कभी फोटो खिंचवाने तक सीमित नजर आने वाली गश्त अब जमीन पर भी नजर नहीं आ रही, सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठने लगे सवाल
अंबेडकरनगर। जिले में पुलिस की गश्त और चेकिंग व्यवस्था को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। शहर से लेकर प्रमुख मार्गों तक बनाए गए बैरिकेडिंग और चेक प्वाइंट पर पुलिसकर्मियों की मौजूदगी पहले की अपेक्षा कम दिखाई दे रही है। ऐसे में आम नागरिकों के बीच पुलिस की सक्रियता को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
कुछ समय पहले तक पुलिस की चेकिंग व्यवस्था के दौरान पुलिसकर्मी बैरिकेडिंग और चेक प्वाइंट पर सक्रिय नजर आते थे। यहां तक कि विशेष अभियानों और अधिकारियों के निरीक्षण के दौरान फोटो शूट के लिए भी पुलिसकर्मियों की मौजूदगी आसानी से दिखाई देती थी। लेकिन अब कई स्थानों पर चेक प्वाइंट और बैरिकेडिंग तो नजर आती है, लेकिन वहां पुलिसकर्मियों की नियमित मौजूदगी दिखाई नहीं दे रही है।
गश्त कमजोर होने से आम जनता में क्या संदेश?
पुलिस की गश्त केवल वाहनों की चेकिंग तक सीमित व्यवस्था नहीं है। सड़क और मोहल्लों में पुलिस की लगातार मौजूदगी आम नागरिकों में सुरक्षा का भरोसा पैदा करती है। जब सड़कों पर पुलिस की सक्रियता कम दिखाई देती है तो आम जनता के मन में यह सवाल पैदा होना स्वाभाविक है कि किसी आपात स्थिति में तत्काल मदद कितनी आसानी से उपलब्ध होगी।
विशेष रूप से देर शाम और रात के समय पुलिस की प्रभावी गश्त महिलाओं, बुजुर्गों, व्यापारियों, राहगीरों और दूरदराज के क्षेत्रों से आने-जाने वाले लोगों के लिए सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार होती है। गश्त कमजोर पड़ने का सीधा असर लोगों के सुरक्षा-बोध पर पड़ सकता है।
अपराध की नीयत रखने वालों को मिल सकता है मनोवैज्ञानिक बल
पुलिस की लगातार मौजूदगी अपराध करने की नीयत रखने वालों के लिए एक प्रभावी निवारक का काम करती है। चेकिंग और गश्त दिखाई देने पर संदिग्ध गतिविधियों में शामिल लोग सतर्क रहते हैं। इसके विपरीत यदि प्रमुख मार्गों, चौराहों और संवेदनशील स्थानों पर पुलिस की मौजूदगी कम दिखाई दे तो असामाजिक तत्व इसे पुलिस की निगरानी कमजोर होने के संकेत के रूप में ले सकते हैं।
इसका मतलब यह नहीं कि पुलिस की गश्त कम होने से अपराध होना निश्चित है, लेकिन दृश्य पुलिसिंग कमजोर पड़ने से अपराधियों के मनोबल पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने और अपराध की आशंका बढ़ने की स्थिति जरूर पैदा हो सकती है।
चेकिंग सिर्फ कागजों और तस्वीरों तक न रहे
कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए जरूरी है कि चेकिंग और गश्त केवल कागजी कार्रवाई या फोटो तक सीमित न रहकर धरातल पर भी प्रभावी रूप से दिखाई दे। प्रमुख चौराहों, बाजारों, हाईवे, सुनसान मार्गों और संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित पुलिस गश्त तथा प्रभावी बैरियर चेकिंग आम नागरिकों को सुरक्षा का भरोसा देती है।
जनता पूछ रही—कहां है पुलिस की निगरानी?
जिले में पुलिस की सक्रियता को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब जरूरत इस बात की है कि संबंधित अधिकारी जमीनी स्तर पर गश्त और चेकिंग व्यवस्था की समीक्षा करें। कौन से चेक प्वाइंट नियमित रूप से संचालित हो रहे हैं, किन क्षेत्रों में रात के समय पुलिस गश्त हो रही है और संवेदनशील स्थानों पर पुलिस की मौजूदगी कितनी है—इन तमाम बिंदुओं की प्रभावी निगरानी आवश्यक है।
क्योंकि पुलिस की मौजूदगी सिर्फ अपराध रोकने का माध्यम नहीं, बल्कि आम जनता के मन में सुरक्षा का भरोसा पैदा करने का सबसे मजबूत संदेश भी है।
