मथुरा। शादी-ब्याह के सीजन में जहां बारातों की रौनक चरम पर है, वहीं पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (PETA) इंडिया ने मथुरा सहित लुधियाना, अम्बाला और उदयपुर जैसे कई शहरों में बिलबोर्ड लगाकर लोगों से अपील की है कि वे शादी में घोड़ों का इस्तेमाल न करें। संगठन का कहना है कि बारात में प्रयोग की जाने वाली काँटेदार लगामें घोड़ों के लिए अत्यंत पीड़ादायक होती हैं, जिनसे उनके मुंह और जीभ पर गंभीर चोटें और स्थायी क्षति होती है।
पीटा इंडिया की पॉलिसी एसोसिएट चुमकी दत्ता ने बताया कि ऐसी लगामें वास्तव में “यातना उपकरण” हैं, जो घोड़ों को शारीरिक और मानसिक दोनों तरह से आघात पहुंचाती हैं। उन्होंने कहा कि नव दंपति अपनी जिंदगी के सबसे खास दिन पर किसी जीव के दर्द का कारण न बनें और करुणा का उदाहरण पेश करें।
पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 के तहत कांटेदार लगामों का प्रयोग नियम 8 में प्रतिबंधित है, फिर भी पीटा की जांचों में दिल्ली, महाराष्ट्र, मोहाली, पंचकूला व कई अन्य जगहों पर 800 से अधिक घोड़ों के मुंह में ऐसी कटीली लगामें पाई गईं। संगठन का कहना है कि इन उपकरणों से पशुओं के होंठ और जीभ फट जाते हैं, जिससे वे लगातार दर्द, खून के घाव और मानसिक तनाव में रहते हैं।
धीरे-धीरे जागरूकता बढ़ने के साथ अब कई लोग बारात के लिए वैकल्पिक तरीके अपना रहे हैं-जैसे कार, पैदल या हेलीकॉप्टर से पहुंचना। बॉलीवुड के अनुष्का शर्मा-विराट कोहली, रणबीर कपूर-आलिया भट्ट, शाहिद कपूर-मीरा राजपूत, और सोनम कपूर-आनंद आहूजा जैसी कई हस्तियों ने भी अपने विवाह में घोड़े का प्रयोग नहीं किया।पीटा इंडिया का मूल संदेश यही है कि “पशु हमारे मनोरंजन के लिए नहीं हैं।” संगठन प्रजातिवाद (speciesism) का विरोध करता है- एक ऐसी मान्यता जिसमें मनुष्य खुद को सर्वोपरि समझकर अन्य जीवों के शोषण को उचित ठहराता है।
