मेरठ। साधारण परिवार में जन्म लेकर कठिन संघर्षों के बीच अपने सपनों को साकार करने वाले एडीशनल एसपी इरफान नासिर खान आज क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गए हैं। पदोन्नति के बाद उन्होंने अपने जीवन वृतांतों साझा करते हुए बताया कि सफलता कभी भी आसान नहीं होती, इसके पीछे वर्षों की मेहनत, असफलताएं और परिवार का त्याग छिपा होता है।
उन्होंने कहा कि उनका बचपन गांव की सादगी और अभावों के बीच बीता। खुद को शरारती छात्र बताते हुए उन्होंने कहा कि माता-पिता ने हमेशा ईमानदारी और मेहनत का पाठ पढ़ाया। यही संस्कार उनके जीवन की सबसे बड़ी ताकत बने।
इरफान नासिर खान ने बताया कि पुलिस की वर्दी देखकर ही उनके मन में अधिकारी बनने का सपना जगा। हालांकि इस सफर में कई बार असफलताओं का सामना करना पड़ा। पहली, दूसरी और तीसरी बार भी सफलता नहीं मिली, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। परिवार और दोस्तों के सहयोग ने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी।
उन्होंने कहा कि लगातार प्रयास और आत्मविश्वास के बल पर एक दिन उनका चयन डीएसपी पद पर हुआ। वर्दी पहनते ही गर्व के साथ जिम्मेदारी का एहसास भी हुआ। उन्होंने कहा कि पुलिस सेवा आसान नहीं होती, लेकिन जब किसी पीड़ित को न्याय मिलता है, तो सारी मेहनत सफल लगती है।
अपर पुलिस अधीक्षक के पद पर पदोन्नति को उन्होंने बड़ी उपलब्धि बताते हुए अपने माता-पिता को याद किया। उन्होंने कहा कि आज भी उनके संस्कार हर कठिन समय में उनका मार्गदर्शन करते हैं।
उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि गांव से होने का मतलब यह नहीं कि सपने छोटे हों। सफलता के लिए सपना देखने का साहस, मेहनत का धैर्य और हार न मानने का संकल्प जरूरी है।
बचपन की यादों को साझा करते हुए उन्होंने गांव के खेल, खेतों में बिताए पल, साथियों के साथ भोजन और प्राथमिक विद्यालय के दिनों को याद किया। उन्होंने कहा कि स्कूल का बरगद का पेड़ आज भी उन यादों का गवाह है।
उन्होंने कहा कि नई जिम्मेदारी को वह सेवा और न्याय के अवसर के रूप में देखते हैं और पूरी ईमानदारी के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करेंगे।
बताते चलें कि एएसपी इरफान नासिर खान एटा जिले में बतौर क्षेत्राधिकारी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
संघर्ष से हासिल की सफलता, ADSP इरफान नासिर खान ने पदोन्नति पर साझा की संघर्ष यात्रा
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