आगरा। पुलिस कमिश्नरेट आगरा के थाना शाहगंज की चौकी सराय ख्वाजा में नशे बाजो का आतंक कुछ इस प्रकार सिर चढ़ कर बोल रहा है जो अब पुलिस कर्मियों को भी नहीं बख्श रहे। आपको याद दिला दे कि आज से ठीक 1 महीने पहले 6 अक्टूबर को चौकी से चंद कदम की दूरी पर ही ट्रैफिक पुलिस कर्मी को किसी बात को लेकर 2 नशे के आदि युवकों ने जमीन पर गिरा गिरा कर पीटा डाला था इतना ही नहीं धारदार ब्लेड से उसके ऊपर हमला बोल दिया था, जिससे वह गंभीर रूप से घायल भी हो गया। क्षेत्रीय पुलिस ने मौके से 2 आरोपियों की अपनी हिरासत में ले लिया, तो वही घायल ट्रैफिक पुलिसकर्मी को उपचार के लिए डिस्ट्रीक भेजा गया था। आपको बताते चले कि चौकी से महज़ कुछ ही कदम की दूरी पर इस तरह की घटना पुलिस की कार्यवाही पर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है कि क्या नशेबाजों में पुलिस का कोई खौफ बाकी है। यह कोई पहली घटना नहीं हे इससे पहले भी आम लोगों को यह अपना निशाना बनाते रहे है लेकिन क्षेत्रीय पुलिस मूर्खदर्शन बन कर यह सब देखती रहती है।
आखिर क्या है सुलोचन, क्यों लेते है नशेबाज
सुलोचन एक ऐसा नशा है जिसे अक्सर जूता बनाने में इस्तेमाल लिया करते है साथ हे वाइटनर जो कॉपी किताबों के लिए इस्तेमाल करते है सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार उसे कुछ दुकानदार चंद फायदे के लिए इसे बेच रहे है और नशे के आदि लोग कपड़े में इसे डाल कर सूंघते है जिससे नशे का एहसास होता है। जिसमें मदहोश होकर रोड पर ही आते जाते लोगो से गालो गालोज ओर महिलाओं से बत्तमीजी करते हुए नजर आते है खेरिया मोड एक वीआईपी रोड भी कहलाता है अगर बीआईपी रोड पर ही इस तरह की तस्वीरें सामने आएगी तो आम लोग कहा जाएंगे। सराय ख्वाजा चौकी के बराबर से चंद कदम की दूरी पर ही एक कबाड़े वाले की दुकान है वही इन लोगों का अड्डा बना हुआ है वही वह देखने को मिल जाएंगे।
यह कहता है कानून लेकिन सभी विभाग हे बेखबर
दिल्ली हाईकोर्ट ने 2018 में इसपे कानून बनाते हुए इसे नशीला पदार्थ के रूप में घोषित कर धारा 77 के अंतर्गत इसे बेचने वालो के खिलाफ कार्यवाही के लिए कानून बनाया था, लेकिन पुलिस कोई कार्यवाही नहीं करती है पूरे मामले से बेखबर होकर बैठी रहती है। जब कानून है नियम है तो पुलिस कार्यवाही में आखिर पीछे क्यों है, किस बात का इंतजार है अभी तो एक पुलिसकर्मी को अपना निशाना बनाया क्या किसी आम लोगों पर हमला होने का इंतजार है.?
उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ हुई थी कार्यवाही
अब आपको थोड़ा पीछे लेकर जाते है 2025 सितंबर का महीना, अलीगढ़ के एसएसपी जादोन ने इस ओर ध्यान दिया ओर 24 नाबालिग को पकड़ा ओर उनसे बात की यह तक की उन्होंने उनका स्कूल में दाखिला भी कराया ओर पैसे न होने की वजह से उनके मां बाप उन्हें पढ़ाने में असमर्थ थे तो एसएसपी साहब ने ही उनकी पढ़ाई का पूरा खर्चा उड़ाया था। यही प्रक्रिया अगर इसी क्षेत्र में भी हो तो यह की तस्वीर भी बदल सकती है।
इस पूरे मामले में क्षेत्रीय व्यापारियों का यह कहना है
पुलिस चौकी से चंद ही कदम की दूरी पर इस तरह की घटना का हो जाना ये पुलिस पर सवाल खड़ा कर रही है, हर रोज़ यहां से गुजरने वालो को ओर दुकानों पर सामान खरीदने वाले ग्राहकों को परेशान करते है और पुलिस कोई कार्यवाही नहीं करती है, इनके कारण लोगों के भय का माहौल रहता है इनके ऊपर कार्यवाही अवश्य ही होनी चाहिए ।
अब देखने वाली बात होगी के क्षेत्रीय पुलिस इन नशेबाजों पर क्या कार्यवाही करती है जिससे इनकी कमर तोड़ी जा सके या फिर यू ही यह इसी तरह लोगो से लड़ते झगड़े घायल करते रहेंगे जब एक पुलिस कर्मियों का उनके अंदर कोई डर नहीं है तो आम लोग इनकी नज़रो में क्या मायने रखेंगे।
