आगरा के DEI पीवी प्राथमिक विद्यालय में तृतीय विज्ञान प्रदर्शनी आयोजित। नन्हे विद्यार्थियों ने 30 से अधिक वर्किंग मॉडल प्रस्तुत किए और न्यूटन-पास्कल के नियम समझाए।
- 30 से अधिक वर्किंग मॉडल ने आकर्षित किया ध्यान
- जेन अल्फा के बच्चे प्राथमिक कक्षा में सीख रहे पास्कल और न्यूटन के नियम
- बचपन से वैज्ञानिक सोच विकसित करना उद्देश्य: प्रधानाचार्या जयंती माथुर
- अंतरराष्ट्रीय ओलंपियाड में भी विद्यालय के विद्यार्थियों ने हासिल की उपलब्धियां
- शिक्षिकाओं और स्टाफ के प्रयासों की हुई सराहना
Agra News: दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट (DEI) के पीवी प्राथमिक विद्यालय, दयालबाग में शनिवार, 7 नवंबर 2026 को तृतीय विज्ञान प्रदर्शनी का भव्य आयोजन किया गया। प्रदर्शनी में प्राथमिक कक्षाओं के नन्हे विद्यार्थियों ने अपनी वैज्ञानिक प्रतिभा, रचनात्मक सोच और आत्मविश्वास का शानदार प्रदर्शन किया। बच्चों ने 30 से अधिक रोचक और वर्किंग साइंस मॉडल प्रस्तुत किए। खास बात यह रही कि नन्हे विद्यार्थियों ने पास्कल के नियम और न्यूटन के नियम जैसे जटिल वैज्ञानिक सिद्धांतों को अपने बनाए मॉडल के माध्यम से बेहद सरल तरीके से समझाया।
प्रदर्शनी का उद्घाटन डीईआई के निदेशक प्रो. सी. पटवर्धन ने मुख्य अतिथि के रूप में किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में अभिभावक, शिक्षाविद और दर्शक मौजूद रहे। विद्यालय परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। बच्चों के मॉडल और उनकी वैज्ञानिक व्याख्या देखकर अतिथियों ने विद्यार्थियों के साथ-साथ शिक्षिकाओं और विद्यालय के स्टाफ के प्रयासों की भी सराहना की।
30 से अधिक वर्किंग मॉडल ने आकर्षित किया ध्यान

विज्ञान प्रदर्शनी में प्राथमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों ने अपनी कल्पनाशीलता और वैज्ञानिक समझ का परिचय देते हुए 30 से अधिक वर्किंग मॉडल प्रस्तुत किए। इन मॉडलों में जलगतिकी (Hydraulics), पर्यावरण संरक्षण, हरित ऊर्जा, नवीकरणीय ऊर्जा के स्रोत और सौरमंडल से जुड़े मॉडल प्रमुख रहे।
इसके अलावा ‘दयालबाग यूटोपिया’ विषय पर आधारित मॉडल भी आकर्षण का केंद्र रहे। बच्चों ने अपने मॉडलों के जरिए विज्ञान के सिद्धांतों को केवल प्रदर्शित ही नहीं किया, बल्कि उनके काम करने की प्रक्रिया भी समझाई।
सबसे खास बात यह रही कि छोटी उम्र के विद्यार्थियों ने जटिल वैज्ञानिक अवधारणाओं को पूरे आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुत किया। दर्शकों और शिक्षाविदों ने बच्चों की प्रतिभा को भविष्य के वैज्ञानिक भारत की मजबूत नींव बताया।
जेन अल्फा के बच्चे प्राथमिक कक्षा में सीख रहे पास्कल और न्यूटन के नियम
कार्यक्रम में नॉन-यूनिवर्सिटी एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस की डीन प्रो. सोना आहूजा ने डीईआई की विशेष शिक्षण पद्धति के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि डीईआई के अंतर्गत देशभर में 29 स्कूल संचालित किए जा रहे हैं। इनमें पांच स्कूल आगरा में हैं, जबकि अन्य स्कूल मध्य प्रदेश के हरदा जिले के राजबरारी और टिमरनी सहित एमटीवी पुरम, काकीनाड़ा और चंडीगढ़ जैसे स्थानों पर शिक्षा प्रदान कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि संस्थान में बच्चों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रखा जाता, बल्कि उन्हें प्रयोगों और गतिविधियों के माध्यम से सीखने के अवसर दिए जाते हैं। इसे एक्सपीरिएंशियल लर्निंग यानी अनुभव आधारित शिक्षा कहा जाता है।

प्रो. सोना आहूजा ने बताया कि कोरोना काल के दौरान बच्चों को व्यावहारिक अनुभव की कमी महसूस हुई थी। इसी को ध्यान में रखते हुए 31 जनवरी 2022 को ह्यूरिस्टिक लर्निंग सेंटर की शुरुआत की गई। यहां विद्यार्थियों को विभिन्न किट्स और मॉडल्स के माध्यम से विषयों को प्रयोग करके समझने का अवसर मिलता है।
उन्होंने कहा कि आज की जेनरेशन अल्फा (Gen Alpha) तेजी से नई चीजें सीखने और समझने की क्षमता रखती है। इसलिए बच्चों को बड़ी कक्षाओं तक इंतजार नहीं कराया जाता। प्राथमिक स्तर से ही उन्हें पास्कल्स लॉ (Pascal’s Law) और न्यूटन के नियमों (Newton’s Laws) जैसे महत्वपूर्ण वैज्ञानिक सिद्धांतों का व्यावहारिक ज्ञान दिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि पूरे वर्ष बच्चे जो कुछ सीखते हैं, उसे प्रदर्शित करने और उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने के उद्देश्य से विज्ञान प्रदर्शनी आयोजित की जाती है। इस बार भी बच्चों ने अपने बनाए मॉडल के माध्यम से ऐसे सिद्धांतों को समझाया, जिन्हें सामान्यतः मिडिल और हाई स्कूल स्तर पर पढ़ाया जाता है।
बचपन से वैज्ञानिक सोच विकसित करना उद्देश्य: प्रधानाचार्या जयंती माथुर

विद्यालय की प्रधानाचार्या सुश्री जयंती माथुर ने कहा कि विज्ञान प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य बच्चों में बचपन से ही वैज्ञानिक दृष्टिकोण और जिज्ञासा विकसित करना है। आज दुनिया तेजी से तकनीकी बदलावों की ओर बढ़ रही है। आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोटिक्स, क्वांटम कंप्यूटिंग और सेमीकंडक्टर्स जैसे क्षेत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
उन्होंने कहा कि इन आधुनिक तकनीकों को समझने के लिए बच्चों की बुनियादी वैज्ञानिक समझ मजबूत होना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से डीईआई की एजुकेशन पॉलिसी 1975 के अनुरूप प्राथमिक स्तर से ही बच्चों को वैज्ञानिक सोच और व्यावहारिक शिक्षा के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय ओलंपियाड में भी विद्यालय के विद्यार्थियों ने हासिल की उपलब्धियां
पीवी प्राथमिक विद्यालय के विद्यार्थी पढ़ाई के साथ-साथ अन्य गतिविधियों में भी लगातार अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। विद्यालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, यहां के विद्यार्थियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित ओलंपियाड में 10वीं, 30वीं और 42वीं रैंक हासिल की है।
इसके अलावा विद्यालय के विद्यार्थियों का चयन स्केटिंग में राष्ट्रीय स्तर पर भी हुआ है। ये उपलब्धियां विद्यालय में पढ़ाई के साथ खेल और अन्य रचनात्मक गतिविधियों को दिए जा रहे महत्व को दर्शाती हैं।
विद्यालय में बच्चों को शैक्षणिक ज्ञान के साथ अच्छे संस्कार, मेहनत का सम्मान और संसाधनों के सदुपयोग की शिक्षा भी दी जाती है। विद्यार्थियों को ‘अपव्यय से मुक्ति’ यानी ‘Waste Nothing’ की आदत विकसित करने के लिए प्रेरित किया जाता है, ताकि वे बचपन से ही पर्यावरण और संसाधनों के प्रति जिम्मेदार बन सकें।
शिक्षिकाओं और स्टाफ के प्रयासों की हुई सराहना
विज्ञान प्रदर्शनी को सफल बनाने के लिए विद्यालय की शिक्षिकाएं और समस्त स्टाफ लंबे समय से तैयारियों में जुटे हुए थे। विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह और आत्मविश्वास के साथ अपने मॉडल प्रस्तुत किए। अभिभावकों और अतिथियों ने बच्चों की प्रस्तुतियों को सराहा और उनका उत्साहवर्धन किया।
कार्यक्रम के समापन पर मुख्य अतिथि प्रो. सी. पटवर्धन और अन्य अतिथियों ने नन्हे वैज्ञानिकों की प्रतिभा, शिक्षिकाओं की मेहनत और विद्यालय प्रबंधन के प्रयासों की प्रशंसा की।
इस विज्ञान प्रदर्शनी ने एक बार फिर साबित किया कि यदि बच्चों को शुरुआती कक्षाओं से ही प्रयोग करने, सवाल पूछने और नई चीजें खोजने का अवसर दिया जाए, तो वे कम उम्र में भी विज्ञान के जटिल सिद्धांतों को समझने और उन्हें व्यवहार में उतारने की क्षमता रखते हैं।

