हरियाणा में आगामी विधानसभा चुनावों की तारीखों में बदलाव की संभावना बढ़ गई है। भारतीय जनता पार्टी (भा.ज.पा.) ने चुनाव आयोग और हरियाणा के मुख्य चुनाव अधिकारी को पत्र लिखकर मतदान की तारीखों को बदलने का अनुरोध किया है।
चुनाव की तारीखों में बदलाव की संभावना
सूत्रों के अनुसार, हरियाणा में चुनाव अब सात या आठ अक्टूबर को हो सकते हैं। भाजपा ने मौजूदा तारीख को लेकर चिंता जताते हुए चुनाव आयोग से इसकी समीक्षा की मांग की है। भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली ने एक अक्टूबर को निर्धारित मतदान दिन को लेकर अपनी चिंताओं को व्यक्त किया है। उनका कहना है कि एक अक्टूबर के आसपास वीकेंड और छुट्टियां हैं, जो लोगों के बाहर जाने और मतदान प्रतिशत पर असर डाल सकती हैं।
भाजपा की चिंताओं के तर्क
बड़ौली ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि 28 और 29 सितंबर शनिवार और रविवार को हैं। एक अक्टूबर को छुट्टी है, और दो अक्टूबर को गांधी जयंती तथा तीन अक्टूबर को अग्रसेन जयंती है। इसके बाद 30 सितंबर को छुट्टी की वजह से छह दिन का लंबा वीकेंड बनेगा। इस अवधि में लोग यात्रा पर जा सकते हैं, जिससे मतदान प्रतिशत प्रभावित हो सकता है। बड़ौली ने यह भी सुझाव दिया है कि मतदान की तारीख के एक दिन पहले और उसके अगले दिन कोई अवकाश न हो, ताकि अधिक से अधिक लोग मतदान में भाग ले सकें।
पंजाब में पहले हो चुका है तारीखों का बदलाव
यह पहला मामला नहीं है जब चुनाव आयोग ने तारीखों में बदलाव किया है। 2022 में पंजाब विधानसभा चुनाव की तारीख 14 फरवरी निर्धारित की गई थी, लेकिन रविदास जयंती के चलते मतदान की तारीख को 20 अक्टूबर कर दिया गया था, ताकि अधिक लोगों को मतदान में भाग लेने का अवसर मिल सके।
बिश्नोई समाज की भी मांग
भाजपा के अलावा, बिश्नोई समाज महासभा ने भी मतदान की तारीख बदलने की मांग की है। महासभा के अध्यक्ष देवेंद्र बुडिया ने बताया कि एक अक्टूबर को बीकानेर में अमावस्या के दिन बड़ा मेला आयोजित होता है। इस मेला में हरियाणा समेत पूरे देश के बिश्नोई समाज के लाखों लोग शामिल होते हैं। इसलिए, महासभा का कहना है कि इस महत्वपूर्ण मेले की वजह से मतदान में हिस्सा लेने वाले लोग कम हो सकते हैं, और इसलिए तारीख में बदलाव की मांग की गई है।
लोकसभा चुनाव में भी घटा था मतदान प्रतिशत
पिछले लोकसभा चुनाव में भीषण गर्मी की वजह से मतदान प्रतिशत में गिरावट दर्ज की गई थी। मई 2019 में करीब 70 प्रतिशत मतदान हुआ था, जबकि हालिया चुनावों में यह आंकड़ा घटकर 65 प्रतिशत रह गया था।
हरियाणा में मतदान की तारीखों में संभावित बदलाव को लेकर सभी की नजरें चुनाव आयोग की आगामी घोषणा पर टिकी हैं।