Greater Noida West News: महागुन मायवुड्स सोसाइटी में 23वीं मंजिल से गिरकर पिता रणदीप पात्रा और 11 वर्षीय बेटे आरव की मौत। जानिए हादसे की वजह और हाईराइज बालकनी की सुरक्षा से जुड़े सवाल।
- खाटू श्याम मंदिर जाने की थी तैयारी, सुबह चार बजे उठ गया था परिवार
- बेटे को गिरता देख बचाने दौड़े पिता, दोनों नीचे जा गिरे
- हाईराइज सोसाइटियों की बालकनी बनती जा रही जानलेवा
- ग्रेटर नोएडा और नोएडा में पहले भी हो चुके हैं दर्दनाक हादसे
- हादसों के बाद सोसाइटियों में बालकनी पर लग रही ग्रिल
- मनोचिकित्सक ने बच्चों से संवाद बनाए रखने पर दिया जोर
- हाईराइज में रहने वाले परिवार इन बातों का रखें ध्यान
- एक हादसे ने फिर खड़े किए कई बड़े सवाल
ग्रेटर नोएडा। दिल्ली-एनसीआर की हाईराइज सोसाइटियों में रहने वाले परिवारों के लिए बालकनी की सुरक्षा एक बार फिर बड़ा सवाल बनकर सामने आई है। ग्रेटर नोएडा वेस्ट की महागुन मायवुड्स सोसाइटी में शुक्रवार सुबह ऐसा दर्दनाक हादसा हुआ, जिसने पूरे परिवार को उजाड़ दिया। 23वीं मंजिल की बालकनी में पूजा के लिए फूल तोड़ते समय 11 वर्षीय बच्चा नीचे गिरने लगा। बेटे को बचाने के लिए पिता ने जैसे ही उसे पकड़ने की कोशिश की, उनका संतुलन भी बिगड़ गया। देखते ही देखते पिता और बेटा दोनों 23वीं मंजिल से नीचे क्लब की छत पर जा गिरे। इस हादसे में दोनों की मौके पर ही मौत हो गई।
मृतकों की पहचान 40 वर्षीय रणदीप पात्रा और उनके 11 वर्षीय बेटे आरव के रूप में हुई है। बताया गया है कि रणदीप और उनकी पत्नी अमृता श्रीमणि केंद्रीय सचिवालय, दिल्ली में सेक्शन ऑफिसर के पद पर कार्यरत थे। परिवार पिछले चार साल से महागुन मायवुड्स सोसाइटी के टावर-23 में रह रहा था। हादसे के बाद सोसाइटी में शोक का माहौल है। पत्नी ने अपने पति और इकलौते बेटे को खो दिया।
खाटू श्याम मंदिर जाने की थी तैयारी, सुबह चार बजे उठ गया था परिवार
पुलिस के अनुसार, परिवार को शुक्रवार को राजस्थान के सीकर स्थित खाटू श्याम मंदिर जाना था। इसके लिए सुबह करीब 10:30 बजे एक जमीन की रजिस्ट्री के सिलसिले में रजिस्ट्री कार्यालय पहुंचना भी निर्धारित था।
अमृता श्रीमणि के बयान के आधार पर पुलिस ने बताया कि दंपती सुबह करीब चार बजे उठ गए थे। इसके बाद रणदीप ने बेटे आरव को भी नींद से जगाया और उसे बालकनी में ले गए।
बालकनी में पूजा के लिए बेल पर लगे फूल तोड़ने की तैयारी की जा रही थी। फूल ऊंचाई पर होने के कारण वहां सीढ़ी लगाई गई थी। पुलिस की शुरुआती जांच के अनुसार, आरव सीढ़ी पर चढ़कर फूल तोड़ रहा था। इसी दौरान उसका एक पैर करीब साढ़े चार फीट ऊंची रेलिंग पर था।
सुबह बारिश होने के कारण बालकनी का फर्श और रेलिंग गीली थी। इसी बीच सीढ़ी असंतुलित हुई और आरव का पैर फिसल गया।

बेटे को गिरता देख बचाने दौड़े पिता, दोनों नीचे जा गिरे
पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक, आरव का संतुलन बिगड़ते ही वह 23वीं मंजिल से नीचे गिरने लगा। बेटे को गिरता देख रणदीप उसे बचाने के लिए तुरंत आगे बढ़े, लेकिन इस दौरान उनका अपना संतुलन भी बिगड़ गया।
इसके बाद पिता और बेटा दोनों सीधे नीचे क्लब की छत पर जा गिरे। हादसे के समय अमृता दूसरे कमरे में मंदिर जाने के लिए तैयार हो रही थीं।
घटना की जानकारी मिलते ही सोसाइटी में अफरा-तफरी मच गई। मौके पर पहुंचे लोगों ने पुलिस को सूचना दी। हालांकि, दोनों की जान नहीं बचाई जा सकी।
नोएडा के डीसीपी प्रवीण रंजन सिंह के अनुसार, मामले में आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस हादसे की परिस्थितियों की जांच कर रही है।

हाईराइज सोसाइटियों की बालकनी बनती जा रही जानलेवा
महागुन मायवुड्स सोसाइटी में हुआ यह हादसा एक बार फिर दिल्ली-एनसीआर की ऊंची इमारतों में बालकनी की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।
लाखों रुपये खर्च कर फ्लैट खरीदने वाले परिवारों के लिए बालकनी घर का ऐसा हिस्सा होती है, जहां लोग सुबह की चाय पीते हैं, पौधे लगाते हैं और बच्चों को खुली हवा में समय बिताने का मौका देते हैं। लेकिन सुरक्षा में छोटी सी चूक भी जानलेवा साबित हो सकती है।
एनसीआर की कई हाईराइज सोसाइटियों में पहले भी बच्चों और किशोरों के ऊंचाई से गिरने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। कहीं खेलते समय बच्चे का संतुलन बिगड़ा तो कहीं बालकनी में रखी कुर्सी पर चढ़ना हादसे की वजह बना।
लगातार सामने आ रही घटनाओं के बाद बालकनी की रेलिंग, खुले हिस्सों और गमलों की सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है।

ग्रेटर नोएडा और नोएडा में पहले भी हो चुके हैं दर्दनाक हादसे
हाईराइज सोसाइटियों में ऊंचाई से गिरने की घटनाएं लगातार चिंता का विषय बनी हुई हैं। पिछले कुछ वर्षों में सामने आए कुछ प्रमुख मामले इस प्रकार हैं:
21 मार्च 2026: गौड़ सिटी सातवां एवेन्यू
गौड़ सिटी के सातवें एवेन्यू में तीन वर्षीय बच्चे की 12वीं मंजिल से गिरकर मौत हो गई थी। बताया गया कि बालकनी में खेलते समय बच्चा संतुलन खो बैठा और नीचे गिर गया।
10 मार्च 2026: गौड़ सिटी-1
गौड़ सिटी-1 में तीन वर्षीय बच्चे की 12वीं मंजिल से गिरकर मौत हो गई थी। बताया गया कि बच्चा सोकर उठा और अभिभावक को तलाशते हुए बालकनी की ओर पहुंचा। वह एक कुर्सी को बालकनी तक ले गया और नीचे देखने के लिए उस पर चढ़ गया। इसी दौरान उसका संतुलन बिगड़ गया।
29 नवंबर 2024: पैरामाउंट इमोशंस, सेक्टर-114
सेक्टर-114 स्थित पैरामाउंट इमोशंस सोसाइटी में 14 वर्षीय छात्र की 14वीं मंजिल से गिरकर मौत हो गई थी। वह बालकनी में था और पैर फिसलने से नीचे गिर गया था।
17 जुलाई 2023: ऐस डिविनो
ऐस डिविनो सोसाइटी में 12 वर्षीय विराट गिरी की 18वीं मंजिल से गिरकर मौत हो गई थी। बताया गया कि बालकनी में खेलते समय मां को आवाज देने के दौरान उसका संतुलन बिगड़ गया और वह रेलिंग पार कर नीचे गिर गया।
23 अगस्त 2021: कासा ग्रींस-1
कासा ग्रींस-1 में एक वर्षीय बच्चे रिवान की 12वीं मंजिल से गिरकर मौत हो गई थी। उस समय घर में जन्मदिन की तैयारी चल रही थी। बच्चा फ्लैट के बाहर कॉमन एरिया में खेल रहा था और सीढ़ियों की ग्रिल के बीच से नीचे गिर गया था।
इन घटनाओं से स्पष्ट है कि ऊंची इमारतों में बच्चों की सुरक्षा के लिए केवल निगरानी ही नहीं, बल्कि बालकनी, खिड़कियों और कॉमन एरिया की संरचनात्मक सुरक्षा भी महत्वपूर्ण है।
हादसों के बाद सोसाइटियों में बालकनी पर लग रही ग्रिल
लगातार हो रही घटनाओं के बाद दिल्ली-एनसीआर की कई हाईराइज सोसाइटियों में निवासी बालकनी को सुरक्षित बनाने के लिए अतिरिक्त इंतजाम कर रहे हैं।
हाइड पार्क, अंतरिक्ष गोल्फ व्यू-1, अंतरिक्ष गोल्फ व्यू-2, प्रतीक विस्टेरिया, एसोटेक, लोटस बुलेवर्ड और प्रतीक लॉरेल सहित कई सोसाइटियों में बालकनियों के खुले हिस्सों पर लोहे की ग्रिल और अन्य सुरक्षा कवर लगाए जा रहे हैं।
कुछ परिवार बालकनी के खुले हिस्से को ग्रिल से घेर रहे हैं, जबकि कुछ अन्य तरह के सुरक्षा कवर लगवा रहे हैं। इसका उद्देश्य बच्चों को रेलिंग के पास पहुंचने या गलती से नीचे गिरने से बचाना है।
हालांकि, ऐसी ग्रिल और सुरक्षा कवर लगवाने से पहले संबंधित बिल्डिंग के नियमों, अग्नि सुरक्षा और निकासी व्यवस्था का ध्यान रखना भी जरूरी है। सुरक्षा के नाम पर ऐसा कोई बदलाव नहीं होना चाहिए जिससे आपातकालीन स्थिति में बाहर निकलने का रास्ता बाधित हो।
मनोचिकित्सक ने बच्चों से संवाद बनाए रखने पर दिया जोर
हाईराइज सोसाइटियों में होने वाली दुर्घटनाओं के साथ बच्चों और किशोरों की मानसिक सेहत को लेकर भी विशेषज्ञ लगातार जागरूकता पर जोर देते रहे हैं।
सेक्टर-12 स्थित क्लिनिक के मनोचिकित्सक डॉ. आरके बंसल के अनुसार, बच्चों और किशोरों के व्यवहार में बदलाव, भावनात्मक परेशानियों और मानसिक स्थिति पर ध्यान देना जरूरी है।
उनका कहना है कि बच्चों को केवल अनुशासन सिखाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके साथ नियमित संवाद बनाए रखना भी जरूरी है। पढ़ाई का दबाव, नौकरी की चिंता, पारिवारिक समस्याएं और बुजुर्गों में अकेलापन मानसिक परेशानियों को बढ़ा सकते हैं।
विशेषज्ञ के मुताबिक, परिवार में संवाद और भावनात्मक सहयोग की कमी कई समस्याओं को गंभीर बना सकती है। इसलिए बच्चों की बात सुनना, उनकी परेशानियों को समझना और जरूरत पड़ने पर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की मदद लेना महत्वपूर्ण है।
हालांकि, महागुन मायवुड्स की इस घटना में पुलिस की शुरुआती जांच दुर्घटना की ओर संकेत करती है। इसे आत्महत्या या किसी अन्य मानसिक स्वास्थ्य संबंधी कारण से जोड़ने का फिलहाल कोई पुष्ट आधार सामने नहीं आया है।
हाईराइज में रहने वाले परिवार इन बातों का रखें ध्यान
23वीं मंजिल से पिता-पुत्र के गिरने की घटना के बाद ऊंची इमारतों में रहने वाले परिवारों के लिए बालकनी की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।
- बच्चों को बालकनी में अकेला न छोड़ें।
- रेलिंग के पास कुर्सी, स्टूल, मेज या सीढ़ी जैसी चढ़ने योग्य वस्तुएं न रखें।
- बालकनी में गमले और भारी सामान रेलिंग के किनारे न रखें।
- बारिश के बाद फर्श और रेलिंग की स्थिति पर ध्यान दें।
- बालकनी की रेलिंग और सुरक्षा कवर की नियमित जांच कराएं।
- बच्चों को बालकनी की रेलिंग पर चढ़ने या उसके सहारे झुकने से रोकें।
- सुरक्षा ग्रिल लगवाते समय अग्नि सुरक्षा और आपातकालीन निकासी के नियमों का पालन करें।
एक हादसे ने फिर खड़े किए कई बड़े सवाल
महागुन मायवुड्स सोसाइटी में हुई इस घटना ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। जिस परिवार को शुक्रवार सुबह खाटू श्याम मंदिर जाना था, वहां कुछ ही पलों में मातम छा गया।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या हाईराइज सोसाइटियों में बालकनी की सुरक्षा को लेकर पर्याप्त सावधानी बरती जा रही है? क्या बच्चों की पहुंच से दूर सीढ़ियां, कुर्सियां और अन्य सामान रखने के नियमों का पालन हो रहा है? क्या सोसाइटी प्रबंधन और एओए की ओर से समय-समय पर सुरक्षा ऑडिट कराया जा रहा है?
यह हादसा एक गंभीर चेतावनी है कि ऊंची इमारतों में छोटी सी असावधानी भी पूरे परिवार की जिंदगी बदल सकती है। बालकनी की सुरक्षा, बच्चों की निगरानी और सोसाइटी प्रबंधन की जिम्मेदारी को अब और गंभीरता से लेने की जरूरत है।
