आजकल साइबर ठगी के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है, और ताजे आंकड़ों के अनुसार, इन ठगी की घटनाओं में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला प्लेटफार्म टेलीग्राम एप है। चाहे वह नौकरी के नाम पर ठगी हो, निवेश के नाम पर धोखाधड़ी हो या फिर किसी और तरीके से लोग अपनी मेहनत की कमाई गंवा रहे हों, सभी मामलों में टेलीग्राम एप का सबसे ज्यादा उपयोग हो रहा है। हैरानी की बात तो यह है कि अब ठगों ने बैंकों के खाते भी बेचना शुरू कर दिया है, और इन खातों के माध्यम से ठगी की रकम को क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर विदेश भेजा जा रहा है।
साइबर ठगों का गेट-वे बन चुका है टेलीग्राम एप
साइबर ठगों ने टेलीग्राम एप का इस्तेमाल अपने ठगी के कारोबार को बढ़ाने के लिए किया है। ग्वालियर पुलिस की साइबर क्राइम विंग की पड़ताल में यह सामने आया है कि इस एप का उपयोग पिछले एक साल में 51 ठगी के मामलों में हुआ है। इन मामलों में ज्यादातर नौकरी, काम दिलाने के नाम पर ठगी और निवेश के नाम पर धोखाधड़ी की घटनाएं शामिल हैं।
यह एप अब ठगी का गेट-वे बन चुका है, जहां ठग और खाता बेचने वाले बदमाश देश-विदेश में विभिन्न ग्रुपों का निर्माण कर रहे हैं और लोगों को अपने जाल में फंसा रहे हैं। ठगों के बनाए गए इन ग्रुपों में लोगों को जोड़कर उन्हें धोखा दिया जा रहा है, जिससे टेलीग्राम एप साइबर अपराधियों का पसंदीदा प्लेटफार्म बन गया है।
बैंक खाते बेचे जा रहे हैं टेलीग्राम के जरिए
चौंकाने वाली बात यह है कि टेलीग्राम के माध्यम से बैंक खाते भी बेचे जा रहे हैं। इन खातों का उपयोग ठगी की रकम को किसी अन्य खाते में ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है। इस प्रक्रिया में, ठगी की रकम को क्रिप्टोकरेंसी जैसे यूएसडीटी (डॉलर जैसा डिजिटल टोकन) में बदला जाता है और फिर इसे चीन जैसे देशों तक भेजा जाता है। यही कारण है कि ग्वालियर पुलिस ने अब भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (i4C) को पत्र लिखने का निर्णय लिया है, ताकि टेलीग्राम एप पर प्रतिबंध लगाया जा सके।
ग्वालियर में टेलीग्राम एप से हुई ठगी की घटनाएं
ग्वालियर में इस एप का उपयोग कर ठगी की एक और प्रमुख घटना सामने आई है। एमबीबीएस की छात्रा मेघना चौहान को टेलीग्राम एप पर एक ग्रुप से जोड़ा गया था। शुरू में उन्हें होटल रेटिंग देने का काम दिया गया, जिसमें उन्हें 200 रुपये का मुनाफा हुआ। लेकिन बाद में ठगों ने मेघना से 44 लाख 11 हजार 363 रुपये ठग लिए। यह केवल एक उदाहरण है, इस तरह की घटनाएं अब आम हो चुकी हैं।
चीनी गिरोह का involvement
ग्वालियर के एक और मामले में बीएसएफ के इंस्पेक्टर अबसार अहमद को एक माह तक डिजिटल अरेस्ट रखा गया और उनसे 70.24 लाख रुपये की ठगी की गई। यह राशि कई अन्य लोगों के खातों में ट्रांसफर की गई थी। जांच में यह पाया गया कि अबसार अहमद से ठगी की गई रकम में से 29 हजार रुपये अंकित वर्मा के खाते में भेजे गए थे। यह खाते चीनी गिरोह द्वारा टेलीग्राम के जरिए खरीदे गए थे, और इन खातों का उपयोग ठगी की रकम को डिजिटल टोकन (यूएसडीटी) में बदलने और चीन भेजने के लिए किया गया था।
बैंक खाते बेचने के खतरे
इस नए साइबर अपराध के तरीके से न केवल आम लोग ठगी का शिकार हो रहे हैं, बल्कि सुरक्षा संबंधी खामियों का भी सामना कर रहे हैं। जिन बैंक खातों का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है, उनका डेटा भी साइबर अपराधियों के हाथ में जा रहा है, जिससे सुरक्षा का खतरा और बढ़ जाता है।
ग्वालियर पुलिस का प्रयास
ग्वालियर पुलिस अब इस मामले में कड़ी कार्रवाई करने की योजना बना रही है। पुलिस का कहना है कि इस अपराध को रोकने के लिए साइबर अपराध से जुड़ी गंभीर कानूनी कार्यवाही की जाएगी। इसके अलावा, वे सरकार से टेलीग्राम एप को प्रतिबंधित करने का भी आग्रह कर रहे हैं, ताकि इस तरह की साइबर ठगी पर काबू पाया जा सके।
टेलीग्राम एप अब एक खतरनाक साइबर अपराध का गेटवे बन चुका है, और इस प्लेटफार्म का गलत इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। इसका समाधान तभी संभव है जब हम सभी साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक हों और इस तरह के अपराधों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।