नई दिल्ली/पहलगाम। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए जघन्य आतंकी हमले की जांच में सनसनीखेज खुलासे हो रहे हैं। अब तक छह आतंकवादियों की संलिप्तता सामने आई है, जिन्होंने पर्यटकों पर AK-47 राइफलों से अंधाधुंध गोलियां बरसाई थीं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की टीम घटनास्थल पर गहन छानबीन कर रही है, वहीं फॉरेंसिक विशेषज्ञ हर छोटे से छोटे सुराग को भी बारीकी से खंगाल रहे हैं।
इस हमले की भयावहता और सुनियोजित तरीके से किए जाने का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसकी साजिश सीमा पार, पाकिस्तान के रावलकोट में रची गई थी। प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ के बाद पुलिस ने तीन मुख्य आतंकवादियों के स्केच जारी किए हैं। इन आतंकवादियों की पहचान आसिफ फौजी, सुलेमान शाह और अबु तल्हा के तौर पर की गई है।
धर्म के आधार पर पहचान, फिर मौत का तांडव
प्रत्यक्षदर्शियों ने जांचकर्ताओं को बताया कि हमले के दौरान आतंकवादियों ने पर्यटकों को एक जगह इकट्ठा किया और फिर उनकी धार्मिक पहचान पूछी। इसके बाद चुन-चुनकर केवल हिंदू श्रद्धालुओं को निशाना बनाया गया। हमलावरों ने बिना किसी दया के AK-47 राइफलों से ताबड़तोड़ फायरिंग कर 28 निर्दोष लोगों की जान ले ली।
चश्मदीदों के अनुसार, दो हमलावर आपस में पश्तो भाषा में बात कर रहे थे, जबकि शेष आतंकवादी उर्दू में संवाद कर रहे थे। आतंकियों के शारीरिक हावभाव और उनकी भाषा को लेकर प्रत्यक्षदर्शियों से गहन पूछताछ जारी है। कुछ लोगों ने बताया कि आतंकी स्थानीय नहीं लग रहे थे, जिससे विदेशी आतंकवादियों की इस कायराना हरकत में शामिल होने की आशंका और बढ़ गई है। प्रत्यक्षदर्शियों द्वारा बताए गए हुलिए के आधार पर ही इन तीन आतंकवादियों के स्केच जारी किए गए हैं, ताकि उनकी पहचान और गिरफ्तारी सुनिश्चित की जा सके।
पहला संपर्क कहां हुआ?
जांच एजेंसी NIA अब इस महत्वपूर्ण पहलू की पड़ताल में जुटी है कि आतंकवादियों का पर्यटकों से पहला संपर्क कहां हुआ। वे किस रास्ते से आए और किसने उनकी इस नापाक साजिश में सहायता की, यह पता लगाना भी जांच का एक अहम हिस्सा है।
NIA की गहन जांच और वीडियोग्राफी
NIA की फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से गोलियों के खाली खोखे (बुलेट शेल्स), खून के नमूने और संभावित डिजिटल उपकरणों को जब्त कर लिया है। इसके अतिरिक्त, घटनास्थल और आसपास के पूरे इलाके की विस्तृत वीडियोग्राफी की जा रही है, ताकि आतंकवादियों के आने-जाने के रास्तों और उनकी गतिविधियों को बारीकी से समझा जा सके।
गृह मंत्री अमित शाह ने दी श्रद्धांजलि

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज स्वयं पहलगाम पहुंचकर इस बर्बर हमले में जान गंवाने वाले मृतकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने पीड़ित परिवारों से भी मुलाकात की और उन्हें ढाढस बंधाया। इसके साथ ही, पूरे क्षेत्र में सेना, CRPF और जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा एक संयुक्त और व्यापक तलाशी अभियान शुरू कर दिया गया है। आतंकवादियों की तलाश में ड्रोन, हेलीकॉप्टर और आधुनिक सर्विलांस तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
आज शाम पीएम आवास पर CCS की आपात बैठक
आज शाम छह बजे प्रधानमंत्री आवास पर कैबिनेट की सुरक्षा मामलों की समिति (CCS) की एक आपात बैठक बुलाई गई है। इस उच्च-स्तरीय बैठक में इस आतंकी हमले के पीछे छिपी अंतरराष्ट्रीय साजिश, क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जवाबी कार्रवाई की रणनीति पर महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाने की संभावना है। इस महत्वपूर्ण बैठक में शामिल होने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपना अमेरिका दौरा बीच में ही रद्द कर स्वदेश लौट रही हैं।
कश्मीर और जम्मू समेत पूरे देश में फूटा जनआक्रोश
पहलगाम में हुए इस जघन्य आतंकी हमले ने न केवल जम्मू-कश्मीर बल्कि पूरे देश को गहरे सदमे में डाल दिया है। इस कायराना हरकत के खिलाफ अब घाटी और जम्मू में भी जनता का गुस्सा फूट पड़ा है। बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए हैं और आतंकवाद के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
जम्मू और श्रीनगर में विरोध रैलियां
जम्मू, श्रीनगर, अनंतनाग और बारामूला समेत कई इलाकों में स्थानीय नागरिकों, युवाओं और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने सड़कों पर उतरकर विरोध जुलूस निकाले। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां लेकर आतंकवाद के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और इस अमानवीय हमले की कड़ी निंदा की। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि यह हमला मानवता के खिलाफ एक जघन्य अपराध है और इसके दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से इस मामले में कठोर कार्रवाई करने और क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।
रावलकोट में रची गई साजिश, दो स्थानीय आतंकी पहचाने गये
खुफिया जानकारी के अनुसार, पहलगाम में हुए इस भीषण आतंकी हमले की साजिश पाकिस्तान के रावलकोट में रची गई थी। इस हमले को अंजाम देने वाले आतंकवादियों के लिए इलाके की रेकी करने और उन्हें सहायता पहुंचाने वाले दो स्थानीय आतंकवादियों की पहचान भी कर ली गई है। इन दोनों की पहचान आदिल और आसिफ के रूप में हुई है, जो त्राल क्षेत्र के बिजबेहरा के निवासी बताए गए हैं। सुरक्षा एजेंसियां अब इन दोनों स्थानीय आतंकियों की धरपकड़ के लिए भी व्यापक अभियान चला रही हैं, ताकि इस साजिश की पूरी कड़ी को जोड़ा जा सके।
