धनतेरस 2026 से पहले चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट। 30 दिनों में करीब 40 हजार रुपये प्रति किलो सस्ती हुई चांदी। जानिए सोने-चांदी के ताजा भाव और बाजार में गिरावट की वजह।
- 30 दिनों में 40 हजार रुपये तक सस्ती हुई चांदी
- सोने की कीमतों में भी आई गिरावट
- मुनाफावसूली और वैश्विक समीकरण बने कीमतों में गिरावट की वजह
- धनतेरस से पहले एक साल के निचले स्तर पर पहुंची चांदी
- पिछले साल धनतेरस से पहले तेजी, इस बार गिरावट
- शादी वाले घरों में हो रही खरीदारी, निवेशक कर रहे इंतजार
- पांच साल में दीपावली के आसपास कितने बदले चांदी के भाव?
- क्या चांदी फिर छुएगी नई ऊंचाई?
धनतेरस और दीपावली पर सोना-चांदी खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए सराफा बाजार से बड़ी खबर है। धनतेरस से ठीक पहले चांदी की कीमतों में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। पिछले करीब 30 दिनों में चांदी लगभग 40 हजार रुपये प्रति किलोग्राम तक सस्ती हो गई है। कभी चार लाख रुपये प्रति किलोग्राम का स्तर छूने वाली चांदी अब गिरकर करीब 1.81 लाख से 1.91 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गई है। कीमतों में इस गिरावट से जहां खरीदारों को राहत मिली है, वहीं निवेशकों की निगाहें अब चांदी के अगले रुख पर टिकी हैं।
चार नवंबर 2026 को चांदी का भाव करीब 1.81 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया था। वहीं धनतेरस से दो दिन पहले बाजार में इसके भाव करीब 1.91 लाख रुपये प्रति किलोग्राम बताए जा रहे हैं। सराफा कारोबारियों के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों में चांदी की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। ऐसे में त्योहारों के सीजन में खरीदारी करने वाले ग्राहकों को कीमतों में गिरावट का फायदा मिल सकता है।
30 दिनों में 40 हजार रुपये तक सस्ती हुई चांदी
सराफा बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, करीब 30 दिन पहले चांदी का भाव 2.32 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास था। इसके बाद से कीमतों में लगातार गिरावट का दौर देखने को मिला। चार नवंबर को चांदी का भाव करीब 1.81 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया।
इस गिरावट ने निवेशकों और आम खरीदारों दोनों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। खासकर धनतेरस पर चांदी के सिक्के, बर्तन, आभूषण और अन्य सामान खरीदने की योजना बना रहे लोग बाजार के भाव पर नजर बनाए हुए हैं।
सोने की कीमतों में भी आई गिरावट
चांदी के साथ सोने की कीमतों में भी नरमी देखने को मिली है। उपलब्ध बाजार आंकड़ों के अनुसार, पांच अक्टूबर 2026 को सोने का भाव करीब 1.53 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम था, जो चार नवंबर को घटकर लगभग 1.46 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया।
सोने और चांदी दोनों की कीमतों में गिरावट से उन लोगों को राहत मिली है, जो धनतेरस और शादी-ब्याह के लिए खरीदारी करने की तैयारी कर रहे हैं। कई ग्राहक रोजाना थोड़ी-थोड़ी खरीदारी कर रहे हैं, ताकि कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच अपने बजट के अनुसार खरीदारी कर सकें।
मुनाफावसूली और वैश्विक समीकरण बने कीमतों में गिरावट की वजह
सराफा कारोबारियों के मुताबिक, सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट के पीछे मुनाफावसूली एक प्रमुख कारण है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार के समीकरण भी कीमती धातुओं के भाव को प्रभावित कर रहे हैं।
जब निवेशक ऊंचे स्तर पर पहुंची कीमतों के बाद मुनाफा निकालते हैं तो बाजार में बिकवाली बढ़ जाती है। इसका असर सोने और चांदी की कीमतों पर पड़ता है। वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग-आपूर्ति के बदलाव भी कीमतों में उतार-चढ़ाव की वजह बन रहे हैं।
इंडियन बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन के नॉर्थ हेड अनुराग रस्तोगी के मुताबिक, सोने और चांदी में लंबी अवधि के नजरिए से निवेश करने वालों के लिए मौजूदा कीमतें महत्वपूर्ण हो सकती हैं। समझदार निवेशक अपने बजट के अनुसार खरीदारी कर रहे हैं। हालांकि, कीमती धातुओं में निवेश करते समय बाजार के उतार-चढ़ाव और जोखिम को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
धनतेरस से पहले एक साल के निचले स्तर पर पहुंची चांदी
चौक सराफा एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष आदिश जैन और महामंत्री विनोद महेश्वरी के मुताबिक, धनतेरस से पहले चांदी के भाव में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। तीन दिनों में चांदी करीब 10 से 12 हजार रुपये प्रति किलोग्राम तक सस्ती हुई है।
कारोबारियों के अनुसार, इस बार बाजार में एक दिन के भीतर आठ से दस हजार रुपये प्रति किलोग्राम तक का उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। पिछले करीब दस दिनों से सोने और चांदी की कीमतों में नरमी का रुख बना हुआ है।
पिछले साल धनतेरस से पहले तेजी, इस बार गिरावट
सराफा कारोबारियों ने पिछले साल और इस साल के भाव की तुलना करते हुए बताया कि 14 अक्टूबर 2025 को चांदी करीब 1.85 लाख रुपये प्रति किलोग्राम थी। अगले ही दिन यानी 15 अक्टूबर 2025 को इसका भाव बढ़कर करीब 1.95 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गया था। इस तरह एक दिन में करीब 10 हजार रुपये प्रति किलोग्राम की तेजी आई थी।
इसके उलट वर्ष 2026 में चांदी की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिल रही है। कारोबारी इसे वैश्विक बाजार के समीकरणों और निवेशकों की मुनाफावसूली से जोड़कर देख रहे हैं।
शादी वाले घरों में हो रही खरीदारी, निवेशक कर रहे इंतजार
चांदी की कीमतों में गिरावट के बीच खरीदारों की अलग-अलग रणनीति देखने को मिल रही है। जिन परिवारों में शादी-ब्याह की तैयारियां चल रही हैं, वे कम हुए भाव का फायदा उठाने के लिए रोजाना कुछ न कुछ खरीदारी कर रहे हैं।
वहीं, निवेशकों का एक वर्ग ऐसा भी है जो अभी खरीदारी करने के बजाय कीमतों में और गिरावट का इंतजार कर रहा है। कुछ निवेशक एकमुश्त बड़ी रकम लगाने के बजाय छोटी-छोटी रकम से नियमित खरीदारी कर रहे हैं।
पांच साल में दीपावली के आसपास कितने बदले चांदी के भाव?
पिछले पांच वर्षों में दीपावली के आसपास चांदी की कीमतों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक:
| वर्ष | चांदी का भाव (प्रति किलोग्राम) |
|---|---|
| 2021 | ₹65,500 |
| 2022 | ₹60,000 |
| 2023 | ₹76,000 |
| 2024 | ₹98,000 |
| 2025 (15 अक्टूबर) | ₹1,95,000 |
| 2025 (4 नवंबर) | ₹1,91,000 |
नोट: ये उपलब्ध बाजार आंकड़े हैं। अलग-अलग सराफा बाजारों, शुद्धता और अन्य शुल्कों के कारण वास्तविक खरीदारी का भाव अलग हो सकता है।
क्या चांदी फिर छुएगी नई ऊंचाई?
चांदी की कीमतों में आई गिरावट के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह कीमती धातु एक बार फिर तेजी के दौर में लौटेगी? सराफा कारोबारियों का मानना है कि सोने और चांदी में लंबी अवधि के निवेश का नजरिया रखना चाहिए। हालांकि, निकट भविष्य में कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
धनतेरस से पहले कीमतों में आई गिरावट ने खरीदारों को राहत जरूर दी है, लेकिन निवेशकों को बाजार की दिशा समझकर ही फैसला लेना चाहिए। चांदी के भाव में आगे तेजी आएगी या गिरावट जारी रहेगी, यह काफी हद तक वैश्विक बाजार की परिस्थितियों और मांग-आपूर्ति पर निर्भर करेगा।
