अखिलेश यादव ने CM योगी आदित्यनाथ को अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती दी। सपा प्रमुख ने 45 दिनों में यूपी में बदलाव का दावा किया और भाजपा पर निशाना साधा।
Akhilesh Yadav vs Yogi Adityanath: उत्तर प्रदेश की राजनीति में अयोध्या सीट को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक बार फिर अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती दी है। अखिलेश ने तंज कसते हुए कहा कि अगर मुख्यमंत्री का अयोध्या से टिकट पक्का है तो उन्हें इसकी घोषणा करनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में 45 दिनों के भीतर बदलाव दिखाई देने लगेगा।
अखिलेश यादव का CM योगी को खुला चैलेंज
अयोध्या से चुनाव लड़ने को लेकर अखिलेश यादव और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। अखिलेश यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री दूसरों के टिकट की बात करने से पहले अपना टिकट पक्का कराएं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि मुख्यमंत्री टिकट बांटने की स्थिति में नहीं हैं, बल्कि भाजपा में उन्हें खुद टिकट मांगने के लिए लाइन में लगना पड़ता है।
सपा प्रमुख ने कहा, “जिनका अपना टिकट तय नहीं है, वे दूसरों के टिकट की बात कर रहे हैं। अयोध्या से मुख्यमंत्री का टिकट पक्का है तो वह इसे घोषित करें।”
अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि समाजवादी पार्टी ने अयोध्या से पवन पांडेय का टिकट सबसे पहले तय कर दिया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि पवन पांडेय की हवा में अहंकारी सरकार के लोग उड़ जाएंगे।
अयोध्या सीट पर कैसे शुरू हुई सियासी जंग?
दरअसल, अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती दी थी। इसके जवाब में मुख्यमंत्री की ओर से कहा गया कि अगर अखिलेश यादव चुनाव लड़ते हैं तो वह भी चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच बयानबाजी और तेज हो गई।
रविवार को लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती पर अखिलेश यादव जेपीएनआईसी पहुंचे और उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इस दौरान उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की राजनीतिक स्थिति पर सवाल उठाए।
अखिलेश ने भाजपा में सदस्यता और टिकट वितरण की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि मुख्यमंत्री बनने से पहले योगी आदित्यनाथ भाजपा के सदस्य थे या नहीं। साथ ही उन्होंने कहा कि भाजपा के कई नेताओं ने पार्टी के लिए संघर्ष किया, जबकि योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने को लेकर उन्होंने कटाक्ष किया।
45 दिनों में दिखाई देगा बदलाव: अखिलेश यादव
सपा अध्यक्ष ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में बदलाव की शुरुआत हो चुकी है और अगले 45 दिनों में इसका असर दिखाई देने लगेगा। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने समाजवादियों को जेपीएनआईसी आने से रोकने की कोशिश की, लेकिन अब प्रदेश में परिवर्तन का आगाज हो चुका है।
अखिलेश यादव ने 2024 के लोकसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा को जनता ने झटका दिया है और 2027 के विधानसभा चुनाव में पार्टी का सफाया हो जाएगा। उन्होंने दावा किया कि जनता भाजपा को सत्ता से बाहर करने का मन बना रही है।
हालांकि, 45 दिनों में बदलाव को लेकर अखिलेश यादव का यह राजनीतिक दावा है। इसका वास्तविक असर आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीतिक गतिविधियों और चुनावी घटनाक्रम से स्पष्ट होगा।
चुनाव आयोग पर भी साधा निशाना
अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग भाजपा के लिए काम कर रहा है और चुनावों में बेईमानी तथा वोट चोरी हो रही है। उन्होंने आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए तंज कसा कि यदि भाजपा को चुनाव आयोग के माध्यम से ही काम करना है तो उसे अपने बड़े-बड़े कार्यालय बनाने की जरूरत नहीं है।
सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार अन्याय कर रही है और कमजोर तथा डरी हुई सरकार ही ऐसा करती है। हालांकि, चुनाव आयोग पर लगाए गए इन आरोपों के समर्थन में उन्होंने इस बयान के दौरान कोई विशिष्ट प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया।
छात्रों और युवाओं के मुद्दे पर भी भाजपा को घेरा
अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार से छात्रों और नौजवानों के खिलाफ कथित अन्याय बंद करने तथा गिरफ्तार छात्रों को रिहा करने की मांग की। उन्होंने दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान महिलाओं के साथ कथित अभद्रता की तस्वीरों को निंदनीय बताया।
इस दौरान अखिलेश यादव ने जर्मनी में हिटलर की निजी फोर्स का जिक्र करते हुए भाजपा पर राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ कार्रवाई कराने का आरोप लगाया। उनके इस बयान ने राजनीतिक विवाद को और तेज कर दिया है।
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले तेज होगी सियासी बयानबाजी?
अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती, टिकट को लेकर तंज और 45 दिनों में बदलाव के दावे के बीच उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। अखिलेश यादव के निशाने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा सरकार दोनों हैं।
अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती पर आगे क्या प्रतिक्रिया देते हैं और अखिलेश यादव के 45 दिनों में बदलाव के दावे पर प्रदेश की राजनीति में क्या असर दिखाई देता है।
