भोपाल। राजधानी में रहने वाले एक ही परिवार के चार नाबालिग बच्चे आगरा में रहने वाले अपने मामा के घर जाने की जिद करने लगे, तब मॉ ने उनसे होली के बाद भाई दूज पर चलने की बात कहते हुए सभी को समझाईश दी। लेकिन बच्चे उसी समय मामा के पास जाना चाहते थे, जिकसे चलते वह परिजनो को बिना बताये ही घर से निकल गये। वह भोपाल स्टेशन पहुंचे और आगरा जाने के लिए ट्रेन में सवार हो गए। सफर आगे बढ़ने पर बच्चो को डर लगने लगा। परिजनो की याद आने लगी।
उन्होनें टेन में सफर कर रहे एक मुसाफिर को सारी बात बताकर मदद मांगी। इसके बाद परिजन को बच्चो के चले जाने की खबर लगी, उन्होने तत्काल ही जीआरपी से संपर्क कर हादसे की जानकारी दी। टीम ने बच्चों को झांसी स्टेशन पर रेस्क्यू कर उन्हें सकुशल बरामद कर लिया। झांसी और भोपाल चाइल्ड लाइन और जीआरपी की संयुक्त कार्यवाही से बच्चों को उनके परिजन को सौंपा गया। परिवार वालो को सौंपे जाने के पहले नाबालिग बच्चों की बाल कल्याण समिति द्वारा कांउसलिंग की गई। एक ही परिवार के चारों बच्चों की उम्र 9 से 14 साल के बीच है।
बच्चों ने कांउसलिंग टीम को बताया कि 20 दिन की छुटटी होने पर उन्होने मॉ से कहा था कि मामा के घर जाना है, लेकिन वह लेकर नहीं जा रही थी। इसलिए हम खुद ही ट्रेन में बैठकर निकल गए। बाद में जब डर लगा तो साथ में सफर कर रहे अंकल से मदद मांगी। उनके मोबाइल से घर पर फोन लगाया और पूरी जानकारी दी। काउंसलिंग के दौरान बच्चों को समझाया गया कि इस तरह माता-पिता को बिना बताऐ घर से निकलना और ट्रैन से सफर करना बच्चो के लिये परेशानी बन सकता है, और वह आगे से बिना परिजनो को बताये ऐसा कोई काम न करें।
