कोर्ट बोला- प्रथम दृष्टया पुलिस अभिरक्षा में लगी चोटें, एक दिन में एफआईआर की प्रति तलब
अग्र भारत संवाददाता,आगरा। विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, आगरा ने पुलिस अभिरक्षा में एक महिला के साथ कथित मारपीट और उत्पीड़न के मामले में थाना सिकंदरा के तीन पुलिस उपनिरीक्षकों और एक महिला पुलिसकर्मी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। न्यायालय ने थाना प्रभारी सिकंदरा को निर्देश दिया है कि आरोपित पुलिसकर्मियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर उसकी प्रति एक दिन के भीतर न्यायालय में प्रस्तुत की जाए। साथ ही पुलिस आयुक्त को विभागीय जांच कर एक माह के भीतर रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
मामला थाना शाहगंज में वर्ष 2018 में दर्ज मुकदमे से संबंधित है। इस मुकदमे में वांछित चल रही सीमा सिकरवार को सिकंदरा पुलिस ने चार जून को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया था। न्यायालय में सीमा सिकरवार ने आरोप लगाया कि गिरफ्तारी के दौरान पुलिसकर्मियों ने उसके घर में तोड़फोड़ की, दस्तावेज उठा ले गए तथा थाने पर ले जाकर उसके साथ मारपीट की। महिला ने शरीर पर चोटें होने का दावा करते हुए चिकित्सकीय परीक्षण कराने की मांग की थी।न्यायालय के आदेश पर गठित चिकित्सकीय बोर्ड ने छह जून को महिला का पुनः मेडिकल परीक्षण किया। बोर्ड की रिपोर्ट में महिला के शरीर पर तीन चोटों का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार दाहिनी आंख के नीचे, पेट के दाहिने हिस्से तथा बाएं कंधे के ऊपरी भाग पर चोट के निशान पाए गए। चिकित्सकों ने चोटों को साधारण प्रकृति का बताते हुए उन्हें कठोर एवं कुंद वस्तु से लगभग दो दिन पूर्व पहुंचाया जाना बताया है। एक चोट के संबंध में एक्स-रे कराने की सलाह भी दी गई है।न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि गिरफ्तारी चार जून को हुई थी तथा मेडिकल बोर्ड द्वारा चोटों की अवधि लगभग दो दिन पुरानी बताई गई है। उपलब्ध अभिलेखों और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट होता है कि महिला को पुलिस अभिरक्षा के दौरान चोटें पहुंची हैं। न्यायालय ने इसे सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों तथा मानवाधिकारों के उल्लंघन से जुड़ा गंभीर मामला माना है।कोर्ट ने उपनिरीक्षक सुरजीत सिंह, उपनिरीक्षक नीलेश शर्मा, महिला उपनिरीक्षक नेहा तथा महिला हेड कांस्टेबल सीमा के विरुद्ध सुसंगत धाराओं में एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। आदेश की प्रति पुलिस आयुक्त आगरा, पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश तथा अन्य संबंधित अधिकारियों को भी भेजी गई है।


दो मेडिकल रिपोर्टों पर भी चर्चा,मामले में दो अलग-अलग मेडिकल रिपोर्टों को लेकर भी चर्चा बनी हुई है। पांच जून को हुए प्रारंभिक चिकित्सकीय परीक्षण में किसी स्पष्ट बाहरी चोट का उल्लेख नहीं किया गया था, जबकि न्यायालय के आदेश पर गठित मेडिकल बोर्ड ने छह जून की रिपोर्ट में तीन चोटों का उल्लेख किया है। इस संबंध में एसीपी हरिपर्वत ने बातचीत में दोनों मेडिकल रिपोर्टों को समान बताया। वहीं न्यायालय ने मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर पुलिसकर्मियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने का आदेश जारी किया है।अब सभी की निगाहें मुकदमा दर्ज होने और विभागीय जांच की कार्रवाई पर टिकी हैं।क्या आगरा पुलिस कमिश्नरेट ऐसे पुलिस कर्मियों पर क्या कार्यवाही करेगा।
