कोर्ट में महिला ने सुनाई आपबीती, महिला के साथ जातीय देख न्यायालय में अधिवक्ताओं ने दरोगा को घेरा
आगरा। थाना सिकंदरा पुलिस एक बार फिर विवादों में घिर गई है। पहले भी थाना पुलिस पर कई गंभीर आरोप लग चुके हैं।लेकिन उच्चाधिकारी थाना प्रभारी को अभयदान देते रहे हैं, किसान नेता दिलीप चौधरी को थाने में घंटों बैठाने, नाबालिग से जुड़े मामले में नियमों की अनदेखी करने पर पुलिसकर्मियों के निलंबन जैसी घटनाएं चर्चा में रही हैं। वहीं किसान नेता अमित चौधरी ने भी थाना प्रभारी पर गंभीर आरोप लगाए थे, ।जिसमें एक ओडियो भी इंटरनेट मीडिया पर वायरल हुआ था,इसी क्रम में अब सिकंदरा थाना पुलिस पर एक वारंटी महिला के साथ कथित मारपीट और अभद्र व्यवहार के आरोप लगे हैं। शुक्रवार को महिला को न्यायालय में पेश किए जाने के दौरान उसने पुलिसकर्मियों पर चौकी में ले जाकर पिटाई करने तथा जातीय होने का आरोप लगाया। मामले को गंभीरता से लेते हुए न्यायालय ने महिला का डॉक्टरों के पैनल से पुनः चिकित्सीय परीक्षण कराने के आदेश दिए हैं।
जानकारी के अनुसार वर्ष 2018 में दर्ज एक मुकदमे में सीमा सिकरवार निवासी किरावली मोड़, रुनकता के विरुद्ध न्यायालय से वारंट जारी था। सिकंदरा पुलिस ने चार जून को उसे गिरफ्तार किया था। महिला का आरोप है कि गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने उसके घर में तोड़फोड़ की और बाद में उसे रुनकता चौकी ले जाया गया, जहां चौकी प्रभारी निलेश शर्मा, एसआई सुरजीत सिंह तथा अन्य पुलिसकर्मियों ने उसके साथ मारपीट की। महिला का दावा है कि उसे लात-घूंसों और बेल्ट से पीटा गया, जिससे उसके शरीर पर चोटें आई हैं।
शुक्रवार को जब एसआई सुरजीत सिंह महिला को एसीजेएम द्वितीय की अदालत में पेश करने पहुंचे तो महिला ने न्यायालय के समक्ष कथित उत्पीड़न की पूरी घटना बताई। महिला की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने न केवल मारपीट की बल्कि उसके प्रति जातीय टिप्पणी भी की। इस दौरान अधिवक्ताओं ने निष्पक्ष जांच और दोबारा मेडिकल परीक्षण की मांग उठाई।महिला की शिकायत और अधिवक्ताओं के तर्क सुनने के बाद न्यायालय ने सीएमओ और इंस्पेक्टर सिकंदरा को डॉक्टरों के पैनल से महिला का पुनः चिकित्सीय परीक्षण कराने के निर्देश दिए। साथ ही महिला को शनिवार को पुनः न्यायालय में प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया है।मामले को लेकर न्यायालय परिसर में उस समय तनाव की स्थिति बन गई जब महिला को पेश करने आए दरोगा को कुछ अधिवक्ताओं ने घेर लिया। दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई। स्थिति बिगड़ती देख सुरक्षा कर्मियों ने हस्तक्षेप कर मामला शांत कराया।उधर, इंस्पेक्टर सिकंदरा प्रदीप कुमार त्रिपाठी ने महिला द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि महिला को न्यायालय से जारी वारंट के आधार पर गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने बताया कि पूर्व में कराए गए मेडिकल परीक्षण में किसी प्रकार की चोट की पुष्टि नहीं हुई थी। न्यायालय के आदेशानुसार पुनः मेडिकल कराया जाएगा, जिसके बाद स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
