थाने की आख्या में खुलासा—मामले में दर्ज ही नहीं हुआ कोई अभियोग, अब सात दिन में FIR दर्ज कर कार्रवाई की रिपोर्ट कोर्ट में देनी होगी
अग्र भारत संवाददाता, आगरा। घटना की सूचना 112 पर दी गई, पुलिस के मौके पर पहुंचने और घटनास्थल देखने का दावा किया गया, चोरी के सामान का विवरण दिया गया और दो प्रत्यक्षदर्शी गवाह भी बताए गए। इसके बावजूद अछनेरा पुलिस ने मुकदमा दर्ज करना जरूरी नहीं समझा। अब न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद पुलिस को मुकदमा दर्ज कर मामले की विवेचना करानी होगी।
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, न्यायालय संख्या-10 आगरा ने मामले में प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध होना मानते हुए अछनेरा थाना प्रभारी निरीक्षक को सुसंगत धाराओं में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करने और नियमानुसार विवेचना कराने के आदेश दिए हैं। साथ ही की गई कार्रवाई से सात दिन के भीतर न्यायालय को अवगत कराने के निर्देश दिए गए हैं।मामला अछनेरा निवासी अर्चना की ओर से न्यायालय में दिए गए प्रार्थना पत्र का है। प्रार्थना पत्र के अनुसार 17 अप्रैल 2026 को वह दीवानी कचहरी में एक मुकदमे की तारीख पर गई थीं। शाम करीब साढ़े चार बजे घर लौटने के बाद अपने प्लॉट पर पहुंचीं तो वहां कुछ लोगों को कथित रूप से चोरी कर भागते हुए देखा।अर्चना के अनुसार प्लॉट से बिजली की पानी की मोटर और छह प्लास्टिक पाइप चोरी कर लिए गए। उन्होंने आरोपितों का पीछा कर पकड़ने का प्रयास किया, लेकिन वे कमरे के पीछे से रेलवे लाइन की ओर भाग गए। घटना की तत्काल सूचना 112 पुलिस सेवा को दी गई। प्रार्थना पत्र में इवेंट नंबर पी-17042616050 का भी उल्लेख किया गया है।पीड़िता के अनुसार पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण कर थाने जाकर रिपोर्ट लिखाने की बात कहकर चली गई। मामले में अभिषेक और पीड़िता के पति गोविंद को प्रत्यक्षदर्शी गवाह बताया गया है।पीड़िता ने बाद में पुलिस अधिकारियों को भी प्रार्थना पत्र देकर कार्रवाई की मांग की, लेकिन मुकदमा दर्ज नहीं हुआ। इसके बाद उसने न्यायालय की शरण ली।
थाने ने खुद माना—नहीं दर्ज हुआ अभियोग,न्यायालय ने मामले में अछनेरा थाने से आख्या तलब की। थाने से प्राप्त आख्या में बताया गया कि इस संबंध में कोई अभियोग पंजीकृत नहीं है। इसके बाद न्यायालय ने प्रार्थना पत्र और उपलब्ध दस्तावेजों का अवलोकन किया।न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि प्रार्थना पत्र में वर्णित तथ्यों से प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध कारित होना प्रतीत होता है और मामले के सही तथ्य विवेचना के माध्यम से ही सामने आ सकते हैं।इस पर अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मौ. साजिद प्रथम ने प्रार्थना पत्र स्वीकार करते हुए अछनेरा थाना प्रभारी निरीक्षक को मामले में सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर नियमानुसार विवेचना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
न्यायालय के आदेश से पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल,सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब घटना की सूचना तत्काल 112 पर दी गई, पीड़िता ने चोरी हुए सामान का विवरण दिया, मौके पर पुलिस पहुंचने का दावा किया गया और प्रत्यक्षदर्शी गवाह भी मौजूद थे, तब अछनेरा पुलिस ने मुकदमा दर्ज करने की जरूरत क्यों नहीं समझी।न्यायालय के आदेश के बाद अब अछनेरा पुलिस को मामले में कार्रवाई करनी होगी। आदेश ने एक बार फिर थाना पुलिस की कार्यप्रणाली और संज्ञेय अपराधों में मुकदमा दर्ज करने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।इस प्रकरण में थाना प्रभारी निरीक्षक विजय कुमार सिंह चंदेल को कई फोन किए लिकिन उनका फोन रिसीव नहीं हुआ।
