जैथरा/धुमरी (एटा) कस्बा धुमरी स्थित एसडी पब्लिक इंटर कॉलेज के भवन को दर्शाकर हासिल की गई दो बोर्डों की मान्यताओं का विवाद लगातार गहराता जा रहा है। एक ही भवन पर अलग-अलग बोर्डों की मान्यता लिए जाने के मामले ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि जिस भवन को दर्शाकर पहले यूपी बोर्ड की मान्यता प्राप्त की गई, उसी भवन को दोबारा दर्शाकर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से भी संबद्धता हासिल की गई है। दिसंबर माह में ही मामला सामने आने के बाद विद्यालय प्रबंधन के साथ-साथ शिक्षा विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है। उच्च स्तर पर हुई शिकायतों के बाद विभागीय अधिकारियों की गर्दनें फंसती नजर आ रही हैं। छह माह बाद भी कॉलेज के विरुद्ध कोई प्रभावी कार्रवाई न होने से डीईआईओएस पर भी जांच की आंच आ सकती है।
जानकारी के अनुसार विद्यालय की मान्यता प्रक्रिया के दौरान भवन, भूमि, कक्षों, प्रयोगशालाओं और अन्य व्यवस्थाओं का भौतिक सत्यापन किया जाता है। इसके बाद संबंधित विभाग की ओर से अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किया जाता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि एक ही भवन पहले से ही किसी अन्य बोर्ड की मान्यता के लिए उपयोग में था, तो उसी भवन के आधार पर दूसरी मान्यता के लिए एनओसी कैसे जारी कर दी गई।
शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं। उनका आरोप है कि बिना विभागीय मिलीभगत के इस तरह की प्रक्रिया पूरी होना संभव नहीं है। मामले में संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
मान्यता के लिए प्रस्तुत दस्तावेजों का सत्यापन कई स्तरों पर होता है। यदि इसके बावजूद एक ही भवन पर दोहरी मान्यता का मामला सामने आया है तो यह प्रशासनिक लापरवाही या नियमों की अनदेखी का संकेत माना जा सकता है।
उधर, अभिभावकों में भी इस मामले को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। उनका कहना है कि विद्यालयों की मान्यता को लेकर पारदर्शिता होनी चाहिए ताकि विद्यार्थियों के भविष्य पर कोई संकट न आए। यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
फिलहाल पूरे मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है। लोगों की निगाहें प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि उच्च स्तर से निष्पक्ष जांच कराई जाती है तो यह स्पष्ट हो सकेगा कि दोहरी मान्यता प्राप्त करने की प्रक्रिया में किस स्तर पर नियमों की अनदेखी हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है?
एक ही भवन पर दोहरी मान्यता अफसरों के गले की बन सकती है फांस! डीईआईओएस की भूमिका पर उठ रहीं उंगलियां
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