शिक्षा विभाग में बाबुओं को हुए कार्य विभाजन में दागी बाबू की हनक का दिखा जमकर असर
आगरा। जनपद का बेसिक शिक्षा विभाग एक बार फिर चर्चाओं में है। अपने उच्चाधिकारी के आदेशों को दरकिनार करते हुए बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी किया गया आदेश सवालों के घेरे में है। भ्रष्टाचार एवं अनियमितताओं के गंभीर आरोपों से घिरे बाबुओं पर की गई मेहरबानी बेसिक शिक्षा अधिकारी की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा रही है।
आपको बता दें कि बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा बीते शुक्रवार को मुख्यालय हेतु बाबुओं को कार्य विभाजन किया गया है। इसमें अनेकों बाबुओं को विकास खंड की बीआरसी से बुलाकर कथित रूप से अटैचमेंट दिया गया है। इस आदेश पत्र में पहले एवं दसवें नंबर पर जिन बाबुओं का नाम है, उसको देखकर हर किसी का दिमाग चकराने लगा है। बताया जाता है कि दसवें नंबर पर बाबू अभिनंदन शर्मा का नाम है, जिसकी नियुक्ति को लेकर हाल ही में एडी बेसिक ने महानिदेशक स्कूल शिक्षा उत्तर प्रदेश को संस्तुति भेजी थी। एडी बेसिक ने अभिनन्दन शर्मा की फर्जी नियुक्ति को लेकर बेसिक शिक्षा अधिकारी एवं बाबू दिनेश मोहन त्यागी को दोषी ठहराया था। इसके बावजूद कथित रूप से दिनेश मोहन त्यागी के प्रभाव में आकर बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा अभिनन्दन शर्मा को मुख्यालय पर महत्वपूर्ण पटलों का चार्ज थमा दिया गया है ।
गोपनीय पटल मिलने से शुचिता भंग होने का हुआ खतरा
बताया जा रहा है कि अभिनंदन शर्मा की फर्जी नियुक्ति को लेकर विजिलेंस में जांच लंबित चल रही है। इसके अलावा आईजीआरएस पर दर्ज हुई शिकायत का संज्ञान लेकर एडी बेसिक ने बेसिक शिक्षा अधिकारी एवं बाबू दिनेश मोहन त्यागी के खिलाफ संस्तुति की थी। इसके बावजूद अभिनन्दन शर्मा को मुख्यालय पर परिषदीय शिक्षकों के दिव्यांग भत्ता संबंधित कार्य, बीटीसी प्रशिक्षण संबंधित कार्य, माननीयों के पत्रों की पंजिका तैयार करने सहित सबसे महत्वपूर्ण बेसिक शिक्षा अधिकारी की दोनों ईमेल आईडी का क्रियान्वन करने का जिम्मा सौंपा गया है।
पत्नी की सरकारी नौकरी, खुद कंपनी का निदेशक, फिर भी बेरोजगार बनकर ली बाबू की नौकरी
अभिनंदन शर्मा के खिलाफ दर्ज हुई शिकायत शपथपत्र के साथ दी गई है। शिकायतकर्ता ने बताया कि अभिनंदन शर्मा की पत्नी पहले से सरकारी नौकरी में है। अभिनंदन का खुद का बड़ा व्यापार है, जिसका वह खुद निदेशक है। इसके बावजूद अपने पिता की मृत्यु उपरांत नियमानुसार पांच वर्ष का समय गुजरने के उपरांत भी बाबू की नौकरी कथित रूप से आर्थिक लेनदेन करके हथिया ली। अभिनंदन शर्मा की जगह बाबू की नौकरी रामज्योति को मिलनी थी, उसका हक मारकर अभिनंदन शर्मा को बाबू की नौकरी मिल गई।
