छह हजार मानदेय पर हुई थी नियुक्ति, फर्जी दस्तावेजों और सेटिंग से 78 हजार रुपये महीना वेतन लेने का आरोप
आगरा। बेसिक शिक्षा विभाग के समग्र शिक्षा कार्यालय में पिछले 15 वर्षों से जमे जिला समन्वयक (समेकित शिक्षा) कुलदीप तिवारी पर भ्रष्टाचार, फर्जीवाड़ा और सरकारी योजनाओं में सेंधमारी के गंभीर आरोपों की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। मण्डलीय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) कार्यालय ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से 21 मई तक बिंदुवार साक्ष्यों सहित जांच आख्या मांगी है। गुरुवार जांच रिपोर्ट भेजने का अंतिम दिन होगा।
शिकायतकर्ता अजय चाहर द्वारा मुख्य विकास अधिकारी को दिए गए शिकायती पत्र में आरोप लगाया गया है कि संविदा कर्मचारी होने के बावजूद कुलदीप तिवारी ने विभागीय अधिकारियों से सांठगांठ कर पूरे समग्र शिक्षा कार्यालय में प्रभाव कायम कर लिया और सरकारी योजनाओं के बजट में हेराफेरी कर करोड़ों की अकूत संपत्ति अर्जित कर ली।
शिकायत में कहा गया है कि कुलदीप तिवारी की नियुक्ति वर्ष 2011 में करीब छह हजार रुपये मानदेय पर हुई थी, लेकिन बाद में कथित रूप से फर्जीवाड़ा और अधिकारियों से सेटिंग कर उनका मानदेय बढ़ाकर करीब 78 हजार रुपये प्रतिमाह करा दिया गया। जबकि समग्र शिक्षा में संविदा कर्मचारियों और जिला समन्वयकों का मानदेय इससे काफी कम बताया गया है। शिकायतकर्ता ने विभागीय अभिलेखों की जांच कर भुगतान संबंधी दस्तावेज खंगालने की मांग की है।
रिश्तेदारों की फर्मों को लाभ पहुंचाने का आरोप :शिकायत में आरोप लगाया गया है कि समग्र शिक्षा की विभिन्न योजनाओं में जेम पोर्टल के माध्यम से होने वाली खरीद प्रक्रिया में अपने रिश्तेदारों और करीबी ठेकेदारों की फर्मों को लाभ पहुंचाया गया। आरोप है कि कई फर्में रिश्तेदारों के नाम पर बनाकर उन्हें एल-1 दिखाया जाता था और फिर सप्लाई व भुगतान में अनियमितताएं की जाती थीं।
कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में खाद्यान्न, स्टेशनरी और अन्य सामान की खरीद में भी लंबे समय से एक ही समूह की फर्मों को लाभ देने के आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता ने विभागीय फाइलों और जेम पोर्टल की जांच कराने की मांग की है।
पत्नी को दिलाया लेखाकार का पद :शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुलदीप तिवारी ने अपनी पत्नी को कस्तूरबा गांधी विद्यालय बिचपुरी में सहायक लेखाकार के पद पर नियुक्त करा दिया, जबकि वह कभी विद्यालय नहीं पहुंचीं। आरोप है कि उनकी जगह “डमी कर्मचारी” काम करता रहा और वेतन नियमित रूप से उठाया जाता रहा। शिकायतकर्ता ने विद्यालय में औचक निरीक्षण कराने की मांग की है।
विभाग में रिश्तेदारों के नाम चल रहीं गाड़ियां :शिकायत में कहा गया है कि कुलदीप तिवारी ने रिश्तेदारों के नाम पर चार पहिया वाहन खरीदकर विभाग में लगा दिए और उनके नाम पर हर माह भुगतान लिया जा रहा है। विभागीय अभिलेखों की जांच से पूरे मामले के खुलासे का दावा किया गया है।
फाइलें दबाने और अधिकारियों को गुमराह करने का आरोप :शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि जब भी किसी अधिकारी ने व्यवस्था बदलने या जांच की कोशिश की तो संबंधित फाइलें रोक दी गईं। यहां तक कि वर्ष 2026-27 की खाद्यान्न और स्टेशनरी सप्लाई की जेम बिड भी समय से नहीं डाली गई। मामला शासन स्तर तक पहुंचने पर विभागीय अधिकारियों की फटकार के बाद जांच बैठाई गई।मण्डलीय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) चन्द्रशेखर द्वारा जारी पत्र में बीएसए आगरा को निर्देश दिए गए हैं कि शिकायत के प्रत्येक बिंदु पर साक्ष्यों सहित बिंदुवार जांच आख्या 21 मई तक हर हाल में उपलब्ध कराई जाए। वहीं शिकायतकर्ता से भी शपथपत्र और अतिरिक्त साक्ष्य मांगे गए हैं।अब पूरे शिक्षा विभाग की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच रिपोर्ट में क्या सामने आता है और वर्षों से लगे भ्रष्टाचार के आरोपों पर प्रशासन क्या कार्रवाई करता है।
