उप्र सरकार की शाख को पलीता लगा रहे गाजियाबाद में तैनात उप जिलाधिकारी सदर और तहसीलदार

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गाजियाबाद के जिलाधिकारी
गाजियाबाद के जिलाधिकारी

कुलविंदर यादव

गाजियाबाद। वैश्विक महामारी के चलते इस लॉक डाउन पीरियड में विभिन्न शहरों में प्रवासी मजदूर फंसे हुए हैं संबंधित राज्य सरकारें मजदूरों के भोजन और स्वास्थ्य से संबंधित सभी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रही हैं । राज्य सरकार द्वारा बनाए गए समस्त जनकल्याणकारी कार्यक्रमों की क्रियान्वयन की जिम्मेदारी प्रशासनिक अधिकारियों की होती है । ऐसे में यदि प्रशासनिक अधिकारी अपने कार्यों को लेकर जिम्मेदार हैं तो उस क्षेत्र विशेष में कोई समस्या देखने को नहीं मिलेगी। लेकिन यदि प्रशासनिक अधिकारियों का गैर जिम्मेदाराना रवैया देखने को मिलता है तो निश्चित रूप से उस क्षेत्र विशेष में समस्या बढ़ेगी ।

हालिया उदाहरण गाजियाबाद जिले का है, जहां कुछ मजदूरों के परिवारों द्वारा मीडिया कर्मियों के माध्यम से सदर उप जिलाधिकारी, सदर तहसीलदार को लगातार दो दिनों तक अवगत कराया गया लेकिन 2 दिन बीत जाने के बाद भी इन मजदूर परिवारों को सहायता नहीं मिली । निश्चित रूप से ऐसे प्रशासनिक अधिकारी राज्य सरकारों की साख में बट्टा लगाने का कार्य कर रहे हैं । जहां प्रदेश का मुखिया स्वयं मजदूरों की सहायता के लिए अपनी पूरी ऊर्जा से प्रयास कर रहा हो। वहीं यदि प्रशासनिक अधिकारी गैर जिम्मेदाराना रवैया अपनाते हैं तो निश्चित रूप से यह शर्मनाक है |

बाद में पुनः मजदूर परिवारों ने मीडिया कर्मियों की सहायता से जिला अधिकारी गाजियाबाद को सूचित किया । जिला अधिकारी तक सूचना पहुंचते ही एक घंटे के अंदर ही इन परिवारों के लिए राशन की उपलब्धता सुनिश्चित हो गई। राशन उपलब्धता होने के बाद मजदूरों द्वारा जिलाधिकारी महोदय का आभार व्यक्त किया गया। आज देश में ऐसे ही अधिकारियों की जरूरत है जो त्वरित फैसला लेने में सक्षम हो ।

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