों के लिए कठिन साबित हो रहा है। साइकिल से यात्रा कर कई बार चक्कर लगाने के बावजूद जब समस्या हल नहीं होती, तो उन्हें निराश होकर लौटना पड़ता है।
मजदूरों की जेब पर दोहरी मार
दिहाड़ी मजदूरों के लिए यह समस्या आर्थिक संकट बन गई है। दो-तीन बार जिला मुख्यालय का चक्कर लगाने में लगभग हजार रुपये तक खर्च हो जाते हैं, साथ ही कई दिनों की मजदूरी भी छूट जाती है। ऐसे में उनके परिवार पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
फोन नहीं उठते, जिम्मेदारी से बचाव
उपभोक्ताओं का आरोप है कि स्मार्ट मीटर के प्रभारी, अधिकारियों और कर्मचारियों के फोन अक्सर नहीं उठते। वहीं, जिला मुख्यालय पर निजी कंपनी का कोई जिम्मेदार कर्मचारी उपलब्ध नहीं रहता। यूपीपीसीएल के कर्मचारी भी शिकायतकर्ताओं को यह कहकर वापस कर देते हैं कि यह समस्या निजी कंपनी से जुड़ी है।
सरकार की छवि पर असर
लगातार बढ़ती समस्याओं के चलते आम जनता में सरकार के प्रति नकारात्मक धारणा बनती जा रही है। यदि समय रहते समाधान नहीं हुआ, तो इसका असर आने वाले समय में व्यापक रूप से देखने को मिल सकता है।
क्या है समाधान?
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक स्मार्ट मीटर लगाने वाली निजी कंपनी के कर्मचारियों की जवाबदेही तय नहीं होगी और उन्हें जिला स्तर पर नियमित रूप से तैनात नहीं किया जाएगा, तब तक समस्या का समाधान संभव नहीं है।
