UP Election 2027: अखिलेश यादव का बड़ा दांव, BJP के पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप बेटी कीर्ति के साथ सपा में शामिल; बिथरी चैनपुर से मिला टिकट
- धर्मेंद्र कश्यप बेटी कीर्ति के साथ सपा में शामिल
- पार्टी में आते ही कीर्ति कश्यप को मिला बिथरी चैनपुर से टिकट
- कौन हैं कीर्ति कश्यप?
- धर्मेंद्र कश्यप का राजनीतिक सफर भी रहा है दिलचस्प
- ‘जहां सम्मान नहीं, वहां रहना नहीं’ – कीर्ति कश्यप
- क्या फरवरी में ही बन गए थे नए राजनीतिक समीकरणों के संकेत?
- बिथरी चैनपुर सीट पर सपा के फैसले के क्या हैं सियासी मायने?
- क्या आंवला सीट पर भी बदलेगी सपा की रणनीति?
- 2027 से पहले सपा की चुनावी तैयारी को मिला नया चेहरा
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले बरेली की राजनीति में बड़ा बदलाव हुआ है। आंवला से भाजपा के दो बार सांसद रह चुके धर्मेंद्र कश्यप अपनी बेटी कीर्ति कश्यप के साथ समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए हैं। 27 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने दोनों को पार्टी की सदस्यता दिलाई। इसके साथ ही कीर्ति कश्यप को बरेली की बिथरी चैनपुर विधानसभा सीट से प्रत्याशी घोषित कर दिया गया। पार्टी में शामिल होने के साथ ही टिकट मिलने के इस घटनाक्रम को रुहेलखंड की राजनीति में अहम माना जा रहा है।
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी बीच समाजवादी पार्टी ने बरेली में अपनी रणनीति के तहत एक बड़ा कदम उठाया है। भाजपा के पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप का सपा में आना और उनकी बेटी कीर्ति कश्यप को बिथरी चैनपुर से उम्मीदवार घोषित करना चर्चा का विषय बन गया है।
इस घटनाक्रम से न केवल बिथरी चैनपुर, बल्कि आंवला और आसपास की विधानसभा सीटों के राजनीतिक समीकरणों पर भी चर्चा शुरू हो गई है। आइए जानते हैं कौन हैं कीर्ति कश्यप, क्या रहा है उनके पिता धर्मेंद्र कश्यप का राजनीतिक सफर और सपा के इस फैसले के पीछे क्या मायने निकाले जा रहे हैं।
धर्मेंद्र कश्यप बेटी कीर्ति के साथ सपा में शामिल
आंवला लोकसभा सीट से भाजपा के पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने 27 अक्टूबर 2026 को लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी मुख्यालय में पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इस दौरान उनकी बेटी कीर्ति कश्यप भी उनके साथ मौजूद रहीं। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने दोनों का पार्टी में स्वागत किया।
धर्मेंद्र कश्यप के साथ बरेली और बदायूं क्षेत्र के कुछ अन्य नेता और समर्थक भी समाजवादी पार्टी में शामिल हुए। इस घटनाक्रम को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले बरेली मंडल में सपा की राजनीतिक रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पार्टी में आते ही कीर्ति कश्यप को मिला बिथरी चैनपुर से टिकट
इस घटनाक्रम की सबसे खास बात यह रही कि धर्मेंद्र कश्यप और उनकी बेटी के सपा में शामिल होने के साथ ही अखिलेश यादव ने कीर्ति कश्यप को बरेली की बिथरी चैनपुर विधानसभा सीट से प्रत्याशी घोषित कर दिया।
यानी पार्टी में शामिल होने के कुछ ही समय बाद कीर्ति को आगामी विधानसभा चुनाव के लिए बड़ी जिम्मेदारी मिल गई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सपा ने 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए उन्हें अपना दूसरा घोषित उम्मीदवार बनाया है। इससे पहले पार्टी अयोध्या सीट से पवन पांडे के नाम का ऐलान कर चुकी है।
कौन हैं कीर्ति कश्यप?
कीर्ति कश्यप भाजपा के पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप की बेटी हैं। वह अपने पिता के राजनीतिक क्षेत्र आंवला और बरेली के आसपास के इलाकों में सक्रिय रही हैं।
उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वह जनसंपर्क और सामाजिक गतिविधियों में हिस्सा लेती रही हैं। महिलाओं से जुड़े कार्यक्रमों और ग्रामीण क्षेत्रों में जनसमस्याओं को लेकर उनकी सक्रियता का भी उल्लेख किया गया है।
हालांकि, कीर्ति कश्यप के अब तक के स्वतंत्र चुनावी अनुभव या किसी निर्वाचित पद पर रहने की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक रिपोर्ट्स में स्पष्ट नहीं है। बिथरी चैनपुर से प्रत्याशी घोषित होने के बाद यह उनका विधानसभा चुनावी राजनीति में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
धर्मेंद्र कश्यप का राजनीतिक सफर भी रहा है दिलचस्प
धर्मेंद्र कश्यप रुहेलखंड क्षेत्र के जाने-पहचाने राजनीतिक चेहरों में शामिल रहे हैं। उनका राजनीतिक सफर बहुजन समाज पार्टी से शुरू हुआ था। वर्ष 2002 में वह विधायक बने और 2007 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर दोबारा विधानसभा पहुंचे।
इसके बाद वर्ष 2013 में वह भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा के टिकट पर उन्होंने 2014 और 2019 में आंवला लोकसभा सीट से जीत दर्ज की और लगातार दो बार सांसद रहे।
हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी नीरज मौर्य से हार का सामना करना पड़ा। अब भाजपा छोड़कर सपा में उनकी वापसी ने बरेली और आसपास के क्षेत्र में राजनीतिक चर्चाओं को फिर तेज कर दिया है।
‘जहां सम्मान नहीं, वहां रहना नहीं’ – कीर्ति कश्यप
पार्टी बदलने के फैसले को लेकर कीर्ति कश्यप ने सम्मान को अहम वजह बताया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आलोचकों के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, ‘कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना… जहां सम्मान नहीं, वहां रहना नहीं।’
उनके इस बयान को भाजपा छोड़ने के फैसले के संदर्भ में देखा जा रहा है। वहीं, धर्मेंद्र कश्यप ने भी भाजपा से अलग होने के बाद पिछड़े और अति पिछड़े वर्गों को पर्याप्त सम्मान नहीं मिलने का मुद्दा उठाया था। उन्होंने प्रदेश में कश्यप समाज की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर भी सवाल किए थे। ये उनके अपने राजनीतिक आरोप और विचार हैं।
क्या फरवरी में ही बन गए थे नए राजनीतिक समीकरणों के संकेत?
कीर्ति कश्यप की शादी और प्रीतिभोज समारोह को लेकर भी राजनीतिक चर्चा हो रही है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फरवरी 2026 में हुए इस समारोह में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और वरिष्ठ नेता शिवपाल यादव शामिल हुए थे।
उस समय धर्मेंद्र कश्यप भाजपा में थे। ऐसे में सपा के शीर्ष नेताओं की मौजूदगी को अब उनके परिवार के राजनीतिक बदलाव के संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि, किसी समारोह में नेताओं की मौजूदगी अपने आप में पार्टी बदलने के फैसले का प्रमाण नहीं होती।
बिथरी चैनपुर सीट पर सपा के फैसले के क्या हैं सियासी मायने?
बरेली की बिथरी चैनपुर विधानसभा सीट पर कीर्ति कश्यप को उम्मीदवार बनाकर सपा ने स्थानीय राजनीति में एक नया चेहरा उतारा है। उनके पिता धर्मेंद्र कश्यप का आंवला और आसपास के क्षेत्रों में राजनीतिक अनुभव तथा संपर्क पार्टी के लिए उपयोगी हो सकते हैं।
राजनीतिक विश्लेषण के लिहाज से इस फैसले के कुछ संभावित मायने हैं:
- स्थानीय राजनीतिक पहचान: धर्मेंद्र कश्यप के लंबे राजनीतिक अनुभव का लाभ बेटी कीर्ति को मिल सकता है।
- सामाजिक समीकरण: कश्यप और अन्य पिछड़े वर्गों के मतदाताओं तक पहुंच बनाने की सपा की कोशिश के रूप में इसे देखा जा सकता है।
- नए चेहरे को मौका: पार्टी ने बिथरी चैनपुर से कीर्ति कश्यप को आगे करके स्थानीय स्तर पर नई दावेदारी पेश की है।
- आसपास की सीटों पर चर्चा: धर्मेंद्र कश्यप के सपा में आने से आंवला और बरेली मंडल की दूसरी सीटों पर भी राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो सकती हैं।
हालांकि, किसी नेता के पार्टी बदलने से उसके समर्थकों के वोट स्वतः दूसरी पार्टी को मिल जाएंगे, ऐसा मानना सही नहीं होगा। इसका वास्तविक असर आगामी विधानसभा चुनाव के दौरान ही स्पष्ट होगा।
क्या आंवला सीट पर भी बदलेगी सपा की रणनीति?
धर्मेंद्र कश्यप के सपा में शामिल होने के बाद आंवला विधानसभा सीट को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पार्टी ने इस सीट पर अभी अंतिम प्रत्याशी घोषित नहीं किया है। ऐसे में बिथरी चैनपुर के बाद आंवला में सपा किसे जिम्मेदारी देती है, इस पर भी राजनीतिक नजरें रहेंगी।
2027 से पहले सपा की चुनावी तैयारी को मिला नया चेहरा
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले समाजवादी पार्टी की ओर से कीर्ति कश्यप को बिथरी चैनपुर से प्रत्याशी घोषित करना बरेली की राजनीति का अहम घटनाक्रम है। भाजपा के पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप का बेटी के साथ सपा में आना और तत्काल उम्मीदवार की घोषणा करना पार्टी की चुनावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि कीर्ति कश्यप बिथरी चैनपुर में अपनी राजनीतिक जमीन कितनी मजबूत कर पाती हैं और धर्मेंद्र कश्यप का अनुभव उनके चुनावी अभियान में कितना मददगार साबित होता है। फिलहाल इतना तय है कि इस घटनाक्रम ने 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बरेली की सियासत में नई चर्चा शुरू कर दी है।
