– वर्ल्ड ताइक्वांडो तक पहुंचे झूठे दस्तावेज, इंडियन एथलीट्स बने शिकार
– पुणे में एफआईआर के बाद नामदेव लापता, खेल मंत्रालय से लेकर ईडी तक हरकत में एजेंसियां
– प्रभात कुमार शर्मा बोले- अब ताइक्वांडो परिवार करेगा भ्रष्टाचार पर आखिरी वार,
अब हम सभी एकजुट होकर इनके ताबूत में अंतिम कील ठोकने का काम करेंगे – प्रभात शर्मा
- – वर्ल्ड ताइक्वांडो तक पहुंचे झूठे दस्तावेज, इंडियन एथलीट्स बने शिकार
- – पुणे में एफआईआर के बाद नामदेव लापता, खेल मंत्रालय से लेकर ईडी तक हरकत में एजेंसियां
- – प्रभात कुमार शर्मा बोले- अब ताइक्वांडो परिवार करेगा भ्रष्टाचार पर आखिरी वार,
- अब हम सभी एकजुट होकर इनके ताबूत में अंतिम कील ठोकने का काम करेंगे – प्रभात शर्मा
प्रदीप कुमार रावत/एग्जीक्यूटिव एडिटर
आगरा। 2019 से भारतीय ताइक्वांडो फेडरेशन (TFI) में गड़बड़ियों का ऐसा सिलसिला शुरू हुआ जो थमने का नाम नहीं ले रहा। फेडरेशन के महासचिव प्रभात कुमार शर्मा ने देश भर में फेडरेशन के नाम पर चल रहीं फर्जी संस्थाओं पर लगाम लगाने के लिए भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) की सहमति से एक एडहॉक कमेटी गठित करवाई थी। कमेटी का नेतृत्व महाराष्ट्र ओलंपिक एसोसिएशन से जुड़े नामदेव शिरगांवकर को सौंपा गया। उद्देश्य था ताइक्वांडो में चल रहे विवादों को सुलझाकर नई शुरुआत करना, मगर हुआ ठीक इसका उल्टा।

नामदेव शिरगांवकर ने IOA को बिना सूचना किए चुपचाप ‘इंडिया ताइक्वांडो’ नाम से एक नई संस्था बना ली। बताया जाता है कि उन्होंने विश्व ताइक्वांडो से धोखे यानि कि फर्जी एवं मनगढ़ंत जानकारी देकर एफिलिएशन ले ली। इसका पता चलते ही प्रभात शर्मा और उनके सहयोगियों ने खुद को ठगा महसूस किया और भारतीय ओलंपिक संघ व भारत सरकार के खिलाफ हाई कोर्ट में रिट दायर कर दी।
इधर,नामदेव ने खुद को “इंडिया ताइक्वांडो” का प्रेसिडेंट घोषित किया और खेल जगत में नई हलचल मचा दी। भारतीय एथलीट्स के लिए यह कालखंड भारी साबित हुआ। नामदेव को अंतरराष्ट्रीय रैफरी दंपत्ति का साथ मिला, जिन्होंने उन्हें ताइक्वांडो से कमाई के नए एवं तमाम श्रोतों की जानकारी दी गयी। ब्लैक बेल्ट, गैल कार्ड, राष्ट्रीय प्रतियोगिताएं और सेमिनारों के नाम पर खिलाड़ियों से धन उगाही का धंधा फलने-फूलने लगा।

महाराष्ट्र में जब खिलाड़ियों ने बीते माह अक्टूबर में इसके विरोध में सड़कों पर उतरकर आंदोलन छेड़ा तो सरकार तक में हलचल मच गई। सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री कार्यालय और गृह मंत्रालय तक शिकायतें पहुंचीं, जिसके बाद पुणे में नामदेव के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। उन पर राष्ट्रीय खेलों में 12 करोड़ 45 लाख रुपये के गबन का गंभीर आरोप है। एफआईआर के बाद से नामदेव लापता बताए जा रहे हैं।

उधर, इस पूरे प्रकरण को लेकर प्रभात कुमार शर्मा का कहना है कि यह तो सिर्फ शुरुआत है। “सरकार ने 12 करोड़ के गबन का मामला दर्ज किया है, जबकि असल में करोड़ों रुपए की वसूली की गई है। हमने IOA और नामदेव पर भरोसा किया, लेकिन उन्होंने पीठ में छुरा घोंप दिया,” वे कहते हैं सभी सबूत उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय, सीबीआई और आयकर विभाग को सौंप दिए हैं। “अब इनका जेल जाना तय है। उन्होंने कहा “अब मामला ताइक्वांडो के सम्मान और खिलाड़ियों के भविष्य का है। खेल परिवार किसी हाल में यह धोखेबाजी बर्दाश्त नहीं करेगा,”।।
