सुल्तान आब्दी, अग्र भारत संवाददाता
झांसी। जनपद में भूमाफियाओं का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। हालात यह हैं कि अब न तो नगर निगम की संपत्तियाँ सुरक्षित हैं और न ही प्राकृतिक पहाड़। बेखौफ भूमाफिया नगर निगम एवं अन्य सरकारी विभागों की जमीनों पर अवैध कब्जा कर निर्माण करा रहे हैं और बाद में उन्हें बेचकर आमजन को ठगने का काम कर रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, कई भूमाफिया नगर निगम की बहुमूल्य संपत्तियों को अपने प्रभाव और मिलीभगत के बल पर हथिया चुके हैं। इन जमीनों पर अवैध निर्माण कर प्लाटिंग की जा रही है और उन्हें आम लोगों को ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है। आश्चर्य की बात यह है कि संबंधित विभागों को इन गतिविधियों की पूरी जानकारी होने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है।दूसरी ओर, जनपद के कई क्षेत्रों में पहाड़ों को जड़ से मिटाकर अवैध खनन और प्लाटिंग का खेल खुलेआम चल रहा है। पर्यावरण नियमों और खनन कानूनों को ताक पर रखकर भूमाफिया प्राकृतिक संसाधनों की खुली लूट कर रहे हैं, जिससे पर्यावरण को भी गंभीर नुकसान पहुंच रहा है।इतना ही नहीं, कई भूमाफिया वर्षों से विवादित भूमि को ही बार-बार बेचकर आम जनता को चूना लगा रहे हैं। जमीन खरीदने के बाद लोग जब कब्जा लेने पहुंचते हैं, तब उन्हें भूमि विवाद, पुराने मुकदमे और स्वामित्व संबंधी अड़चनों की जानकारी मिलती है। इस कारण अनेक परिवार आर्थिक और मानसिक प्रताड़ना का शिकार हो रहे हैं।सबसे गंभीर मामला यह है कि कुछ प्रभावशाली भूमाफिया सरकारी जमीनों की लीज कराकर उसी जमीन की अवैध प्लाटिंग कर धड़ल्ले से बिक्री कर रहे हैं। नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी चुप्पी साधे बैठे हैं।स्थानीय लोगों का आरोप है कि इन अवैध गतिविधियों में राजस्व विभाग के कुछ कर्मचारियों, विशेषकर लेखपालों की भूमिका संदिग्ध है। बिना उनकी जानकारी और मिलीभगत के इस स्तर पर अवैध कब्जे और प्लाटिंग संभव नहीं मानी जा रही है। बावजूद इसके, प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही है।अब जनपद की जनता यह सवाल उठा रही है कि आखिर कब तक भूमाफियाओं का यह बेखौफ खेल चलता रहेगा? कब जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि इस पर सख्त कदम उठाएंगे? यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो जनपद में भूमि से जुड़ा यह अवैध कारोबार और अधिक भयावह रूप ले सकता है।
