माननीय को कर रहे थे बदनाम, आढ़ती खुद लूट रहे थे दाम
विधायक पुत्र जीतू राठौर की सूझबूझ से किसानों की गाढ़ी कमाई पर लूट हुई बंद, किसान कर रहे सराहना
एटा: जैथरा में गल्ला मंडी के बाहर अलीगंज रोड पर अनाधिकृत रूप से संचालित आढ़तों पर किसानों के खून-पसीने की गाढ़ी कमाई पर डाका डाला रहा था। ई-रिक्शा चालक कमीशन के आधार पर सेट थे। किसान की उपज आढ़त पर पहुंचते ही आढ़ती रिमोट से घटतौली करने के साथ ही वजन भी कम लिख देते थे। हर तरफ से किसान को लूटा जा रहा है। भोले-भाले किसान आढ़तियों के इस खेल को नहीं पकड़ पाते थे। विभागीय अधिकारी भी इस खेल पर अपनी आंखें बंद किए रहे। घटतौली को लेकर कई बार विवाद भी हो चुका था। आढतें खुलवाने को लेकर माननीय को बदनाम किया जा रहा था, जबकि किसानों की घटतौली कर दाम खुद पैदा किया जा रहा था। जब किसानों के साथ होने वाली लूट की जानकारी विधायक पुत्र जीतू राठौर को हुई, तो उन्होंने किसानहित में बेहतरीन निर्णय लिया और नियमविरुद्ध चल रहीं आढ़तों को बंद कराया। उनके इस निर्णय की किसान सराहना कर रहे हैं।
किसानों की फसल गेहूं, मक्का आदि खरीदने के लिए जैथरा में उप मंडी पहले से स्थापित है। जिसमें पंजीकृत आढ़त संचालक फसल खरीदते हैं। नियमानुसार मंडी समिति के बाहर कोई व्यापारी आढ़त का संचालन कर अनाज की ख़रीददारी नहीं कर सकता है, बावजूद इसके जैथरा में एटा-अलीगंज मार्ग पर करीब आधा दर्जन आढतें खुलेआम संचालित होती रहीं। ये आढतें जिरौलिया तिराहे से लेकर ललहट गांव तक संचालित होती थीं। नियम विरुद्ध होने वाले ऐसे कार्यों को रोकने के लिए जैथरा मंडी में सचिव, एक सहायक के साथ ही अन्य स्टाफ की तैनाती भी है। मंडी परिसर में ऑफिस के साथ-साथ गाड़ी की सुविधा भी है, परन्तु इसके बाद भी मंडी के जिम्मेदार अधिकारी इन आढ़तों के संचालन पर रोक लगाने में नाकाम साबित रहे। इन आढ़तों पर किसानों को तरह से लूटा जा रहा था। सूत्रों के अनुसार, कुछ आढ़त संचालकों का गांव-गांव नेटवर्क था। गांव से किसान की उपज लाने वाले ई-रिक्शा चालकों का कमीशन तय था। सूत्र बताते हैं कि एक आढ़त संचालक इन ई रिक्शा चालकों को 150 से 300 रुपये का कमीशन गोपनीय रूप से देता था। इसके अलावा ई-रिक्शा चालक किसान से भाड़ा अलग लेता था। चालक को दिए गए कमीशन का रूपया किसान की उपज से ही निकाला जाता था। आढ़त संचालक रिमोट के माध्यम से वजन कम कर देता था। बताते हैं कि 45 किलोग्राम की वजन की एक बोरी से 4 किलोग्राम की घटतौली कर ली जाती थी। इसके अलावा वजन लिखने में भी हेरफेर कर दिया था। जेब में रिमोट होने के कारण बेचारा भोला किसान कुछ समझ ही नहीं पाता था। इस पूरे खेल में आढ़त संचालक के साथ-साथ ई- रिक्शा चालक व विभागीय अधिकारी शामिल बताए जाते थे। चर्चा यह थी कि इसके लिए महीनेदारी भी जाती थी। घटतौली को लेकर आढ़तों पर विवाद भी सामने आते रहे हैं। एक बार एक आढ़त संचालक से घटतौली का रिमोट भी पकड़ा गया था। आढ़ती के माफी मागंने व पूरी तौल करने के बाद मामले को रफा-दफा कर दिया गया था।
नियम विरुद्ध चल रहीं आढ़तों पर किसानों के साथ हो रही लूट व विवादों की जानकारी लगातार थानाध्यक्ष जैथरा रितेश ठाकुर व विधायक पुत्र जीतू राठौर के समक्ष पहुंच रहीं थीं। तब इन आढ़तों को बंद कराने का दृढ़ संकल्प लिया गया।
विधायक पुत्र ने किसान हित में महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए इन नियम विरुद्ध आढ़तों को बंद कराया। विधायक पुत्र जीतू राठौर ने कहा कि किसानों के खून-पासीने की गाढ़ी कमाई पर ढाका डालने पर कोई रियायत नहीं बरती जाएगी। किसान हमारे अन्न देवता हैं, उनके साथ किसी भी तरह की धोखाधड़ी करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि नियम विरुद्ध आढ़तों का संचालन नहीं होने दिया जाएगा।
माननीय को करते रहे बदनाम, खुद लूटते रहे दाम
एटा: करीब 3 माह पूर्व कृषि विभाग के डीडीए ने जैथरा पहुंचकर नियम विरुद्ध चल रहीं आढ़तों को बंद कराया था। अधिकारियों को देखकर संचालक अपनी-अपनी आढ़तों पर ताला डालकर भाग गए थे। उस समय एक आढ़त संचालक पर जुर्माना भी लगा था। डीडीए ने आढ़तों का पुनः संचालन पाए जाने पर मंडी सहायकों को निलंबित करने की चेतावनी भी दी थी। कुछ दिन तक तो आढतें बंद रहीं, फिर कुछ आढ़त संचालकों ने विधायक सत्यपाल सिंह राठौर से तथ्यों को छिपाकर आढ़तों को खुलवाने का अनुरोध किया, जिस पर उन्होंने खुलवाने का आश्वासन दे दिया था। इन संचालकों ने अपनी आढतें पुनः खोलकर किसानों की गाढ़ी कमाई पर डाका डालना शुरू कर दिया। जब एकाध बार मण्डी सहायकों ने इनको बंद करने के लिए कहा, तो इन संचालकों ने विधायक का नाम लेकर उन पर अपना रौंब जमा दिया। जबकि हक़ीक़त इसके विपरीत थी। माननीय को आढ़त संचालकों के काले कारनामों की जानकारी तक नहीं थी। विधायक सत्यपाल सिंह राठौर का कहना है कि किसानों का शोषण करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। मण्डी परिसर से बाहर आढ़त संचालित पाए जाने पर संचालकों के विरुद्ध नियमानुसार कार्यवाही कराई जाएगी।
