एटा -विद्यालय का एक ही भवन, एक ही मैदान, एक ही पुस्तकालय यहां तक कि कमोवेश शिक्षक भी वही, फिर भी दो-दो बोर्ड की मान्यता प्राप्त कर ली गई। जिले के अलीगंज क्षेत्र में कुछ इसी तरह के मामले की गई शिकायत के बाद सामने आया है। माध्यमिक शिक्षा विभाग से लेकर सीबीएसई दिल्ली तक खलबली मच गई है।
मामला जैथरा विकासखंड क्षेत्र के अंतर्गत एसडी पब्लिक इंटर कॉलेज धुमरी का प्रकाश में आया है। विद्यालय की यूपी बोर्ड से मान्यता पहले से ही संचालित है। 2024- 25 की बोर्ड परीक्षा में विद्यालय केंद्र भी बनाया गया। बेसिक शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त कर पहले से ही जूनियर हाई स्कूल संचालित है। इसके बावजूद आश्चर्यचकित करने वाला कारनामा जैथरा निवासी अतुल कुमार पुत्र राम प्रकाश की शिकायत के बाद उजागर हुआ। शिकायत में आरोप लगाया गया कि विद्यालय संचालक द्वारा यूपी बोर्ड से संचालित इंटर कॉलेज के भवन और संसाधनों को प्रदर्शित कर सीबीएसई की मान्यता भी प्राप्त कर ली गई है। खास बात तो यह है कि यूपी बोर्ड से विद्यालय को पहले से ही यू डाइस कोड 0917050 6322 प्राप्त है। इसके बावजूद भी सीबीएसई बोर्ड को वास्तविक मान्यता छुपाते हुए भ्रामक सूचनाओं तथा अभिलेखों का प्रस्तुतिकरण कर सीबीएसई से भी मान्यता प्राप्त कर ली गई। बताया गया है कि सीबीएसई ने भी 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक मान्यता दी है। इस मामले में महत्वपूर्ण यह भी है कि शिकायतकर्ता द्वारा दिसंबर 2025 में इस मामले को लेकर शिकायत की गई थी उस समय सीबीएसई से मान्यता की प्रक्रिया चल रही थी। अब दोहरी मान्यता मिलने के बाद फर्जी तरीके से मान्यता पाने के इस खेल में शिक्षा विभाग से लेकर सीबीएसई बोर्ड तक की भूमिका पर सवाल खड़े हो गए हैं। सीबीएसई की मान्यता पाने के लिए विद्यालय द्वारा बेसिक से प्राप्त जूनियर हाई स्कूल संचालित एस पब्लिक स्कूल शिक्षण संस्थान यू डाइस कोड 091 706312 का उपयोग किया जाना बताया गया है। मामले की शिकायत जिला विद्यालय निरीक्षक तक होने की स्थिति में भले ही मामले की जांच शुरू हो गई है लेकिन तमाम प्रक्रियाओं के बाद एक ही स्कूल की दो बोर्ड की मान्यता जैसी स्थिति के पीछे कई जिम्मेदारों की लापरवाही तथा स्वार्थ पूर्ति जैसे हालात भी स्पष्ट हो रहे हैं।
मामला माध्यमिक शिक्षा विभाग से लेकर अब सेंट्रल बोर्ड आफ सेकेंडरी एजुकेशन के मध्य मान्यताओं की वास्तविकता के सवालिया निशान पर अटका हुआ है।
एनओसी से लेकर मानक सत्यापन में हुआ झोल
दोहरी मान्यता के खेल में खास पहलू तो यह है कि संबंधित विद्यालय को सीबीएसई की मान्यता के लिए माध्यमिक शिक्षा विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र कैसे मिल गया? दूसरी बात सीबीएसई के पैनल द्वारा मान्यता से पूर्व निर्मित संस्थान के भवन तथा संसाधनों का भौतिक सत्यापन किया जाता है तो पैनल ने मानक पूर्ण होने की संस्तुति किस आधार पर दे दी। मामले में नीचे से ऊपर तक झोल नजर आ रहा है, जबकि एक बोर्ड की मान्यता और भवन पर संचालित विद्यालय को दूसरे बोर्ड की मान्यता पूरी तरह से अवैध है।
यूपी बोर्ड के शिक्षकों का ही दे दिया विवरण
बताया जा रहा है कि सीबीएसई की मान्यता के लिए विद्यालय संचालक द्वारा यूपी बोर्ड के शिक्षकों का ही विवरण सीबीएसई को दे दिया गया। यह स्थिति भी पूरी तरह से फर्जीबाड़े का आधार है। यूपी बोर्ड के तहत भी विद्यालय में पहले से ही छात्र-छात्रा यू डाइस पर पंजीकृत हैं।
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मामला संज्ञान में आया है। सीबीएसई दिल्ली द्वारा भी जांच कमेटी बनाई जाएगी। जांच के बाद की आगे की कार्रवाई होगी।
राजीव कुमार गुप्ता, सिटी कोऑर्डिनेटर सीबीएसई
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मामले को लेकर विद्यालय संचालक को नोटिस दिया जा रहा है। जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
