एटा: जैथरा नगर पंचायत में अपराधियों पर नजर रखने के लिए लाखों रूपये के बजट से लगवाए गए सीसीटीवी कैमरे दिखावा बनकर रह गए हैं। इन कैमरों से कोई रिकॉर्डिंग भी नहीं हो रही है। प्रमुख कारण है कि इन कैमरों के लिए इंटरनेट की सुविधा के लिए जो वाईफाई लगवाए गए थे, उनमें रिचार्ज ही नहीं कराया गया है। जिम्मेदार अधिकारी भी मौन धारण किए हैं, जिससे सीसीटीवी कैमरा शोपीस बनकर रह गए हैं। चयनित स्थानों पर लगे कैमरों की दशा और दिशा दोनों खराब हैं। आमजन की सुरक्षा के लिए लगवाए गए कैमरे अपराधियों के लिए मुफ़ीद साबित हो रहे हैं। पुलिस को आज तक इन कैमरों का कोई लाभ नहीं मिला है।
तत्कालीन एसएसपी उदय शंकर सिंह की पहल पर वर्ष 2024 में नगर पंचायत जैथरा के मोहल्ला नेहरू नगर तिराहा, बस स्टैंड, मुख्य बाजार तिराहा, बारहद्वारी मंदिर के चहुंओर, पुराना अस्पताल चौराहा, वरना तिराहा सहित नगर के विभिन्न चिन्हित चौराहे-तिराहे पर 17 सीसीटीवी कैमरे लगवाए गए। पुलिस की मदद से स्थान चयनित किए गए। शासन एवं पुलिस-प्रशासन की मंशा थी कि नगर में सीसीटीवी लगने से व्यापारियों एवं आमजन की सुरक्षा होगी, तो वहीं अपराधियों में भी तीसरी नजर का खौफ रहेगा। समय पर रिचार्ज न होने के कारण यह सीसीटीवी कैमरे शोपीस बनकर रह गए हैं। कस्बा के मोहल्ला नेहरू नगर तिराहे से एक कैमरा काफी समय से गायब है। तिराहा होने की वजह से इस पोल पर तीन कैमरे लगाए गए, परन्तु आज दो ही कैमरे लगे हैं। दोनों कैमरे एक ही दिशा में हैं, जिनकी दशा देखने वाला कोई नहीं है। जबकि निगरानी की दृष्टि से कैमरे की दिशा और दशा दोनों महत्वपूर्ण होती हैं। नगर पंचायत में कैमरों की व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है। इन कैमरों का न तो आमजन को कोई लाभ हो रहा है और न ही पुलिस प्रशासन को। कोई घटना होने पर जब इन कैमरों के फुटेज की पुलिस की जरूरत पड़ती है, उस समय कैमरों का रिचार्ज ही नहीं होते हैं, जिससे पुलिस को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि नगर पंचायत के कैमरों का आज तक पुलिस को कोई लाभ नहीं मिला है। नगर में जब भी कोई घटना हुई है, तो नगर पंचायत की तरफ से एक ही रटा-रटाया जवाब मिला है कि रिचार्ज खत्म हो गया है। जिम्मेदार बहुत ही साफगोई से झूठ बोलते हैं।
बुधवार रात को कस्बा की महिला के साथ हुई लूट के प्रयास की घटना में आरोपियों तक पहुंचने के लिए जब पुलिस को सीसीटीवी फुटेज देखने की जरूरत पड़ी, तो नगर पंचायत के कैमरे रिचार्ज नहीं मिले। जिससे पुलिस की मुश्किलें और बढ़ गईं हैं। अधिकतर कैमरे कई महीनों से बंद पड़े हैं। कुछ कैमरों के लेंस पर धूल की परत जम चुकी है। ऐसे में अगर कोई घटना होती है तो फुटेज मिलने की उम्मीद ही नहीं है।
नगर के लोगों का कहना है कि कैमरे लगने के बाद नगर में आपराधिक घटनाओं का ग्राफ कम हुआ था। सीसीटीवी फुटेज लेकर पुलिस को घटनाओं के अनावरण में काफी मदद मिलती थी। अब वाई फाई का रिचार्ज खत्म होने की वजह से पूरा निगरानी सिस्टम ठप हो गया है। व्यापारियों ने कई बार नगर पंचायत में शिकायत की, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं हो सका है। तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि सीसीटीवी सिस्टम को नियमित सर्विसिंग और निगरानी की जरूरत होती है। अगर एक बार सिस्टम बैठ जाए तो अपराधी भी बेखौफ हो जाते हैं। ऐसे में सुरक्षा के नाम पर हुआ खर्च बेकार साबित होता है।
बीते वर्ष भी नहीं मिले थे सीसीटीवी फुटेज
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एटा: कस्बा जैथरा में बीते वर्ष 2025 के मई माह में जब एटा- अलीगंज मार्ग पर दो पक्षों के बीच सरेराह दिनदहाड़े फायरिंग की घटना हुई, तो उस समय भी पुलिस को दोनों पक्ष के लोगों की पहचान करने को सीसीटीवी फुटेज की जरूरत पड़ी। दिनदहाड़े फायरिंग की घटना होने के कारण तत्कालीन क्षेत्राधिकारी अलीगंज सुधांशु शेखर ने स्वयं कैमरों की पड़ताल की, लेकिन एक पक्ष की रिकॉर्डिंग से जुड़े कैमरे फुटेज गायब मिले। उस समय आरोप लगे थे कि नगर पंचायत अध्यक्ष से जुड़े पक्ष के लोगों के सीसीटीवी फुटेज जानबूझकर गायब कर दिए गए। उस समय पुलिस ने काफी नाराजगी व्यक्त की थी। इससे पूर्व वरना रोड पर भी एक घटना घटित हुई थी, जिसके भी फुटेज पुलिस को नहीं मिले थे। घटना की पड़ताल में पुलिस को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। नगर पंचायत के कैमरों से पुलिस को आज तक कोई मदद नहीं मिल सकी है। पुलिस अब इस मामले में उच्चाधिकारियों से पत्राचार कर रही है।
