BS7 Emission Norms: सरकार नए उत्सर्जन मानक लागू करने की तैयारी में है। SIAM ने भारी वाहनों के टायर और ब्रेक प्रदूषण नियमों को 2035 तक टालने की मांग की। जानें पूरी खबर।
- BS7 Emission Norms: क्या है सरकार की तैयारी?
- SIAM ने भारी वाहनों के लिए मांगा चार साल का अतिरिक्त समय
- कब से लागू होंगे BS7 उत्सर्जन मानक?
- हल्के मालवाहक वाहनों पर भी लागू होंगे नए नियम
- क्या BS7 लागू होने से महंगी होंगी गाड़ियां?
- BS7 नियमों से प्रदूषण पर कैसे लगेगी लगाम?
- सरकार और वाहन उद्योग के बीच आगे क्या होगा?
नई दिल्ली। देश में बढ़ते वायु प्रदूषण पर नियंत्रण लगाने के लिए केंद्र सरकार भारत स्टेज-7 (BS7) उत्सर्जन मानकों को लागू करने की तैयारी कर रही है। हालांकि, इन कड़े नियमों को लेकर वाहन निर्माता कंपनियों की चिंताओं को देखते हुए सरकार की ओर से कुछ राहत मिलने के संकेत मिले हैं। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने नए उत्सर्जन मानकों के प्रस्ताव पर संबंधित पक्षों से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। ऐसे में बीएस-7 नियमों के लागू होने की समयसीमा और कुछ प्रावधानों में बदलाव की संभावना पर चर्चा तेज हो गई है।
वाहन निर्माताओं का कहना है कि नए उत्सर्जन मानकों को लागू करने के लिए तकनीकी बदलाव, नए उपकरणों और उत्पादन व्यवस्था में निवेश करना होगा। खासकर भारी वाहनों के लिए टायर और ब्रेक से निकलने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने के नियमों को लेकर अतिरिक्त समय की मांग की गई है।
BS7 Emission Norms: क्या है सरकार की तैयारी?
केंद्र सरकार का उद्देश्य वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करना और देश में स्वच्छ परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देना है। इसी दिशा में बीएस-7 उत्सर्जन मानकों को लागू करने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।
बीएस-7 मानकों के तहत केवल इंजन से निकलने वाले धुएं और हानिकारक गैसों पर ही नहीं, बल्कि वाहन के टायर और ब्रेक से निकलने वाले सूक्ष्म कणों के प्रदूषण पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने प्रस्तावित नियमों पर संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे हैं। इसमें वाहन निर्माता कंपनियां, उद्योग संगठन और अन्य संबंधित पक्ष अपनी राय तथा आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं।
मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, सरकार पर्यावरण संरक्षण और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बीएस-7 मानकों को लागू करने के पक्ष में है। हालांकि, वाहन उद्योग की व्यावहारिक समस्याओं और चिंताओं पर बातचीत के रास्ते खुले हैं।
SIAM ने भारी वाहनों के लिए मांगा चार साल का अतिरिक्त समय
वाहन निर्माताओं के संगठन सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को पत्र लिखकर भारी वाहनों के लिए कुछ नियमों को लागू करने की समयसीमा आगे बढ़ाने का सुझाव दिया है।
सियाम ने बस और ट्रक जैसे भारी वाहनों के टायरों तथा ब्रेक से निकलने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने वाले नियमों को अप्रैल 2031 के बजाय अप्रैल 2035 से लागू करने की मांग की है।
इस मांग के पीछे वाहन निर्माताओं का तर्क है कि नए नियमों के अनुरूप तकनीक विकसित करने, परीक्षण करने और उत्पादन व्यवस्था में आवश्यक बदलाव करने के लिए पर्याप्त समय की जरूरत होगी।
टायर और ब्रेक से निकलने वाले सूक्ष्म कणों को नियंत्रित करने के लिए नई तकनीक और परीक्षण प्रक्रियाओं की आवश्यकता हो सकती है। ऐसे में उद्योग संगठन चाहते हैं कि इन नियमों को लागू करने से पहले कंपनियों को तैयारी का पर्याप्त अवसर मिले।
हालांकि, मंत्रालय ने अभी तक इस मांग पर अंतिम निर्णय की घोषणा नहीं की है।
कब से लागू होंगे BS7 उत्सर्जन मानक?
प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, बीएस-7 मानकों को अलग-अलग वाहन श्रेणियों के लिए चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना है।
प्रमुख प्रस्तावित समयसीमा इस प्रकार है:
- 1 अप्रैल 2029: इस तारीख से निर्मित होने वाले सभी नए यात्री कार मॉडलों पर बीएस-7 उत्सर्जन मानक लागू करने का प्रस्ताव है।
- 1 अप्रैल 2030: एन1 श्रेणी के हल्के मालवाहक वाहनों के लिए बीएस-7 नियम लागू करने का प्रस्ताव है।
- अप्रैल 2031: भारी वाहनों के टायर और ब्रेक से निकलने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने वाले नियमों की प्रस्तावित समयसीमा।
- अप्रैल 2035: सियाम ने भारी वाहनों से संबंधित इन नियमों को लागू करने के लिए यह नई समयसीमा सुझाई है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि ये प्रस्तावित समयसीमाएं हैं। अंतिम नियम और उनकी प्रभावी तारीखें सरकार की अधिसूचना के बाद ही स्पष्ट होंगी।
हल्के मालवाहक वाहनों पर भी लागू होंगे नए नियम
बीएस-7 उत्सर्जन मानकों के दायरे में केवल निजी कारें ही नहीं, बल्कि हल्के मालवाहक वाहन भी आएंगे।
प्रस्ताव के अनुसार, एन1 श्रेणी के हल्के मालवाहक वाहनों के लिए 1 अप्रैल 2030 से नए उत्सर्जन मानक लागू करने की योजना है।
एन1 श्रेणी में सामान्य तौर पर 3.5 टन तक के अधिकतम अनुमत भार वाले मालवाहक वाहन आते हैं। इनमें छोटे कमर्शियल वाहन, डिलीवरी वैन और कुछ हल्के मालवाहक वाहन शामिल होते हैं।
इस बदलाव का असर वाहन निर्माता कंपनियों के साथ-साथ कमर्शियल वाहन बाजार पर भी पड़ सकता है।
क्या BS7 लागू होने से महंगी होंगी गाड़ियां?
बीएस-7 उत्सर्जन मानकों को पूरा करने के लिए वाहन निर्माताओं को अपने वाहनों की तकनीक में बदलाव करना पड़ सकता है। इसके लिए उन्नत इंजन तकनीक, उत्सर्जन नियंत्रण उपकरण, सेंसर और प्रदूषण जांच प्रणालियों में निवेश की जरूरत हो सकती है।
इसके अलावा टायर और ब्रेक से निकलने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए भी नई तकनीकों का इस्तेमाल करना पड़ सकता है।
इन बदलावों से कंपनियों की उत्पादन लागत बढ़ने की संभावना है। यदि अतिरिक्त लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों पर डाला जाता है, तो भविष्य में नई गाड़ियों की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है।
हालांकि, अभी यह तय नहीं है कि बीएस-7 मानकों के कारण कार, बस, ट्रक और अन्य वाहनों की कीमतों में कितनी बढ़ोतरी होगी।
BS7 नियमों से प्रदूषण पर कैसे लगेगी लगाम?
वाहनों से होने वाला प्रदूषण शहरी वायु गुणवत्ता को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण कारकों में शामिल है। पारंपरिक उत्सर्जन नियंत्रण व्यवस्था में मुख्य रूप से इंजन से निकलने वाले प्रदूषकों पर ध्यान दिया जाता रहा है।
लेकिन टायरों के घिसने और ब्रेक लगाने के दौरान भी सूक्ष्म कण हवा में फैलते हैं। इन्हें नॉन-एग्जॉस्ट एमिशन (Non-Exhaust Emissions) कहा जाता है।
बीएस-7 मानकों के तहत इन स्रोतों से होने वाले प्रदूषण को भी नियंत्रित करने पर जोर दिया जा रहा है। इससे वाहन प्रदूषण को अधिक व्यापक तरीके से नियंत्रित करने की दिशा में काम किया जा सकेगा।
सरकार और वाहन उद्योग के बीच आगे क्या होगा?
फिलहाल सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने प्रस्तावित नियमों पर सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं। वाहन उद्योग की ओर से दिए गए सुझावों पर विचार करने के बाद सरकार अंतिम नियमों और उनकी समयसीमा को लेकर फैसला कर सकती है।
सियाम की ओर से भारी वाहनों के टायर और ब्रेक संबंधी नियमों को अप्रैल 2035 से लागू करने का सुझाव दिया गया है। यदि सरकार इस प्रस्ताव को स्वीकार करती है, तो वाहन निर्माताओं को तकनीकी तैयारी के लिए अतिरिक्त समय मिल सकता है।
हालांकि, सरकार की प्राथमिकता प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण संरक्षण है। इसलिए बीएस-7 मानकों को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ना तय माना जा रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार वाहन निर्माताओं की मांगों को कितना स्वीकार करती है और अंतिम नियमों में क्या बदलाव किए जाते हैं।
