प्रेम प्रसंग के विवाद को बनाया गया सामूहिक दुष्कर्म का मामला, किसान संगठन पर विवेचना में अनावश्यक हस्तक्षेप का आरोप
एटा। जनपद के जसरथपुर थाना क्षेत्र में कथित सामूहिक दुष्कर्म प्रकरण में पुलिस विवेचना ने नया मोड़ ले लिया है। जांच में यह मामला प्रेम प्रसंग से जुड़ा पाया गया, जबकि शुरुआती दौर में भारतीय किसान यूनियन स्वराष्ट्र पर दबाव बनाकर मुकदमा दर्ज कराने के आरोप है।
सूत्रों के अनुसार, यूनियन पदाधिकारियों के दबाव में पहले नाबालिग के साथ सामूहिक दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराया गया था। विवेचना के दौरान पुलिस ने हाई स्कूल की अंकतालिका के आधार पर पीड़िता को बालिग पाया, जिसके बाद पोक्सो एक्ट की धाराएं समाप्त कर दी गईं। पुलिस ने ठोस साक्ष्यों के आधार पर मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जबकि अन्य के खिलाफ जांच जारी है।
वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत पुंडीर ने बताया कि पुलिस ने निष्पक्ष विवेचना करते हुए न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया है। किशोर न्याय अधिनियम में उम्र निर्धारित करने के लिए हाई स्कूल के सर्टिफिकेट प्रथम वरीयता दी जाती है। मेडिकल बोर्ड ने भी अपनी ओपिनियन में पीड़िता को वयस्क मानते हुए 19 – 20 साल उम्र की संस्तुति की है। पीड़िता के बालिग होने की पुष्टि के बाद पोक्सो एक्ट हटाना पूरी तरह कानूनसम्मत है।
दूसरी ओर, किसान यूनियन (स्वराष्ट्र) के राष्ट्रीय अध्यक्ष दीपक शर्मा ने शासन को पत्र भेजकर विवेचना पर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि संगठन के कुछ लोग निर्दोषों को फंसाने की कोशिश कर रहे थे।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि विवेचना पूरी तरह साक्ष्यों पर आधारित रही है और किसी भी संगठनात्मक दबाव को स्वीकार नहीं किया गया।
जसरथपुर कांड की विवेचना में पुलिस ने तथ्यों और साक्ष्यों को तरजीह दी है, न कि दबाव को। पीड़िता के बालिग पाए जाने के बाद पोक्सो एक्ट का हटाया जाना जांच की पारदर्शिता को दर्शाता है। वहीं, किसान यूनियन (स्वराष्ट्र) की धरना/ प्रदर्शन कर दबाव की रणनीति अब खुद सवालों के घेरे में है। कुल मिलाकर, प्रकरण में पुलिस की कार्रवाई निष्पक्ष और विधिसम्मत मानी जा रही है, जबकि यूनियन की भूमिका विवादों में घिर गई है।
