Agra News: आगरा विकास प्राधिकरण (ADA) की अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई एक बार फिर सवालों के घेरे में है। शहर में कहीं सील किए गए कॉम्प्लेक्स में दोबारा निर्माण शुरू होने की शिकायत सामने आ रही है तो कहीं नोटिस और चेतावनी के बावजूद निर्माण पर प्रभावी रोक नहीं लग पा रही है। सुरेश नगर में जून में सील किए गए कॉम्प्लेक्स की पांचवीं मंजिल पर दोबारा निर्माण शुरू होने का आरोप है। वहीं, ताज की मंडी के पुनिया पाड़ा में अनूप अग्रवाल से संबंधित निर्माण को लेकर दिसंबर 2025 और फरवरी 2026 में नोटिस जारी किए जाने के बावजूद कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं। इन दोनों मामलों ने एडीए के प्रवर्तन अनुभाग की निगरानी व्यवस्था और अधिकारियों की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
- Agra News: सीलिंग और नोटिस के बाद भी कैसे जारी है अवैध निर्माण?
- सुरेश नगर में सील कॉम्प्लेक्स की पांचवीं मंजिल पर दोबारा निर्माण की शिकायत
- ताज की मंडी के पुनिया पाड़ा में नोटिस के बाद भी निर्माण पर सवाल
- पीछे बने मकानों को भी नोटिस, फ्लैट्स की सीलिंग की तैयारी
- एडीए के प्रवर्तन विभाग की जवाबदेही पर उठे सवाल
- आम नागरिक नियमों का पालन करें और अवैध निर्माण पर कार्रवाई का इंतजार?
- नोटिस और सीलिंग से आगे बढ़कर कार्रवाई कब करेगा एडीए?
Agra News: सीलिंग और नोटिस के बाद भी कैसे जारी है अवैध निर्माण?
आगरा। शहर में अवैध निर्माण पर अंकुश लगाने के लिए आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) लगातार कार्रवाई करने के दावे करता है, लेकिन जमीनी स्तर पर सामने आ रहे मामले इन दावों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर रहे हैं। कहीं एडीए की ओर से लगाई गई सील के बावजूद दोबारा निर्माण शुरू होने की शिकायत है तो कहीं नोटिस जारी होने के बाद भी निर्माण कार्य नहीं रुकने का मामला सामने आया है।
सुरेश नगर और ताज की मंडी के पुनिया पाड़ा से जुड़े इन दोनों मामलों ने प्राधिकरण के प्रवर्तन विभाग की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। सवाल यह है कि जब एडीए को अवैध निर्माण की जानकारी होती है, नोटिस जारी किए जाते हैं और भवन सील तक कर दिए जाते हैं, तो फिर निर्माण कार्य दोबारा कैसे शुरू हो जाता है?
सुरेश नगर में सील कॉम्प्लेक्स की पांचवीं मंजिल पर दोबारा निर्माण की शिकायत
ताजा मामला आगरा के सुरेश नगर का है। यहां बिना स्वीकृत मानचित्र के निर्माण कराए जाने के आरोप में एडीए के प्रवर्तन दल ने जून में एक कॉम्प्लेक्स को सील किया था। उस समय कार्रवाई के बाद उम्मीद जताई गई थी कि भवन में चल रहा अवैध निर्माण पूरी तरह रुक जाएगा।
लेकिन अब इसी सील किए गए कॉम्प्लेक्स की पांचवीं मंजिल पर दोबारा निर्माण कार्य शुरू होने की शिकायत सामने आई है। इस मामले को लेकर सुरेश नगर रेजिडेंशियल सोसायटी ने एडीए उपाध्यक्ष से शिकायत की है और अवैध निर्माण पर तत्काल रोक लगाने की मांग उठाई है।
शिकायत में सील किए गए परिसर में दोबारा निर्माण शुरू होने के मामले की जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।
सील लगाने के बाद निगरानी क्यों नहीं हुई?
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल एडीए की निगरानी व्यवस्था को लेकर है। जब जून में भवन को सील किया गया था, तो उसके बाद यह सुनिश्चित करना किसकी जिम्मेदारी थी कि परिसर में किसी तरह का निर्माण दोबारा शुरू न हो?
- क्या सीलिंग के बाद प्रवर्तन विभाग ने दोबारा निरीक्षण किया?
- क्या संबंधित भवन की नियमित निगरानी की गई?
- यदि सील तोड़कर या आदेशों की अनदेखी कर निर्माण शुरू किया गया है तो इसकी जानकारी विभाग को कब मिली?
- शिकायत सामने आने से पहले संबंधित अधिकारियों ने क्या कार्रवाई की?
इन सवालों के जवाब अब एडीए की जांच और आगे होने वाली कार्रवाई से ही स्पष्ट हो सकेंगे। सोसायटी की शिकायत के बाद प्राधिकरण की ओर से जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है।
ताज की मंडी के पुनिया पाड़ा में नोटिस के बाद भी निर्माण पर सवाल
अवैध निर्माण से जुड़ा दूसरा मामला लोहामंडी वार्ड के ताज की मंडी स्थित पुनिया पाड़ा का है। यहां अनूप अग्रवाल से संबंधित निर्माण को लेकर एडीए के प्रवर्तन अनुभाग ने नोटिस जारी किए थे।
प्राधिकरण के दस्तावेजों के अनुसार, 26 दिसंबर 2025 को सीलिंग से पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। इसके बाद 12 फरवरी 2026 को दूसरा पत्र जारी किया गया।
इस पत्र में स्पष्ट किया गया था कि निर्माण की स्वीकृति के संबंध में संबंधित व्यक्ति की ओर से न तो कोई जवाब प्रस्तुत किया गया है और न ही स्वीकृत मानचित्र उपलब्ध कराया गया है।
एडीए ने इस पत्र के माध्यम से निर्माण कार्य तत्काल बंद करने और परिसर खाली करने के निर्देश दिए थे। साथ ही तीन दिन के भीतर सूचना देने को कहा गया था। चेतावनी दी गई थी कि आदेशों का पालन नहीं होने की स्थिति में प्राधिकरण परिसर को सील करने की कार्रवाई करेगा।
इसके बावजूद निर्माण को लेकर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के सवाल उठ रहे हैं। सवाल यह है कि जब प्राधिकरण को निर्माण की जानकारी थी और स्वीकृत मानचित्र भी प्रस्तुत नहीं किया गया था, तो समय रहते निर्माण पर रोक क्यों नहीं लगाई गई?
पीछे बने मकानों को भी नोटिस, फ्लैट्स की सीलिंग की तैयारी
पुनिया पाड़ा के मामले में क्षेत्रीय अधिकारी का कहना है कि पिछले सप्ताह ही नोटिस जारी किया गया है और अब इसके बाद कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारी के मुताबिक, संबंधित संपत्ति के पीछे की ओर बनाए जा रहे अन्य मकानों को भी नोटिस जारी किए गए हैं।
वहीं, एडीए के एक अधिकारी का कहना है कि फ्लैट्स के संबंध में पहले ही सीलिंग के नोटिस जारी किए जा चुके हैं। अब सीलिंग की कार्रवाई की जानी है। नोटिस में निर्धारित समयसीमा बुधवार को पूरी हो रही है। इसके बाद प्राधिकरण की ओर से अगली कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि, अब देखना यह होगा कि निर्धारित समयसीमा पूरी होने के बाद एडीए वास्तव में सीलिंग की कार्रवाई करता है या मामला एक बार फिर नोटिस और आश्वासन तक सीमित रह जाता है।
एडीए के प्रवर्तन विभाग की जवाबदेही पर उठे सवाल
सुरेश नगर और ताज की मंडी के दोनों मामलों में सबसे महत्वपूर्ण सवाल एडीए के प्रवर्तन विभाग की जवाबदेही का है।
सुरेश नगर में सील किए गए भवन में दोबारा निर्माण शुरू होने की शिकायत है, जबकि पुनिया पाड़ा में नोटिस और चेतावनी जारी होने के बाद भी निर्माण पर प्रभावी रोक लगाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
यदि कोई व्यक्ति बिना स्वीकृत मानचित्र के निर्माण कराता है तो शुरुआती स्तर पर ही कार्रवाई क्यों नहीं होती? सीलिंग के बाद भी निर्माण शुरू होने की शिकायत सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब क्यों नहीं मांगा जाता? नोटिस जारी करने के बाद उसके पालन की निगरानी कौन करता है?
ये ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब केवल संबंधित भवन मालिकों से नहीं, बल्कि प्राधिकरण के जिम्मेदार अधिकारियों से भी मांगा जाना चाहिए।
आम नागरिक नियमों का पालन करें और अवैध निर्माण पर कार्रवाई का इंतजार?
आगरा में आम नागरिकों को भवन निर्माण के लिए नक्शा स्वीकृत कराने और प्राधिकरण के निर्धारित नियमों का पालन करने की जरूरत होती है। इसके लिए लोगों को एडीए की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।
ऐसे में यदि शहर में बिना स्वीकृत मानचित्र के निर्माण होने, नोटिस की अनदेखी करने और सीलिंग के बाद भी दोबारा निर्माण शुरू होने की शिकायतें सामने आती हैं, तो इससे विभागीय व्यवस्था की निष्पक्षता और प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
नियमों का पालन करने वाले नागरिकों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर अवैध निर्माण के मामलों में कार्रवाई का पैमाना क्या है और नोटिस जारी होने के बाद निर्माण रोकने की जिम्मेदारी किसकी है?
नोटिस और सीलिंग से आगे बढ़कर कार्रवाई कब करेगा एडीए?
एडीए की जिम्मेदारी केवल नोटिस जारी करने या किसी भवन पर सील लगाने तक सीमित नहीं है। प्राधिकरण का उद्देश्य अवैध निर्माण को रोकना और भवन निर्माण के नियमों का पालन सुनिश्चित कराना भी है।
यदि सीलिंग के बावजूद किसी भवन में दोबारा निर्माण शुरू होने की शिकायत आती है तो यह संबंधित भवन मालिक की ओर से नियमों की अनदेखी के साथ-साथ निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता का भी गंभीर मामला बन जाता है।
अब निगाहें एडीए की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। देखना होगा कि सुरेश नगर के सील कॉम्प्लेक्स में दोबारा निर्माण की शिकायत पर प्राधिकरण क्या कदम उठाता है और ताज की मंडी के पुनिया पाड़ा में जारी नोटिस के बाद सीलिंग की कार्रवाई कितनी प्रभावी होती है।
इसके साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि यदि जांच में विभागीय लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी या फिर अवैध निर्माण के ये मामले भी नोटिस, आश्वासन और कार्रवाई के इंतजार में ही उलझकर रह जाएंगे।
फिलहाल आगरा में दो मामलों ने एडीए की प्रवर्तन व्यवस्था के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—जब सील और नोटिस के बाद भी निर्माण नहीं रुक रहा, तो आखिर अवैध निर्माण पर प्रभावी रोक कब लगेगी?
