चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से हिंदू नववर्ष की शुरुआत होती है। इस दिन को विशेष रूप से चैत्र नवरात्रि के रूप में मनाया जाता है। इतिहासकारों के अनुसार, विक्रमादित्य ने विक्रम संवत की शुरुआत की थी, जो अंग्रेजी कैलेंडर से 57 साल आगे चलता है। यह दिन ब्रह्मा जी द्वारा सृष्टि के निर्माण का भी प्रतीक है, जिसे हिंदू समाज नववर्ष के रूप में धूमधाम से मनाता है।
चैत्र नवरात्रि का महत्व अत्यधिक है, क्योंकि यह दिन भगवान राम के वानरराज बाली का वध करने के बाद प्रजा को मुक्ति दिलाने की घटना से भी जुड़ा हुआ है। इस दिन को लेकर प्रजा ने घर-घर उत्सव मनाए थे और ध्वज फहराए थे, जो आज भी देखा जाता है। आज के समय में केसरिया झंडा लगाकर देवी माँ का स्वागत किया जाता है और हवन करने का विधान भी है।
नवरात्रि की पूजा विधि
चैत्र नवरात्रि के दौरान हिंदू धर्म में देवी दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। इसे विशेष रूप से माता दुर्गा की कृपा प्राप्त करने का सबसे उपयुक्त समय माना जाता है। नवरात्रि के दौरान माता दुर्गा की विधिपूर्वक पूजा की जाती है। देवी माँ के नौ रूपों में:
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माता शैलपुत्री (पहला दिन)
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माता ब्रह्मचारिणी (दूसरा दिन)
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माता चंद्रघंटा (तीसरा दिन)
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माता कूष्मांडा (चौथा दिन)
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माता स्कंदमाता (पाँचवां दिन)
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माता कात्यायनी (छठा दिन)
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माता कालरात्रि (सातवाँ दिन)
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माता महागौरी (आठवाँ दिन)
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माता सिद्धिदात्री (नौवाँ दिन) की पूजा की जाती है।
इन नौ दिनों में श्रद्धालु माता के भजन, कथा और पूजा-अर्चना करते हैं, तथा व्रत रखते हुए विशेष ध्यान और समर्पण से पूजा करते हैं।
कलश स्थापना और पूजा विधि
नवरात्रि के पहले दिन विशेष रूप से कलश स्थापना की जाती है। इस विधि में सबसे पहले देवी माँ के चित्र के सामने अखंड ज्योति या दीपक जलाया जाता है। फिर कलश में गंगा जल, सुपारी, अक्षत और दक्षिणा डालकर उस पर आम के पत्ते लगाए जाते हैं। इसके ऊपर नारियल को लाल चुनरी से लपेटकर रखा जाता है। यह विधि श्रद्धा और विश्वास के साथ की जाती है, ताकि नवरात्रि के नौ दिन सफलतापूर्वक व्रत और पूजा की जा सके।
पंचग्रही योग और शास्त्रीय संयोग
इस साल के चैत्र नवरात्रि में पंचग्रही योग का निर्माण हो रहा है, जिसमें सूर्य, चंद्रमा, शनि, बुध और राहु मीन राशि में एक साथ रहेंगे। इसके साथ-साथ बुधादित्य और मालव्य राजयोग का भी संयोग है, जो नवरात्रि के दौरान चार दिन रवि योग और तीन दिन सर्वार्थ सिद्धि योग को बनाने वाला है। यह समय विशेष रूप से शुभ और फलदायी माना जा रहा है।
माँ दुर्गा का मंत्र:
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ।।
या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ।।
या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ।।
माता के दर्शन:
इस दौरान देशभर के प्रसिद्ध देवी मंदिरों जैसे वैष्णो देवी, मां पीतांबरा देवी, मां त्रिपुर सुंदरी, दुर्गा परमेश्वरी मंदिर, दक्षिणेश्वर काली मंदिर आदि में भक्त दर्शन करने जाते हैं और मां के आशीर्वाद से अपने जीवन को संपूर्ण बनाने का प्रयास करते हैं। इन मंदिरों के दर्शन से श्रद्धालुओं की सभी मुरादें पूरी होने की मान्यता है।
चैत्र नवरात्रि केवल एक धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह हिंदू समाज के लिए एक नए आशा और समृद्धि का प्रतीक है। इस समय देवी माँ की पूजा, कलश स्थापना, व्रत और मंत्रोच्चार से जीवन में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है।

नगर मण्डल अध्यक्ष – भाजपा महिला मोर्चा खेरागढ़
ब्रांड एंबेसडर-स्वच्छता अभियान नगर पंचायत खेरागढ़
