आगरा। आगरा पुलिस कमिश्नरेट में बेहतर कार्यप्रणाली और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस आयुक्त दीपक कुमार लगातार प्रयासरत हैं, लेकिन आरोप है कि उनके ही विभाग के कुछ पुलिसकर्मी उनकी मंशा पर पानी फेर रहे हैं। ताजा मामला थाना सिकंदरा की रुनकता पुलिस चौकी से जुड़ा है। आरोप है कि पुलिस द्वारा हिरासत में लिए गए एक छात्र के संबंध में परिजनों को लगातार गुमराह किया गया। वहीं, उसके दो साथियों को छोड़ दिया गया, जबकि छात्र को 24 घंटे से अधिक समय तक चौकी में बैठाए रखा गया। परिजनों ने चौकी परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच कर निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है।
मामला थाना सिकंदरा क्षेत्र की रुनकता पुलिस चौकी का है। कस्बा रुनकता निवासी 11वीं कक्षा का छात्र राज (पुत्र आजाद) शुक्रवार शाम करीब आठ बजे घर से अचानक लापता हो गया। परिजन उसकी तलाश में दर-दर भटकते रहे। शनिवार सुबह करीब 11 बजे वे जानकारी लेने रुनकता चौकी पहुंचे, लेकिन पुलिस ने किसी भी प्रकार की जानकारी होने से इनकार कर दिया।परिजनों का आरोप है कि शनिवार दोपहर करीब एक बजे किसी अन्य व्यक्ति के माध्यम से उन्हें पता चला कि उनका बेटा पुलिस चौकी की हवालात में बंद है। सूचना मिलते ही परिजन चौकी पहुंचे, लेकिन पुलिस ने उन्हें छात्र से मिलने नहीं दिया। काफी प्रयास और स्थानीय चुनाव की तैयारी कर रहे एक प्रत्याशी के हस्तक्षेप के बाद परिजनों की छात्र से मुलाकात हो सकी।परिजनों के अनुसार, छात्र ने बताया कि वह पांच युवकों के साथ था,जिनमे निखिल और गौरव सहित दो अन्य कस्बा निवासी युवक थे जो हथियार के साथ रील बनाने के लिए वीडियो बना रहे थे। इनमें से दो युवक पहले ही वहां से चले गए थे। इसके बाद पुलिस छात्र समेत तीन युवकों को पकड़कर शुक्रवार रात करीब 10 बजे चौकी ले आई।आरोप है कि शनिवार तड़के करीब चार बजे पुलिस ने दो युवकों को कथित रूप से 30 हजार रुपये लेकर छोड़ दिया। छात्र से भी रुपये की मांग की गई, लेकिन उसने परिजनों के डर से मना कर दिया। इसके बाद उसे 24 घंटे से अधिक समय तक चौकी में हिरासत में रखा गया।यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। इस संबंध में थाना प्रभारी राजीव त्यागी से जानकारी ली गई तो उन्होंने मामले की जानकारी होने से इनकार करते हुए कहा कि वह इसकी जानकारी कराएंगे।इस संबंध में एसीपी हरिपर्वत अमीषा सिंह को फोन किया लेकिन उनके द्वारा फोन रिसीव नहीं किया गया।
