धर्म एवं ग्रंथों के प्रकांड विद्वान थे राजा बाबा महाराज

Dharmender Singh Malik
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दीपक शर्माअग्रभारत

वृन्दावन। चैतन्य विहार-पापड़ी चौराहा स्थित श्रीभक्ति मन्दिर के सभागार में श्रीकृष्ण सत्संग चैरिटेबल ट्रस्ट (पंजी.) के तत्वावधान में एक शोक सभा संपन्न हुई। जिसमें ब्रह्मलीन संत राजा बाबा को श्रृद्धांजलि अर्पित की गई।
सभा की अध्यक्षता करते हुए भक्ति मन्दिर के सेवायत डॉ. सहदेव कृष्ण चतुर्वेदी ने कहा कि संत प्रवर राजा बाबा धर्म व अध्यात्म के अलावा समाजसेवा के क्षेत्र में भी अग्रणीय थे।उनके हमारे परिवार से घनिष्ठ संबंध थे।भक्ति मन्दिर में आयोजित होने वाले सभी कार्यक्रमों में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहा करते थे।उनके न रहने से देश व समाज की जो अपूर्णनीय क्षति हुई है, उसकी भरपाई कर पाना असम्भव है।
वरिष्ठ साहित्यकार डॉ गोपाल चतुर्वेदी एवं प्रमुख समाजसेवी पंडित बिहारीलाल वशिष्ठ ने कहा कि ब्रह्मलीन संत राजा बाबा श्रीमद्भागवत, श्रीराम कथा एवं अन्य धर्म ग्रंथों के प्रकांड विद्वान थे।उनकी पुष्टिमार्ग सम्प्रदाय के प्रति अपार निष्ठा थी।उन्होंने आजीवन सनातन धर्म का प्रचार व प्रसार कर अनेकों व्यक्तियों को भक्ति के मार्ग से जोड़ा।
राधाकांत शास्त्री व आचार्य रामविलास चतुर्वेदी ने कहा कि वे ब्रज के विश्वप्रसिद्ध भागवताचार्य (यशोदावतार) पूज्य श्रीजी बाबा महाराज के प्रिय अनुज थे।इस परिवार की न केवल ब्रजभूमि अपितु समूची भारत भूमि पर अनेकों देने हैं।ऐसी पुण्यात्माओं से ही सम्पूर्ण ब्रजमंडल शोभायमान है।
इस अवसर पर युवा साहित्यकार डॉ. राधाकांत शर्मा, हरदेव कृष्ण, माधव कृष्ण, आनंद कुमार चौबे, मौनू भैया, विष्णुकांत भारद्वाज ब्रजवासी भैया, युगल गोस्वामी, आचार्य ईश्वरचंद्र रावत आदि ने भी अपने विचार व्यक्त कर बाबा महाराज को अपनी श्रृद्धांजलि अर्पित की।संचालन डॉ. गोपाल चतुर्वेदी ने किया।सभा के अंत में सभी ने 2 मिनट का मौन धारण कर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रभु से प्रार्थना की।

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Editor in Chief of Agra Bharat Hindi Dainik Newspaper
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