आगरा के धाकरान में नजूल भूमि पर कथित फर्जी दस्तावेजों से व्यावसायिक नक्शा पास कराने के मामले में चार लोगों पर FIR दर्ज हुई। ADA ने नक्शा निरस्त कर निर्माण पर नोटिस जारी किया।
- नजूल विभाग ने NOC देने से किया इनकार, फिर कैसे पास हुआ नक्शा?
- 4 जनवरी 2025 का पत्र बना जांच की अहम कड़ी
- गुड़ की मंडी के बाद धाकरान का मामला, ADA की कार्यप्रणाली पर सवाल
- अधिकारियों और कथित दलालों की भूमिका भी जांच के दायरे में
- ADA ने निरस्त किया व्यावसायिक नक्शा, निर्माण पर भी जारी हुआ नोटिस
- अब जांच से खुलेंगे कई अहम सवाल
आगरा। सरकारी जमीन पर निर्माण की अनुमति किस आधार पर दी गई और नक्शा स्वीकृत करने से पहले दस्तावेजों की जांच किस स्तर पर हुई? आगरा विकास प्राधिकरण (ADA) में नजूल भूमि से जुड़े मामलों ने इन सवालों को फिर चर्चा में ला दिया है। गुड़ की मंडी प्रकरण के बाद अब धाकरान की नजूल भूमि पर व्यावसायिक मानचित्र स्वीकृत कराने के मामले में भी एफआईआर दर्ज हुई है।
धाकरान प्रकरण में एडीए के सहायक अभियंता रमन कुमार की तहरीर पर चार लोगों के खिलाफ लोहामंडी थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है। नामजद आरोपियों में अजय महाजन, प्रमोद कुमार गुप्ता, संजीव कुमारी गुप्ता और इंजीनियर बनवारी सिंह शामिल हैं। आरोप है कि नजूल विभाग की एनओसी नहीं मिलने के बावजूद कथित फर्जी आख्या और दस्तावेजों के आधार पर व्यावसायिक मानचित्र स्वीकृत करा लिया गया।
मामले में अब सिर्फ कथित फर्जी दस्तावेजों की ही नहीं, बल्कि नक्शा स्वीकृति की पूरी प्रक्रिया और संबंधित लोगों की भूमिका की भी जांच महत्वपूर्ण हो गई है।
नजूल विभाग ने NOC देने से किया इनकार, फिर कैसे पास हुआ नक्शा?
विवादित भूमि सर्वे शीट नंबर 107, मौजा चक अब्बल में दर्ज बताई गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस जमीन के संबंध में नजूल विभाग ने एनओसी देने से इनकार किया था। इसके बावजूद यहां व्यावसायिक निर्माण के लिए मानचित्र स्वीकृत होने का मामला सामने आया।
आरोप है कि नजूल विभाग की आपत्ति के बावजूद कथित तौर पर ऐसे दस्तावेजों और आख्या का इस्तेमाल किया गया, जिनके आधार पर नक्शे को मंजूरी मिल गई।
अब जांच में यह पता लगाना अहम होगा कि नजूल विभाग की आपत्ति के बावजूद मानचित्र स्वीकृति की प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ी और संबंधित दस्तावेजों की प्रमाणिकता की जांच किस स्तर पर की गई।
4 जनवरी 2025 का पत्र बना जांच की अहम कड़ी
धाकरान मामले में 4 जनवरी 2025 का एक कथित आपत्ति पत्र भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आरोप है कि इस पत्र को एडीए के OBPAS पोर्टल पर अपलोड किया गया था।
हालांकि, नजूल विभाग ने कथित तौर पर इस पत्र को अपने कार्यालय से जारी होने से इनकार किया है। इसके बाद पत्र की प्रमाणिकता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
अब पुलिस जांच में इन बिंदुओं पर पड़ताल हो सकती है:
- कथित आपत्ति पत्र किसने तैयार किया?
- पत्र को OBPAS पोर्टल पर किसने अपलोड किया?
- नजूल विभाग के नाम से जारी बताए जा रहे पत्र की सत्यता की जांच हुई थी या नहीं?
- दस्तावेजों के आधार पर व्यावसायिक नक्शे को स्वीकृति किस प्रक्रिया के तहत मिली?
इन सवालों के जवाब से यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कैसे हुआ और इसमें किन लोगों की भूमिका रही।
गुड़ की मंडी के बाद धाकरान का मामला, ADA की कार्यप्रणाली पर सवाल
गुड़ की मंडी प्रकरण में पहले से मुकदमा दर्ज होने के बाद धाकरान का मामला सामने आने से नजूल भूमि पर निर्माण और नक्शा स्वीकृति की प्रक्रिया को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
दोनों मामलों में सरकारी जमीन और निर्माण संबंधी अनुमतियों का पहलू महत्वपूर्ण है। ऐसे में यह जांचना जरूरी होगा कि कहीं दोनों प्रकरणों में दस्तावेजों की जांच और नक्शा स्वीकृति के दौरान एक जैसी अनियमितताएं तो नहीं हुईं।
हालांकि, दोनों मामलों के बीच किसी संगठित कार्यप्रणाली या आपसी संबंध की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
अधिकारियों और कथित दलालों की भूमिका भी जांच के दायरे में
धाकरान प्रकरण में अब नक्शा स्वीकृति की प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। जांच के लिहाज से यह महत्वपूर्ण होगा कि आवेदन से लेकर मानचित्र स्वीकृत होने तक किन-किन स्तरों पर फाइल आगे बढ़ी और किस अधिकारी ने दस्तावेजों का सत्यापन किया।
सूत्रों के हवाले से कुछ कथित दलालों की भूमिका की भी जांच की चर्चा है। हालांकि, अभी इस संबंध में किसी अतिरिक्त व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई या आरोपों की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
यदि जांच में दस्तावेजों की कथित हेराफेरी या किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो मामले में आगे कार्रवाई हो सकती है।
ADA ने निरस्त किया व्यावसायिक नक्शा, निर्माण पर भी जारी हुआ नोटिस
मामले में एडीए ने विवादित व्यावसायिक मानचित्र निरस्त कर दिया है। इसके साथ ही निर्माण के संबंध में नोटिस भी जारी किया गया है।
प्राधिकरण के सचिव के निर्देश पर सहायक अभियंता रमन कुमार की तहरीर के आधार पर लोहामंडी थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया। अब पुलिस की जांच में कथित फर्जी पत्र, दस्तावेजों की प्रमाणिकता और मानचित्र स्वीकृति की पूरी प्रक्रिया की पड़ताल की जाएगी।
अब जांच से खुलेंगे कई अहम सवाल
धाकरान प्रकरण में एफआईआर दर्ज होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि नजूल विभाग की एनओसी के बिना व्यावसायिक नक्शा किस आधार पर स्वीकृत हुआ। कथित आपत्ति पत्र की सच्चाई क्या है और दस्तावेजों की जांच में कहां चूक हुई, यह भी जांच का अहम हिस्सा होगा।
फिलहाल चार लोग नामजद हैं और मामले की जांच जारी है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों या अन्य व्यक्तियों की जिम्मेदारी तय हो सकेगी।
