14 मई को होना है टेंडर, उससे पहले ही सफाई कर्मी लगे काम पर
एटा/जैथरा: बरसात से पहले नालों की सफाई को लेकर नगर पंचायत का कारनामा चर्चा में है। नगर में जलभराव रोकने के लिए हर साल लाखों रुपये का बजट जारी होता है, लेकिन इस बार टेंडर उठने से पहले ही सफाई शुरू करा दी गई। इससे नगर में “नाला सफाई या खुद के पेट की भरपाई” की चर्चा तेज हो गई है।
नगर पंचायत ने नालों की सफाई के लिए 4 मई को निविदा जारी कर दी है। इसके अनुसार 14 मई को ठेका उठाया जाएगा। हैरानी की बात यह है कि सफाई का काम विज्ञप्ति जारी होने के दिन से ही शुरू कर दिया गया। सफाई कर्मी नालों में जुटे हैं और जमी सिल्ट निकाल रहे हैं। जबकि नियमानुसार ठेका प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही कार्य शुरू होना चाहिए।
नगर के लोगों का कहना है कि पिछली साल भी नालों की सफाई नहीं हुई थी। नतीजा यह हुआ कि बरसात में कई मोहल्ले जल भराव की स्थिति से जूझते रहे। इस बार भी नगर पंचायत प्रशासन की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं। टेंडर से पहले सफाई शुरू कर देने से आशंका है कि ठेकेदार को कागजों पर पूरा भुगतान दिखाकर लाखों का बजट हड़पने का रास्ता बनाया जा रहा है।
नियमों के अनुसार किसी भी विकास कार्य के लिए पहले टेंडर प्रक्रिया पूरी करनी होती है। इसके बाद कार्यादेश जारी होता है और तभी मजदूरों को लगाया जा सकता है। लेकिन यहां उल्टी गंगा बह रही है। पहले काम शुरू, फिर ठेका। ऐसे में पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगना लाजिमी है।
सूत्रों की मानें तो पिछली बार भी नालों की सफाई के नाम पर बजट का बड़ा हिस्सा कागजों में खर्च दिखा दिया गया था। धरातल पर नालों की स्थिति जस की तस रही। इस बार भी वही दोहराव होने की आशंका है।
बरसात का मौसम नजदीक है। ऐसे में नालों की सफाई समय पर होना जरूरी है। लेकिन अगर सफाई सिर्फ कागजों पर होती है तो जलभराव की समस्या फिर मुंह बाए खड़ी रहेगी। लोगों का कहना है कि प्रशासन को चाहिए कि वह इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए और यह स्पष्ट करे कि ठेका से पहले सफाई किसके आदेश पर शुरू हुई ?
