यूपी 68,500 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों ने लखनऊ में SCERT कार्यालय का घेराव किया। 70 दिनों से आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों ने आरक्षण विसंगतियां दूर कर नियुक्ति देने की मांग की।
- 2018 में शुरू हुई थी भर्ती, आठ साल बाद भी नहीं मिली नौकरी
- बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह और गुलाब देवी के सामने भी उठाया था मामला
- आरक्षण में गड़बड़ी का आरोप, आयोगों के आदेश लागू करने की मांग
- 70 दिनों से जारी है आंदोलन, अब नियुक्ति के बिना पीछे हटने को तैयार नहीं अभ्यर्थी
- सरकार के सामने फिर खड़ा हुआ 68,500 शिक्षक भर्ती का सवाल
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों का इंतजार आठ साल बाद भी खत्म नहीं हुआ है। नौकरी की मांग को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहे अभ्यर्थियों का आंदोलन अब तेज हो गया है। बुधवार को 70 दिनों से प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने राजधानी लखनऊ के निशातगंज स्थित राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) कार्यालय का घेराव किया।
इस दौरान बड़ी संख्या में अभ्यर्थी कार्यालय परिसर में जमीन पर बैठ गए और नारेबाजी करते हुए अपनी मांगें उठाईं। प्रदर्शनकारियों ने वर्ष 2018 में हुई 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती में आरक्षण संबंधी अनियमितताओं का आरोप लगाया। उनका कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में हुई विसंगतियों को दूर करने के लिए राज्य और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के निर्देशों का पालन किया जाए और पात्र अभ्यर्थियों को जल्द नियुक्ति दी जाए।
2018 में शुरू हुई थी भर्ती, आठ साल बाद भी नहीं मिली नौकरी
प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों के मुताबिक, 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया वर्ष 2018 में शुरू हुई थी। उस समय हजारों युवाओं ने शिक्षक बनने की उम्मीद में आवेदन किया था। लेकिन भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण संबंधी गड़बड़ियों के चलते कई अभ्यर्थियों को अब तक नियुक्ति नहीं मिल सकी है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती को आठ साल बीत चुके हैं, लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ। इस दौरान वे लगातार सरकार और संबंधित विभागों के अधिकारियों से न्याय की गुहार लगा रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों का दावा है कि वे मुख्यमंत्री, मंत्रियों, विधायकों और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष तक अपनी मांग पहुंचा चुके हैं। इसके बावजूद उन्हें अब तक कोई ठोस आश्वासन या समाधान नहीं मिला है।
बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह और गुलाब देवी के सामने भी उठाया था मामला
प्रदर्शनकारी नवीन ने बताया कि 10 सितंबर को अभ्यर्थियों की मुलाकात बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह और माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी से हुई थी। इस बैठक में दोनों विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।
नवीन के अनुसार, बैठक के दौरान अभ्यर्थियों ने भर्ती में आरक्षण संबंधी गड़बड़ियों का मुद्दा विस्तार से उठाया था। उनका दावा है कि बातचीत के दौरान मंत्रियों और अधिकारियों ने भी भर्ती में गड़बड़ी होने की बात स्वीकार की थी।
अभ्यर्थियों का सवाल है कि जब राज्य और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग भी आरक्षण संबंधी विसंगतियों को लेकर निर्देश दे चुके हैं, तो फिर अब तक नियुक्ति प्रक्रिया पूरी क्यों नहीं की गई?
उनका कहना है कि सरकार को आयोगों के आदेशों का पालन करते हुए भर्ती की विसंगतियों को दूर करना चाहिए, ताकि लंबे समय से नियुक्ति का इंतजार कर रहे युवाओं को न्याय मिल सके।
आरक्षण में गड़बड़ी का आरोप, आयोगों के आदेश लागू करने की मांग
प्रदर्शनकारी तूफान सिंह ने आरोप लगाया कि 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती में बड़े स्तर पर आरक्षण संबंधी अनियमितताएं हुई हैं। उनके मुताबिक, राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने भी इस मामले में नियमों के अनुरूप कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
अभ्यर्थियों का कहना है कि आरक्षण व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों के कारण उनके साथ अन्याय हुआ है। इसलिए सरकार को आयोगों के आदेशों के अनुसार भर्ती प्रक्रिया की समीक्षा करनी चाहिए और सभी विसंगतियों को दूर कर पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति देनी चाहिए।
70 दिनों से जारी है आंदोलन, अब नियुक्ति के बिना पीछे हटने को तैयार नहीं अभ्यर्थी
68,500 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों का कहना है कि वे पिछले 70 दिनों से लगातार आंदोलन कर रहे हैं। कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के सामने अपनी बात रखने के बावजूद उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ।
अभ्यर्थियों के मुताबिक, आठ साल का लंबा इंतजार उनके परिवारों और भविष्य पर भी भारी पड़ रहा है। शिक्षक बनने की उम्मीद में उन्होंने वर्षों तक तैयारी और कानूनी-प्रशासनिक संघर्ष किया, लेकिन अभी तक नियुक्ति का रास्ता साफ नहीं हो पाया है।
प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि जब तक भर्ती में आरक्षण संबंधी विसंगतियां दूर कर उन्हें नियुक्ति देने पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
सरकार के सामने फिर खड़ा हुआ 68,500 शिक्षक भर्ती का सवाल
एससीईआरटी कार्यालय के घेराव के बाद 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। अभ्यर्थियों की मुख्य मांग है कि सरकार आयोगों के निर्देशों को लागू करे और वर्ष 2018 की भर्ती से जुड़ी आरक्षण विसंगतियों का समाधान निकाले।
अब देखना होगा कि आठ साल से नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे इन अभ्यर्थियों को सरकार से कब राहत मिलती है और उनका शिक्षक बनने का सपना कब पूरा होता है।
